डेट फंड में अब क्या करें?
अब बात करते हैं बेलेंस्ड हाईब्रिड फंड की संतुलित हाइब्रिड फंड वो होता है जिसमें इक्विटी कंपोनेंट 40% से 60% के बीच रहता है। बाकी 60% से 40% के बीच का हिस्सा डेट से बनता है। यह इक्विटी एक्सपोजर 35% के न्यूनतम हिस्से से ज्यादा होता है. इसके अलावा महत्वपूर्ण बात ये है कि महज कुछ स्कीम ही इस कैटेगरी में ऑपरेट हो रही हैं।

डेट फंड में अब क्या करें?
फाइनेंस बिल- 2023 में संशोधनों को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है। इसमें प्रस्ताव दिया गया है कि घरेलू इक्विटी पर 35% से कम जोखिम वाले म्यूचुअल फंड पर टैक्स लगेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस का सीधा प्रभाव डेट फंड पर पड़ता है। इसके अलावा इंटरनेशनल फंड, गोल्ड फंड और यहां तक कि हाइब्रिड फंड जैसी कई अन्य कैटेगरी भी हैं जो इस प्रावधान के तहत कवर किए जाएंगे. हालांकि महत्वपूर्ण ये है कि इस कैटेगरी के दायरे से कौन सी कैटेगरीज बाहर रहेंगी।
अब बात करते हैं कि कौन-कौन से ऐसे फंड जहां इनका असर कम पड़ेगा सबसे पहले बात करते हैं एग्रेसिव हाइब्रिड की।एग्रेसिव हाइब्रिड फंड में पूरे पोर्टफोलिया का 65% से 80% के बीच इक्विटी एक्सपोजर बनाए रखना होता है। 20% से 35% की बाकी राशि डेट लेकर पूरी की जाती है। इसमें इक्विटी की तरफ झुकाव अधिक होता है और इसलिए ये आसानी से नये संशोधन के दायरे से बाहर रह जाएंगे इस कैटेगरी में आने वाले विभिन्न म्यूचुअल फंड्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि इसका 70% या इससे भी ज्यादा हिस्सा इक्विटी में लगा होता है इसलिए ये पहले से ही इक्विटी टैक्सेशन के दायरे में आते हैं.
अब बात करते हैं बेलेंस्ड हाईब्रिड फंड की संतुलित हाइब्रिड फंड वो होता है जिसमें इक्विटी कंपोनेंट 40% से 60% के बीच रहता है। बाकी 60% से 40% के बीच का हिस्सा डेट से बनता है। यह इक्विटी एक्सपोजर 35% के न्यूनतम हिस्से से ज्यादा होता है. इसके अलावा महत्वपूर्ण बात ये है कि महज कुछ स्कीम ही इस कैटेगरी में ऑपरेट हो रही हैं। इसके बाद नंबर आता है डायनामिक असेट एलोकेशन या बैलेंस एडवांटेज फंड का बैलेंस एडवांटेज फंड निवेशकों में बहुत लोकप्रिय है क्योंकिउन्हें इक्विटी और डेट की संरचना में बदलाव के बारे में बहुत चिंता करने की जरूरत नहीं होती। अधिकांश फंड इक्विटी के उच्च स्तर को बनाए रखने की प्रवृत्ति रखते हैं जो 50% से अधिक हैं।
यहां तक कि जब कुछ फंड कैश कॉल लेते हैं तो इक्विटी की हिस्सेदारी 35% के स्तर से अधिक हो जाती है. इस वजह से ये फंड नए बदलाव के दायरे में नहीं रह जाएंगे।इसके बाद नंबर आता है मल्टी एसेट फंड का मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में सोना और वैकल्पिक एसेट के मिक्स के साथ-साथ दो से अधिक एसेट वर्ग का एक्सपोजर होता है। यहां इक्विटी का एक्सपोजर भी 50% से अधिक होता हैऔर यही यह सुनिश्चित करता है कि इस फंड पर प्रस्तावित टैक्सेशन का असर नहीं होगा हर एसेट वर्ग में न्यूनतम 10% आवंटन की आवश्यकता होती है लेकिन इसका इक्विटी स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है जो काफी अधिक होता है।
इसके बाद बात करते हैं इक्विटी सेविंग फंड की इक्विटी सेविंग फंड का बहुत छोटा हिस्सा डेट का होता है और 65% से अधिक फंड इक्विटी में लगा होता है।इससे ये कैटेगरी टैक्सेशन वाले इक्विटी फंड के दायरे में आते हैं और जाहिर है नए बदलाव असर इस पर नहीं पड़ेगा। यहां भी कई ऐसे फंड हैं जो निश्चित समयवधि तक कैश के लिए उच्च आवंटन बनाए रखते हैं।फिर भी ऐसे फंड का इक्विटी एक्सपोजर 35% से अधिक होने की वजह से ये नए संशोधन से बाहर रहने वाले हैं। इस प्रकार ये फंड कुछ ऐसे हैं जहां डेट के नियमों का सबसे कम असर हो सकता है।