Transline Technologies IPO: शेयर बाजार में उतरने की तैयारी, SEBI से मिली मंजूरी के बाद बढ़ी हलचल

कंपनी को मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) से आईपीओ (IPO) के लिए ऑब्जर्वेशन मिल चुके हैं। कंपनी एआई आधारित सर्विलांस, बायोमेट्रिक पहचान और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करती है। 

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By Gaurav Kumar:

Upcoming IPO: प्राइमरी मार्केट में एक और कंपनी अपना इश्यू लाने जा रही है। टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस देने वाली कंपनी ट्रांसलाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (Transline Technologies Limited) शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी को मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) से आईपीओ (IPO) के लिए ऑब्जर्वेशन मिल चुके हैं। कंपनी एआई आधारित सर्विलांस, बायोमेट्रिक पहचान और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करती है। 

पूरी तरह से होगा OFS

ट्रांसलाइन टेक्नोलॉजीज को 22 जनवरी 2026 को सेबी से ऑब्जर्वेशन मिले थे। कंपनी के प्रस्तावित आईपीओ में मौजूदा शेयरधारक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 1.62 करोड़ तक इक्विटी शेयर बेचेंगे। इसमें कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी। यानी आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल पर आधारित होगा।

कहां लिस्ट होंगे कंपनी के शेयर?

कंपनी अपने शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्ट करने की योजना बना रही है। मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स लिमिटेड इस आईपीओ की बुक रनिंग लीड मैनेजर है, जबकि बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड रजिस्ट्रार है। हालांकि, कंपनी ने अभी आईपीओ का प्राइस बैंड, सब्सक्रिप्शन की तारीख और लॉट साइज घोषित नहीं किया है।

क्या काम करती है कंपनी?

ट्रांसलाइन टेक्नोलॉजीज चार प्रमुख क्षेत्रों में काम करती है। इनमें वीडियो सर्विलांस सॉल्यूशंस, बायोमेट्रिक और आइडेंटिटी मैनेजमेंट, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाएं शामिल हैं।

कंपनी रेलवे, स्मार्ट सिटी, तेल और गैस तथा आईटी जैसे क्षेत्रों में सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) और बड़े कारोबारों को सेवाएं देती है।

एआई टेक्नोलॉजी पर भी कंपनी का फोकस

कंपनी ने अपने सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म भी बनाए हैं। इनमें स्टोरपल्स (StorePulse) एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स, कैमस्टोर (CamStore) वीडियो कंप्रेशन और स्टोरेज ऑप्टिमाइजेशन तथा चेककैम (CheckCam) सीसीटीवी नेटवर्क की स्थिति की निगरानी करने के काम आता है।

कंपनी को प्रोजेक्ट आधारित कॉन्ट्रैक्ट के अलावा सालाना मेंटेनेंस एग्रीमेंट, सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन और मैनेज्ड सर्विसेज से भी कमाई होती है।

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