Nifty- Bank Nifty में तेजी कमजोर! प्राइवेट बैंक की सुस्ती से दबाव में बाजार का आउटलुक
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवालों का जवाब देते हुए Coheron Wealth के आदित्य अग्रवाल ने कहा कि बाजार फिलहाल 'बहुत सुस्त' है और इंडेक्स स्तर पर कोई मजबूत संकेत नहीं दे रहा है। हालांकि, चुनिंदा शेयरों में मौके अभी भी बने हुए हैं।

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स में फिलहाल तेजी की धार कमजोर पड़ती दिख रही है। Bank Nifty और Nifty सीमित दायरे में घूम रहे हैं और निवेशकों को बाजार की अगली स्पष्ट दिशा नहीं मिल रही।
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवालों का जवाब देते हुए Coheron Wealth के आदित्य अग्रवाल ने कहा कि बाजार फिलहाल 'बहुत सुस्त' है और इंडेक्स स्तर पर कोई मजबूत संकेत नहीं दे रहा है। हालांकि, चुनिंदा शेयरों में मौके अभी भी बने हुए हैं।
Bank Nifty में महज 1,100 अंकों का दायरा
अग्रवाल के मुताबिक बैंकिंग इंडेक्स की चाल बाजार की कमजोरी को साफ दिखाती है। उन्होंने कहा कि Bank Nifty पूरे महीने 1,100 अंकों के दायरे में कारोबार कर रहा है। यह दो फीसदी भी नहीं है।
Bank Nifty हाल के दायरे के निचले हिस्से के करीब बना हुआ है। बैंकिंग शेयर आमतौर पर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बड़े बैंकिंग शेयरों से मजबूत नेतृत्व नहीं मिलने के कारण बाजार में सतर्कता बनी हुई है।
प्राइवेट बैंक बने कमजोर कड़ी
अग्रवाल ने कहा कि PSU बैंकों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल रही है, लेकिन Private Sector Banks बाजार के लिए कमजोर कड़ी बने हुए हैं। उनके मुताबिक, “Private sector banks are laggard, which is keeping Bank Nifty under pressure.”
इस अंतर का असर Bank Nifty की संभावित तेजी पर भी पड़ रहा है। PSU बैंकों में खरीदारी के बावजूद जब तक बड़े Private Banks भागीदारी नहीं बढ़ाते, तब तक इंडेक्स में टिकाऊ ब्रेकआउट की उम्मीद कमजोर रह सकती है।
Nifty में भी मुनाफावसूली
कमजोरी सिर्फ बैंकिंग शेयरों तक सीमित नहीं है। अग्रवाल के मुताबिक Nifty भी पूरे महीने कोई बड़ी चाल नहीं दिखा पाया है। शुरुआती बढ़त के बाद अब इंडेक्स में मुनाफावसूली दिख रही है। इससे संकेत मिलता है कि किसी नए ट्रिगर के बिना ट्रेडर ऊंचे स्तरों पर खरीदारी से बच रहे हैं।
इस बीच PSU Banks, Fertilizer Stocks और Mid- तथा Small-Cap शेयरों में चुनिंदा गतिविधियां जरूर दिख रही हैं, लेकिन इनसे व्यापक बाजार की दिशा तय नहीं हो पा रही है।