सेबी ने JPMorgan की मॉरीशस यूनिट को किया बैन, क्लोजिंग ऑक्शन में हेरफेर का आरोप

SEBI ने JPMorgan Chase की मॉरीशस स्थित यूनिट Copthall Mauritius Investment Ltd. पर भारतीय कैपिटल मार्केट में रोक लगा दी है। कार्रवाई BSE की नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था में कथित हेरफेर से जुड़ी है। नियामक ने एक स्थानीय ब्रोकिंग फर्म पर भी कार्रवाई करते हुए कथित गलत कमाई जब्त की है।

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By BT बाज़ार डेस्क:

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने JPMorgan Chase & Co. की मॉरीशस स्थित यूनिट Copthall Mauritius Investment Ltd. को भारत के कैपिटल मार्केट से बैन कर दिया है। यह देश की नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था में कथित हेरफेर को लेकर पहली बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई है।

ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक SEBI ने Copthall और स्थानीय ब्रोकिंग फर्म Mansi Share and Stock Broking Ltd. से कथित गलत तरीके से कमाए गए 3.7 करोड़ रुपये जब्त किए हैं।

SEBI बोर्ड सदस्य कमलेश वर्ष्णेय के शुरुआती आदेश के मुताबिक, दोनों संस्थाओं ने 13 अगस्त को क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान BSE Sensex Index की इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर हेरफेर वाले सौदे किए। इससे उनके Sensex ऑप्शंस पोजिशन को फायदा पहुंचा।

बड़े ऑर्डर, फिर कैंसिल करने का आरोप

SEBI के 46 पन्नों के आदेश में कहा गया कि ऑक्शन के दौरान दोनों कंपनियों की अंडरलाइंग सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग “असामान्य” थी। कुछ शेयरों में उनके ऑर्डर कुल ऑर्डर्स के 90% से भी ज्यादा थे।

13 अगस्त को Copthall ने कुल 31.7 लाख शेयरों के खरीद ऑर्डर लगाए, जो अगले सबसे बड़े बाजार प्रतिभागी के ऑर्डर से करीब 12 गुना थे। बाद में उसने इनमें से लगभग एक-तिहाई ऑर्डर कैंसिल कर दिए। वहीं, Mansi Share ने 12.8 लाख शेयरों के बिक्री ऑर्डर लगाए और उनमें से लगभग सभी को बाद में हटा दिया।

SEBI के मुताबिक, दोनों ने ऑर्डर ऊपरी कीमत सीमा के करीब लगाए और फिर बड़ी संख्या में उन्हें कैंसिल किया। इससे बिना पूरी तरह ट्रेड किए इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस प्रभावित हुई और डेरिवेटिव पोजिशन से संभावित नुकसान से बचने या गलत तरीके से फायदा उठाने का मौका मिला।

नई व्यवस्था पर उठे सवाल

BSE की नई ऑक्शन-आधारित व्यवस्था इस महीने 200 से ज्यादा शेयरों के लिए लागू हुई थी। इसका मकसद भारत की व्यवस्था को वैश्विक बाजारों के अनुरूप बनाना और हेरफेर की संभावना घटाना था। लेकिन क्लोजिंग सेशन में बेंचमार्क इंडेक्स में अचानक उछाल और ऑक्शन के दौरान घटती लिक्विडिटी ने ट्रेडर्स की चिंता बढ़ाई है।

Equirus Securities के डेरिवेटिव्स प्रमुख तेजस शाह ने कहा कि BSE पर यह स्थिति “लिक्विडिटी की कमी” की वजह से बनी। हालांकि, उनका मानना है कि कार्रवाई के बावजूद नियामक इस व्यवस्था को जारी रखेगा।

SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने भी कहा है कि नई व्यवस्था बनी रहेगी, हालांकि इसमें बदलाव की गुंजाइश है। नियामक ने हितधारकों के साथ बैठकें भी बढ़ाई हैं।

SEBI ने Copthall और Mansi Share को आरोपों पर जवाब देने के लिए 21 दिन दिए हैं। दोनों व्यक्तिगत सुनवाई की मांग भी कर सकते हैं।

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