4 दिन से अपर सर्किट में शेयर! अब Stock Split, Bonus और Dividend की तैयारी; 2 हफ्ते में 43% तेजी- आपका दांव है?

एग्रीकल्चर सेक्टर की कंपनी एससी एग्रोटेक लिमिटेड के शेयर में लगातार चौथे दिन 5% का अपर सर्किट लगा है। पिछले दो हफ्तों में शेयर 43% चढ़ चुका है। कंपनी अब स्टॉक स्प्लिट, बोनस शेयर और डिविडेंड पर विचार करने वाली है।

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By Gaurav Kumar:

एग्रीकल्चर सेक्टर की कंपनी, एससी एग्रोटेक लिमिटेड (SC Agrotech Ltd) के शेयर में आज लगातार चौथे दिन 5 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा है। BSE Analytics के मुताबिक कंपनी का शेयर पिछले 2 हफ्ते में 43 प्रतिशत चढ़ा है। कंपनी ने आज अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में Stock Split, Bonus Issue और Dividend की जानकारी दी है जिसके बाद शेयर एक बार फिर अपर सर्किट पर लॉक हुआ है। 

1) कंपनी ने अपने फाइलिंग में  बताया कि उसके बोर्ड मेंबर्स आगामी शुक्रवार 13 नवंबर को मीटिंग करेंगे जहां 1:10 के रेश्यो में स्टॉक स्प्लिट यानी 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले 1 इक्विटी शेयर को 1 रुपये के फेस वैल्यू वाले 10 इक्विटी शेयर में बांटा जाएगा। 

2) इसके अलावा कंपनी के बोर्ड मेंबर्स 4:5 के रेश्यो में बोनस शेयर यानी प्रत्येक 5 मौजूदा इक्विटी शेयर के बदले 4 इक्विटी शेयर बोनस के रूप में देने पर भी विचार करेगी। 

3) इसके अलावा बोर्ड मेंबर्स 100% तक के डिविडेंड पर भी विचार कर सकते हैं। 

हाल ही में कंपनी ने दी थी ये जानकारी

हाल ही में कंपनी ने बताया था कि उसका डिजिटल कृषि मार्केटप्लेस AgriBridge आज से agribridge.app पर लाइव हो गया है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य किसानों, कृषि सामग्री के आपूर्तिकर्ताओं और संस्थागत खरीदारों को एक ही डिजिटल मंच पर जोड़ना है।

कंपनी ने बताया कि इसके जरिए किसान अपनी फसलों की ऑनलाइन लिस्टिंग कर सकेंगे, खरीदारों की जानकारी हासिल कर सकेंगे, कीमतों के लिए कोटेशन प्राप्त कर सकेंगे और लेनदेन से जुड़ी प्रक्रियाओं का प्रबंधन कर सकेंगे। इस मॉडल से कंपनी को कृषि लेनदेन और उससे जुड़ी सेवाओं के जरिए नियमित कमाई का अवसर मिल सकता है।

कंपनी का मानना है कि अगर वह इस प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में सक्रिय किसानों और संस्थागत खरीदारों को जोड़ने में सफल रहती है, तो AgriBridge भविष्य में उसके कारोबार के लिए एक नया ग्रोथ वर्टिकल बन सकता है। हालांकि, इस प्लेटफॉर्म की व्यावसायिक सफलता अभी साबित होनी बाकी है। इसके लिए वास्तविक लेनदेन, उनसे मिलने वाली फीस और कंपनी के वित्तीय नतीजों में होने वाली कमाई पर नजर रखनी होगी।

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