SBI, PNB, Union Bank Of India, Bank of Baroda ने करोड़ों का कर्ज बट्टे में डाला!

सरकारी बैंकों के लिए डूबता कर्ज एक बड़ी चिंता है। सरकारी बैंकों के लिए लोन की रिकवरी में मुश्किल हो रही है...ये बात NPA के आंकड़े से साफ हो गई है। चालू करोबारी साल की पहली छमाही में बैंकों ने 42 हजार करोड़ बट्टे खाते में डाल दिए हैं। क्या इसका मतलब ये है कि उधारकर्ताओं की देनदारी माफ हो गई है? या फिर ये सिर्फ एक अकाउंटिंग प्रक्रिया है? चलिए, जानते हैं इस पूरी खबर के बारे में

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By Harsh Verma:

सरकारी बैंकों के लिए डूबता कर्ज एक बड़ी चिंता है। सरकारी बैंकों के लिए लोन की रिकवरी में मुश्किल हो रही है...ये बात NPA के आंकड़े से साफ हो गई है। चालू करोबारी साल की पहली छमाही में बैंकों ने 42 हजार करोड़ बट्टे खाते में डाल दिए हैं। क्या इसका मतलब ये है कि उधारकर्ताओं की देनदारी माफ हो गई है? या फिर ये सिर्फ एक अकाउंटिंग प्रक्रिया है? चलिए, जानते हैं इस पूरी खबर के बारे में

बट्टा खाते यानी कर्ज को अकाउंटिंग बुक्स से बाहर कर दिया गया है। बट्टा खाता बैंकिंग की एक अकाउंटिंग प्रक्रिया होती है। जब कोई ग्राहक या उधारकर्ता अपने लोन का भुगतान नहीं कर पाता, तो बैंक उस लोन को अपने खातों से "हटा" देता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि ग्राहक का कर्ज पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। 

बट्टे खाते में डालने का मतलब सिर्फ इतना है कि बैंक ने उस लोन को अपने मुख्य खाता से बाहर कर दिया है, ताकि उसे अपनी वित्तीय रिपोर्ट में दिखाने के लिए एक नुकसान के रूप में लिखा जा सके, इसका मतलब ये है कि इन बैंकों को इतना पैसा उधारकर्ताओं से वापस नहीं मिल पाया, और उन लोन को उनके खातों से हटा दिया गया। ये लोन ऐसे लोगों या कंपनियों से जुड़े हो सकते हैं जिन्होंने बैंक से ऋण लिया था, लेकिन बाद में उन्हें चुकता नहीं किया।

चालू कारोबारी साल की पहली छमाही में सबसे ज्यादा कर्ज State Bank of India ने written off किया है।
State Bank of India ने 8 हजार 312 करोड़ रुपये 
Punjab National Bank ने  8 हजार 61 crore 
Union Bank of India ने 6 हजार 344 crore 
Bank of Baroda ने 5 हजार 925 करोड़ का कर्ज  बट्टे खाते में डाला है 

₹42,000 करोड़ का इतना बड़ा आंकड़ा बट्टे खाते में डाला गया? इसका एक कारण है कि बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाए रखना। जब बैंक किसी लोन को बट्टे खाते में डालते हैं, तो वो अपने नुकसान को अपनी वित्तीय रिपोर्ट में दिखाते हैं, जिससे उन्हें ये जानकारी मिलती है कि उनका कितनी राशि वापस आने की संभावना नहीं है। ये प्रोसेस बैंक को ये समझने में मदद करती है कि कौन से लोन को वसूलना मुश्किल है और वे किस लोन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

₹42,000 करोड़ की रकम को बट्टे खाते में डालना इकोनॉमी के लिए अच्छा नहीं है...कर्ज डूबने का मतलब है कि ग्राहक कर्ज लोन चुका नहीं पा रहा है या उनकी इतनी कमाई नहीं हो रही है कि वो कर्ज की किस्त का भुगतान कर पाएं। अगर बैंकों को बड़ा नुकसान होता है तो इसका असर बैंकों फंडिंग और निवेश क्षमता पर पड़ सकता है...फिलहाल कर्ज का डूबना भारत की इकनॉमी और बैंकिंग सिस्टम के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। निवेश निर्णय लेने से पहले एक वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने की सिफारिश की जाती है।

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