डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर रिकॉर्ड लो पर पहुंचा, किन शेयरों पर दिखेगा असर?
भारतीय रुपया शुक्रवार (22 नवंबर) को रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया, क्योंकि डॉलर के फिर से मजबूत होने और लगातार FIIs के आउटफ्लो ने भारतीय करेंसी पर दबाव डाला है। जबकि बढ़े हुए जियोपॉलिटिकल रिस्क यानि भू-राजनीतिक जोखिमों ने भी रुपए की भावना को कमजोर किया है।

भारतीय रुपया शुक्रवार (22 नवंबर) को रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया, क्योंकि डॉलर के फिर से मजबूत होने और लगातार FIIs के आउटफ्लो ने भारतीय करेंसी पर दबाव डाला है। जबकि बढ़े हुए जियोपॉलिटिकल रिस्क यानि भू-राजनीतिक जोखिमों ने भी रुपए की भावना को कमजोर किया है।
रुपया शुरुआती ट्रेडिंग में 84.4975 के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो कि गुरुवार (21 नवंबर) को बने 84.4925 के अपने पिछले सबसे निचले स्तर से भी नीचे था।
हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जरिए संभावित हस्तक्षेप से रुपया के नुकसान को सीमित करने में मदद मिली है और ट्रेडर्स ने केंद्रीय बैंक की ओर से 84.50 के आसपास "भारी बिक्री प्रस्ताव" की सूचना दी।
डॉलर इंडेक्स गुरुवार को 13 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था और एशियाई ट्रेडिंग में मामूली गिरावट आई, जबकि ज्यादातर रिजनल करेंसी ने हल्की बढ़त दर्ज की। विदेशी निवेशकों ने नवंबर में अब तक स्थानीय शेयरों और बांडों से 4 बिलियन डॉलर से अधिक की बिकवाली की है, जिससे स्थानीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ गया है।
लगातार डॉलर के मजबूत होने और रुपया कमजोर होने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर नेगेटिव असर पड़ता है। आसान भाषा में कहें तो रुपये में गिरावट एक्पोटर्स के लिए अच्छी खबर है लेकिन इम्पोटर्स को इससे नुकसान होगा। वहीं डॉलर मजबूत होने के IT शेयरों को फायदा होता है। दरअसल ज्यादातर IT कंपनियां अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा डॉलर के रूप में कमाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। निवेश निर्णय लेने से पहले एक वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने की सिफारिश की जाती है।