RBI Monetary Policy Meeting: आपकी EMI पर क्या फैसला होने जा रहा है?
बीते 2 साल से EMI में कमी का इंतजार कर रहे लोगों को अगले महीने गुड न्यूज मिल सकती है। इस भरोसे की वजह दिसंबर की रिटेल मंहगाई दर में आई गिरावट है। ऐसे में अनुमान है कि अगले महीने होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रेपो रेट में कमी करने पर मुहर लगाई जा सकती है।

बीते 2 साल से EMI में कमी का इंतजार कर रहे लोगों को अगले महीने गुड न्यूज मिल सकती है। इस भरोसे की वजह दिसंबर की रिटेल मंहगाई दर में आई गिरावट है। ऐसे में अनुमान है कि अगले महीने होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रेपो रेट में कमी करने पर मुहर लगाई जा सकती है।
दरअसल दिसंबर के महीने में खुदरा महंगाई दर घटकर 4 महीने के निचले स्तरों पर आ गई है। नवंबर के 5.48 फीसदी के मुकाबले दिसंबर में रिटेल महंगाई दर घटकर 5.48 परसेंट पर आ गई। ये लगातार दूसरा महीना रहा जब खुदरा महंगाई में कमी दर्ज की गई है। इस गिरावट की खबर आने के साथ ही रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने भी एक नोट जारी करके कहा है कि अब ब्याज दरों में कटौती का समय नजदीक आ गया है।
क्रिसिल का अनुमान है कि RBI राहत की शुरुआत फरवरी से ही कर सकता है। रिजर्व बैंक की अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 5 से 7 फरवरी को होनी है।
ये पॉलिसी बैठक नए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के कार्यभार संभालने के बाद पहली बैठक होगी। सरकार भी ग्रोथ में गिरावट के बाद ब्याज दरों में कटौती का इंतजार कर रही है। निजी सेक्टर भी कर्ज देने के लिए तैयार बैठे बैंकों के साथ संपर्क करने से पहले लोन के सस्ता होने का इंतजार कर रहा है।
ऐसे में अगर क्रिसिल के नोट को समझा जाए तो इसमें कहा गया है कि कृषि क्षेत्र के उत्पादन में बढ़ोतरी से आने वाले समय में खाद्य महंगाई दर में कमी आ सकती है। अभी तक फूड इंफ्लेशन की वजह से ना तो महंगाई कम हो पा रही थी और ना ही ब्याह दर में कमी की जा सकी। क्रिसिल के नोट में ये भी कहा गया है कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों मे कटौती देखने को मिल रही है। ऐसे में भारत भी इसे ज्यादा समय तक एक ही लेवल पर रोककर नहीं रख सकता।
हालांकि इसमें ये भी साफ किया गया है कि बदलते माहौल में ये तय नहीं है कि ब्याज दरों में कितनी कटौती RBI की MPC करने का फैसला करेगी। क्रिसिल के मुताबिक ट्रंप की पॉलिसी को लेकर आशंकाओं के बीच एसएंडपी ग्लोबल ने 2025 में फेडरल रिजर्व की तरफ से की जाने वाली संभावित कटौती के अपने अनुमान को घटा दिया है।
एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक फेड अब पहले के मुकाबले कम कटौती करेगा, लेकिन इन सबके बावजूद दुनिया भर का कारोबारी माहौल दरों में कटौती के पक्ष में है यानी कटौती पहले के मुकाबले कम होने के भरपूर आसार हैं लेकिन ज्यादा संभावना इसी बात है कि ब्याज दरों में कटौती हर हाल में की जाएगी। नोट में ये भी कहा गया है कि हाल में आए जीडीपी के एडवांस अनुमानों के आंकड़ों में सुस्ती के संकेत हैं। ऐसे में महंगाई दर में नरमी के साथ ये आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि दरों में कटौती को अब टाला नहीं जा सकता है।