Explained: सेबी ने अपने ऑर्डर में Rajesh Exports पर क्या-क्या आरोप लगाएं? शेयर में आज लगा लोअर सर्किट
सेबी ने कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों में सीधे या परोक्ष रूप से खरीद-बिक्री या किसी भी तरह का लेनदेन करने से रोक दिया है। साथ ही कंपनी को अपने वित्तीय नतीजों, रिलेटेड पार्टी के लेनदेन और अन्य खुलासों में 'सही और निष्पक्ष' जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।

सोना रिफाइनिंग और ज्वेलरी कारोबार से जुड़ी कंपनी Rajesh Exports पर SEBI की अंतरिम कार्रवाई ने कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग और फंड ट्रांजैक्शन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
BSE और NSE में लिस्ट इस कंपनी पर रेगुलेटर ने राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने, फंड्स को प्रमोटर के निजी खातों से रूट करने और जरूरी खुलासे नहीं करने जैसे आरोप लगाए हैं। स्टॉक में आज 5% का लोअर सर्किट लगा है।
प्रमोटर पर शेयर बाजार में रोक
सेबी ने कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों में सीधे या परोक्ष रूप से खरीद-बिक्री या किसी भी तरह का लेनदेन करने से रोक दिया है। साथ ही कंपनी को अपने वित्तीय नतीजों, रिलेटेड पार्टी के लेनदेन और अन्य खुलासों में 'सही और निष्पक्ष' जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।
रेगुलेटर ने कहा कि मामले में डिटेल में जांच होना जरूरी है, जिसमें कंपनी की अकाउंट बुक्स की जांच कर वास्तविक वित्तीय स्थिति सामने लाई जाएगी।
नए फोरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति होगी
सेबी ने कंपनी के खातों की जांच पूरी करने के लिए नए फोरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का आदेश दिया है। रेगुलेटर के मुताबिक, पहले नियुक्त ऑडिटर को कंपनी और प्रमोटर की ओर से सहयोग नहीं मिला था।
आदेश में यह भी कहा गया कि मामले को National Financial Reporting Authority (NFRA) को भेजा जाएगा क्योंकि सेबी ने वैधानिक ऑडिटर्स की भूमिका में पहली नजर में लापरवाही और कर्तव्य में चूक देखी है।
शिकायत से शुरू हुई जांच
मार्च 2024 में एक शेयरधारक ने सेबी से शिकायत की थी कि कंपनी की बही-खातों में लंबे समय से बकाया ट्रेड रिसीवेबल्स को लेकर संभावित वित्तीय गड़बड़ी हुई है। इसके बाद अक्टूबर 2024 में Sebi ने औपचारिक जांच शुरू की और दिसंबर 2024 में फोरेंसिक ऑडिट कराया गया।
₹15.15 लाख करोड़ राजस्व बढ़ाकर दिखाने का आरोप
सेबी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच Rajesh Exports ने अपनी सब्सिडियरी कंपनियों से जुड़े लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व को गलत तरीके से पेश किया। यह कंपनी की कुल आय का करीब 99.80% हिस्सा था। सेबी ने अपने ऑर्डर में कहा कि 97-99 प्रतिशत तक राजस्व बढ़ाकर दिखाने जैसी गड़बड़ियां बेहद गंभीर हैं।
प्रमोटर के निजी खाते से फंड ट्रांसफर
जांच के दौरान सेबी ने पाया कि कंपनी के फंड्स कई बार राजेश मेहता के निजी बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किए गए। कंपनी ने इसे गोपनीयता बनाए रखने और आगे ट्रांसफर की सुविधा जैसे कारणों से जोड़ा, लेकिन सेबी को इसके समर्थन में कोई बोर्ड मंजूरी या दस्तावेज नहीं दिए गए।
Sebi ने आदेश में कहा कि कंपनी ने 17 मार्च 2026 के ईमेल में माना था कि फंड्स को बैंक खाते की जानकारी छिपाने के लिए राजेश मेहता के खाते से रूट किया गया। रेगुलेटर के मुताबिक, यह फंड ट्रेल छिपाने और लेयरिंग का संकेत देता है।