बड़े अधिग्रहण पर विचार से पहले शेयर में लगा 5% का अपर सर्किट! 30 मार्च को हो सकता है फैसला
कंपनी सिंगापुर की Neo Semi SG Pte. Ltd. में 89.65% हिस्सेदारी और Refit Global Private Limited में 43.05% हिस्सेदारी खरीदने पर विचार करेगी, जिसमें शेयर स्वैप के जरिए भुगतान किया जाएगा।

एलईडी वीडियो डिस्प्ले, लाइटिंग प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक व टेलीकम्युनिकेशन उपकरणों के डिजाइन, डेवलपमेंट और निर्माण करने वाली स्मॉल कैप कंपनी एमआईसी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (MIC Electronics Ltd) के शेयर में आज 5 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा है।
800 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली इस कंपनी का शेयर आज बीएसई पर पांच फीसदी तेजी के साथ 33.23 रुपये पर स्थिर है।
दअसल कंपनी ने बीते मंगलवार को बाजार बंद होने के बाद अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक आगामी 30 मार्च 2026 को होगी। इस बैठक में कई अहम फैसलों पर विचार किया जाएगा।
कंपनी सिंगापुर की Neo Semi SG Pte. Ltd. में 89.65% हिस्सेदारी और Refit Global Private Limited में 43.05% हिस्सेदारी खरीदने पर विचार करेगी, जिसमें शेयर स्वैप के जरिए भुगतान किया जाएगा।
इसके अलावा, कंपनी दीपायन मोहंती के पद में बदलाव, EGM (अतिरिक्त आम बैठक) की तारीख तय करने, स्क्रूटिनाइजर नियुक्त करने और अपनी सब्सिडियरी MICK Digital India Limited के कुछ शेयर ट्रांसफर करने जैसे फैसले भी ले सकती है।
कंपनी अपने लाइटिंग और मेडिकल डिवीजन को भी MICK Digital India Limited को ट्रांसफर करने की योजना बना रही है। इन सभी प्रस्तावों पर अंतिम फैसला बोर्ड मीटिंग में लिया जाएगा।
Q3 में 80% बढ़ी सेल
हैदराबाद स्थित एलईडी डिस्प्ले और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने वाली MIC Electronics Ltd के Q3 FY26 नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कंपनी की नेट सेल्स सालाना आधार पर 80% की बढ़त के साथ 90.23 करोड़ रुपये तक पहुंच गई जो एक साल पहले 50 करोड़ रुपये थी।लेकिन तिमाही आधार पर उसका नेट प्रॉफिट 13.36% घटकर 1.88 करोड़ रुपये रह गया।
तेज रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद कंपनी के मुनाफे पर दबाव साफ दिखा। इस तिमाही में ऑपरेटिंग मार्जिन Q2 FY26 के 10.06% से घटकर 4.40% रह गया, जबकि पीएटी मार्जिन भी 5.73% से गिरकर 2.08% पर आ गया। पिछले एक साल में शेयर में करीब 45% की गिरावट आई है, जबकि सेंसेक्स में इसी दौरान बढ़त दर्ज की गई। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है कि कंपनी की मजबूत बिक्री बढ़त क्या लंबे समय तक टिकाऊ मुनाफे में बदल पाएगी या नहीं।