IRFC के शेयर पर OFS का असर! फ्लोर प्राइस से नीचे खुला स्टॉक- शेयर में लगातार तीसरे दिन गिरावट

कंपनी का शेयर बीएसई पर 90.81 रुपये पर खुला, जो OFS के 91 रुपये के फ्लोर प्राइस से भी नीचे था। शुरुआती कारोबार में शेयर करीब 2 फीसदी तक टूट गया। इससे पहले मंगलवार को इसमें 2.16 फीसदी और बुधवार को 6.24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

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By Gaurav Kumar:

IRFC Share: सरकार की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) में ओवरसब्सक्रिप्शन ऑप्शन का इस्तेमाल किए जाने के बाद गुरुवार को इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) के शेयर पर दबाव देखने को मिला।

कंपनी का शेयर बीएसई पर 90.81 रुपये पर खुला, जो OFS के 91 रुपये के फ्लोर प्राइस से भी नीचे था। शुरुआती कारोबार में शेयर करीब 2 फीसदी तक टूट गया। इससे पहले मंगलवार को इसमें 2.16 फीसदी और बुधवार को 6.24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

फिलहाल खबर लिखे जानें तक सुबह 9:52 बजे तक कंपनी का शेयर बीएसई पर 0.68% या 0.63 रुपये गिरकर 91.90 रुपये पर ट्रेड कर रहा है और एनएसई पर स्टॉक 0.56% या 0.52 रुपये टूटकर 91.98 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

नॉन-रिटेल निवेशकों से मिला जोरदार रिस्पॉन्स

गुरुवार को OFS का रिटेल हिस्सा सब्सक्रिप्शन के लिए खुला, जबकि पहले दिन नॉन-रिटेल निवेशकों ने इस इश्यू को मजबूत प्रतिक्रिया दी। DIPAM ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि OFS का गैर-रिटेल हिस्सा 1.86 गुना सब्सक्राइब हुआ। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, निवेशकों ने 91.10 रुपये प्रति शेयर के सांकेतिक भाव पर बोलियां लगाईं, जबकि बुधवार को IRFC का शेयर 92.53 रुपये पर बंद हुआ था।

सरकार ने बढ़ाया OFS का आकार

मजबूत मांग को देखते हुए सरकार ने ओवरसब्सक्रिप्शन ऑप्शन का इस्तेमाल किया। इसके तहत 1 फीसदी के बेस ऑफर के अलावा 0.86 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी भी बिक्री के लिए शामिल की गई। इसके बाद कुल OFS का आकार बढ़कर 24,30,87,100 शेयर यानी कंपनी की कुल चुकता इक्विटी पूंजी का 1.86 फीसदी हो गया।

कुल ऑफर में से 2,43,08,711 शेयर, यानी 10 फीसदी हिस्सा, वैध बोलियों के आधार पर रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है। वहीं, कंपनी के कर्मचारियों के लिए भी 25,000 शेयर ऑफर किए गए हैं।

सरकार की हिस्सेदारी घटाने की दिशा में एक और कदम

गुरुवार को केवल रिटेल निवेशक OFS में बोली लगा सकते हैं। वहीं, 24 जून को बोली लगाने वाले नॉन-रिटेल निवेशकों को, यदि उनकी अनअलॉटेड बोलियां अगले दिन तक आगे बढ़ाई गई हैं, तो उनमें बदलाव किया जा सकता है।

सरकार के पास कंपनी में कितनी हिस्सेदारी?

सरकार की IRFC में 86.36 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के तहत 75 फीसदी तक लाना जरूरी है। चालू वित्त वर्ष में यह छठा सार्वजनिक उपक्रम है, जहां सरकार ने अपनी हिस्सेदारी घटाने की प्रक्रिया शुरू की है।

इससे पहले GIC Re, NLC India, NHPC, Coal India और Central Bank of India में हिस्सेदारी बेचकर सरकार 16,479.89 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।
 

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