बड़े मर्जर की तैयारी में सिगरेट बनाने वाली ये कंपनी! 1 साल में 8 गुना हो चुका है निवेशकों का पैसा - Details
सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट बनाने वाली इस कंपनी ने बताया कि उसने अपने भविष्य के विस्तार और शेयरधारकों को अच्छा वैल्यू देने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

15,273.67 करोड़ रुपये के मार्कट कैप वाली कंपनी, एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (Elitecon International Ltd) ने आज निवेशकों को अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में बड़ी जानकारी दी है।
सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट बनाने वाली इस कंपनी ने बताया कि उसने अपने भविष्य के विस्तार और शेयरधारकों को अच्छा वैल्यू देने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
कंपनी ने फाइलिंग में बताया कि उसने मर्जर (विलय) से जुड़े टैक्स, रेगुलेटरी और ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट के लिए ग्लोबल प्रोफेशनल फर्म Deloitte Touche Tohmatsu India LLP को अपना सलाहकार नियुक्त किया है।
फाइलिंग से मिली जानकारी के मुताबिक कंपनी का बोर्ड फिलहाल Sunbridge Agro Private Limited, Landsmill Agro Private Limited और Golden Cryo Private Limited के साथ विलय की योजना पर विचार कर रहा है, जिसके लिए सभी जरूरी वैधानिक और NCLT की मंजूरी ली जाएगी।
कंपनी ने बताया कि इस प्रस्तावित मर्जर से बिजनेस वर्टिकल्स का इंटीग्रेशन, ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार, बैलेंस शीट को मजबूती, कमाई की बेहतर स्थिरता और बाजार में कंपनी की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
कंपनी का मानना है कि यह मर्जर Elitecon International Limited को लंबे समय के लिए एक मजबूत ग्रोथ प्लेटफॉर्म देगा।
Elitecon International Share Price
कंपनी का शेयर फिलहाल दोपहर 2:38 बजे तक बीएसई पर 0.32% या 0.31 रुपये गिरकर 95.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
1 साल में 8 गुना हुआ पैसा
इस शेयर ने निवेशकों का पैसा 1 साल में 8 गुना करते हुए 733 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। वहीं पिछले 3 साल में शेयर 8970% से अधिक और पिछले 5 साल में 9425 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है।
सिगरेट पर बढ़े हुए टैक्स से कंपनी ने नहीं पड़ेगा फर्क
हाल ही में सरकार ने जो सिगरेट पर टैक्स बढ़ाया है जो 1 फरवरी से लागू होगा, इसका एलीटकॉन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी का बिजनेस मॉडल पूरी तरह एक्सपोर्ट पर आधारित है।
तंबाकू के एक्सपोर्ट पर जीएसटी जीरो रहता है। एक्सपोर्ट को जीएसटी में जीरो-रेटेड माना जाता है और एलीटकॉन इंटरनेशनल LUT और रिफंड मैकेनिज्म के तहत निर्यात करती है। इसका मतलब है कि सिगरेट और तंबाकू पर जीएसटी दर बढ़ने से कंपनी की कमाई या मार्जिन पर सीधा असर नहीं पड़ता।