Nifty के लिए आया Danger Signal, इन Level पर आएगी रिकवरी!

भारतीय शेयर बाजार अपने NSE Nifty 50 इंडेक्स के ऑल टाइम हाई 26,277 के लेवल से 10 प्रतिशत नीचे आ चुका है। बाजार ने 27 सितंबर 2024 को ये लेवल हासिल किया था।

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By Harsh Verma:

भारतीय शेयर बाजार अपने NSE Nifty 50 इंडेक्स के ऑल टाइम हाई 26,277 के लेवल से 10 प्रतिशत नीचे आ चुका है। बाजार ने 27 सितंबर 2024 को ये लेवल हासिल किया था। बुधवार को Nifty ने 374 अंक गिरकर 23,509 के दिन के निचले स्तर तक पहुंचा। जिसके बाद क्लोजिंग 1.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,559 पर हुई। वहीं BSE Sensex भी 1,100 अंक से अधिक गिरकर 77,533 के दिन के निचले स्तर पर पहुँचा और फिर 77,690.95 पर क्लोजिंग हुई।

बड़ा संकेत
इसके साथ ही बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स ने 20 महीने में पहली बार 200-डे मूविंग एवरेज के नीचे गिरावट दर्ज की, जो निवेशकों के सतर्क रवैये और बाजार की निकट भविष्य की दिशा के लिए एक संभावित बदलाव का संकेत है।

गिरावट के बड़े कारण?
बाजार में गिरावट ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के जरिए लगातार बिकवाली के बीच 5वें दिन में गिरावट जारी रही, जबकि मार्केट सेंटीमेंट्स कई कारकों के मेल से प्रभावित हुई है, जिससे निवेशकों का विश्वास डगमगाया है। इस महीने की शुरुआत से 12 नवंबर तक FIIs ने 23,911 करोड़ की बिकवाली की है जबकि DIIs ने 10,210 करोड़ की खरीदारी की है।

यह करेक्शन निवेशकों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है, जो उच्च वैल्यूएशन और मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताओं के बीच हो रहा है, जिसमें Nifty और Sensex आज अपने-अपने पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। विशेषज्ञों के अनुसार, इस ताजे गिरावट को विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर कॉर्पोरेट कमाई और बढ़ती महंगाई ने तेज किया। सितंबर के अंत से, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से लगभग 14 बिलियन डॉलर की बिकवालीकी है।

कॉर्पोरेट कमाई भी बाजारों को आश्वस्त करने में विफल रही, कई कंपनियों ने4 सालों में अपनी सबसे कमजोर तिमाही प्रदर्शन की रिपोर्ट दी। इसके अलावा अक्टूबर में रिटेल महंगाई 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका लगा।

इसके अलावा सप्ताहिक बैंक निफ्टी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति के साथ ट्रेडर्स के अपनी पॉजिशनिंग को समटने की संभावना है, जिससे बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।

कब आएगी रिकवरी?
मार्केट एक्सपर्ट राघवेंद्र सिंह का कहना है कि 23,200 के लेवल से बाजार में रिकवरी की गुंजाइश है। अगर ये लेवल्स भी टूटते हैं तो सीधा बाजार गिरकर 21300 पर आ जाएगा। वहीं Bank Nifty की बात की जाए तो 50,000 के लेवल टूटते हैं तो ये बिकवाली और बढ़ेगी।

कहां सबसे ज्यादा असर?
सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स में BSE तेल और गैस और एनर्जी इंडेक्स शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक ने 19 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की है, इसके बाद रियल्टी और टेलीकॉम क्षेत्र रहे, जिन्होंने अपने उच्चतम स्तरों से 16 प्रतिशत से अधिक की गिरावट की। BSE ऑटो इंडेक्स और पावर में  15.7 प्रतिशत और 14.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि सर्विसेस और यूटिलिटीज में भी अपने 52 वीक हाई  के उच्चतम स्तरों से 14 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। BSE PSU इंडेक्स में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि BSE SME IPO और BSE IPO इंडेक्स क्रमशः अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तरों से 13 प्रतिशत और 10 प्रतिशत गिर गए।

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