BSE vs NSE: किस एक्सचेंज में मिलेगा निवेशकों को फायदा? एक्सपर्ट गौरांग शाह से जानिए पूरी डिटेल
NSE के IPO की हलचल के बीच BSE और NSE की वैल्यूएशन को लेकर चर्चा तेज है। बाजार के जानकार गौरांग शाह ने दोनों एक्सचेंजों की भूमिका, आकार और ग्रोथ को लेकर अहम बातें बताई है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयर बाजार में उतरने के बीच BSE और NSE की वैल्यूएशन को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवालों का जवाब देते हुए जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के गौरांग शाह ने दोनों एक्सचेंजों को लेकर संतुलित राय रखी है।
उनका कहना है कि निवेशक भले ही दोनों के मल्टीपल और मार्केट पोजिशन की तुलना करें, लेकिन भारतीय कैपिटल मार्केट की ग्रोथ का फायदा दोनों एक्सचेंजों को मिल सकता है।
BSE ने दिया बड़ा रिटर्न, फिर आई गिरावट
गौरांग शाह ने BSE के पिछले पांच साल के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि शेयर करीब “चार सौ पचास, पांच सौ या शायद उससे भी नीचे” से बढ़कर “चार हजार, पांच हजार भी” तक पहुंच गया था। इसके बाद शेयर में कुछ करेक्शन आया।
उनके मुताबिक, इस गिरावट के पीछे कैश मार्केट में इनफ्लो धीमा पड़ने की चिंता और कुछ स्पेकुलेटिव वॉल्यूम के MCX की ओर जाने जैसी वजहें रहीं। इससे यह भी साफ होता है कि एक्सचेंज कंपनियों की वैल्यूएशन ट्रेडिंग वॉल्यूम, प्रोडक्ट मिक्स और रेगुलेटरी बदलावों के प्रति कितनी संवेदनशील होती है।
NSE का बड़ा स्केल अहम
हालांकि, एक्सपर्ट ने NSE के बड़े आकार और व्यापक पहुंच को उसकी अहम ताकत बताया। उन्होंने कहा कि NSE एक बड़ा खिलाड़ी है और व्यापक पहुंच के साथ एक बड़ा एक्सचेंज है।
NSE ने डिजिटाइजेशन, देशभर में बाजार की पहुंच, तेज सेटलमेंट और रिटेल भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यही वजह है कि NSE की लिस्टिंग को भारत की बढ़ती फाइनेंशियलाइजेशन कहानी से जोड़कर देखा जा रहा है।
NSE vs BSE: किसमें होगा फायदा?
एक्सपर्ट गौरांग शाह ने इसे NSE और BSE के बीच सीधा कंपीटिशन मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि BSE की अपनी भूमिका है और NSE की अपनी भूमिका, साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी एक एक्सचेंज के पक्ष में नहीं हैं।
उनके मुताबिक, अगर भारतीय इक्विटी मार्केट में लगातार ग्रोथ होती है, तो इसका फायदा NSE और BSE दोनों को मिल सकता है।
उन्होंने कहा "अगर भारतीय इक्विटी मार्केट को अच्छा प्रदर्शन करना है, तो NSE और BSE भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे।" यानी निवेशकों के लिए मुद्दा सिर्फ NSE या BSE में से किसी एक को चुनना नहीं है, बल्कि भारत के कैपिटल मार्केट की आगे की ग्रोथ को समझना भी अहम है।