सोना खरीदने के लिए धनतेरस का इंतजार क्यों? एक्सपर्ट ने बताया हर महीने खरीदारी का बड़ा फायदा
सोने की ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में डिजिटल गोल्ड की खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। अब निवेशक त्योहारों का इंतजार करने के बजाय SIP के जरिए छोटी रकम से सोना जमा कर रहे हैं। लेकिन क्या डिजिटल गोल्ड में निवेश करना फायदेमंद है या Gold ETF बेहतर विकल्प है?

In Short
- जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान डिजिटल गोल्ड की खरीदारी 76% बढ़कर 16.3 टन पहुंच गई।
- एक्सपर्ट के मुताबिक, SIP से पूरे साल छोटी-छोटी रकम में सोना खरीद सकते हैं, त्योहार का इंतजार जरूरी नहीं।
- डिजिटल गोल्ड पर 3% GST और दूसरे चार्ज लग सकते हैं, जबकि Gold ETF में खर्च और निवेशकों की सुरक्षा के नियम अलग हैं।
भारत में सोने में निवेश करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लोग सिर्फ धनतेरस या त्योहारों पर सोना खरीदने के बजाय छोटी-छोटी रकम से डिजिटल गोल्ड में निवेश कर रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की Q3 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच डिजिटल गोल्ड की खरीदारी 76 फीसदी बढ़ी है। हालांकि, डिजिटल गोल्ड में निवेश करने से पहले इससे जुड़े खर्च और जोखिम समझना भी जरूरी है।
डिजिटल गोल्ड की खरीदारी में जबरदस्त उछाल
WGC की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान डिजिटल गोल्ड की कुल खरीदारी बढ़कर 16.3 टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 9.2 टन थी।
जुलाई से सितंबर तिमाही में डिजिटल गोल्ड की खरीदारी 44 फीसदी बढ़कर 4.9 टन रही, जो पिछले साल 3.4 टन थी। खास बात यह है कि इस दौरान सोने की औसत घरेलू कीमत 45 फीसदी बढ़कर 1,48,891 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई थी। इसके बावजूद डिजिटल गोल्ड की मांग बढ़ती रही।
सोना खरीदने के लिए धनतेरस का इंतजार क्यों?
सेफगोल्ड की को-फाउंडर और COO रिया चटर्जी के मुताबिक, SIP के जरिए ग्राहक पूरे साल थोड़ी-थोड़ी रकम से सोना खरीद सकते हैं। इससे त्योहारों पर एक साथ बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती।
उन्होंने बताया कि ग्राहक जमा किए गए डिजिटल गोल्ड को बाद में सिक्कों में बदल सकते हैं या तनिष्क जैसे पार्टनर्स के जरिए ज्वेलरी खरीद सकते हैं। सेफगोल्ड पर 0.1 ग्राम से भी सोने के सिक्के मिल सकते हैं। कई ग्राहक रोजाना या हर महीने सोना खरीदना पसंद करते हैं।
डिजिटल गोल्ड और Gold ETF में क्या अंतर?
डिजिटल गोल्ड में निवेशक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सोने का छोटा हिस्सा खरीदते हैं। इसकी सुरक्षित रखरखाव की जिम्मेदारी सर्विस प्रोवाइडर की होती है।
वहीं, Gold ETF शेयर बाजार में ट्रेड होने वाला रेगुलेटेड म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट है। डिजिटल गोल्ड पर Gold ETF जैसी SEBI की निगरानी नहीं होती। इसलिए निवेशकों को कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था, ऑडिट, इंश्योरेंस और रिडेम्पशन नियम जरूर समझने चाहिए।
डिजिटल गोल्ड खरीदने पर कितना खर्च?
डिजिटल गोल्ड की खरीदारी पर आमतौर पर 3 फीसदी GST लगता है। इसके अलावा खरीदने और बेचने की कीमत में अंतर होता है। फिजिकल गोल्ड लेने पर सिक्के बनाने और डिलीवरी का खर्च भी लग सकता है।
Gold ETF में एक्सपेंस रेशियो और ब्रोकरेज जैसे खर्च होते हैं, लेकिन ETF यूनिट खरीदने पर आमतौर पर GST नहीं लगता।
क्या डिजिटल गोल्ड से अतिरिक्त कमाई भी होगी?
रिया चटर्जी के मुताबिक, सेफगोल्ड के कुछ ग्राहक गोल्ड लीजिंग के जरिए अतिरिक्त 4 फीसदी रिटर्न का फायदा लेते हैं। हालांकि, यह गारंटीड रिटर्न नहीं है और इसमें अलग जोखिम भी हैं।
ऐसे में निवेशकों को डिजिटल गोल्ड और Gold ETF के बीच चुनाव करते समय खर्च, टैक्स, सुरक्षा और पैसे निकालने की सुविधा की तुलना जरूर करनी चाहिए।