सरकार का जोर UPS पर, फिर भी कर्मचारियों की पहली पसंद क्यों बना हुआ है NPS? जानें बड़ी वजह

यूनिफाइड पेंशन स्कीम को लेकर सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। UPS के नियमों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा और यह NPS के तहत वैकल्पिक व्यवस्था बनी रहेगी। लेकिन सवाल यह है कि तय पेंशन के बावजूद कई कर्मचारी NPS को क्यों चुन रहे हैं और OPS की मांग क्यों जारी है? पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • केंद्र सरकार ने साफ किया है कि UPS में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा और यह NPS के तहत वैकल्पिक योजना बनी रहेगी।
  • UPS में 25 साल की सेवा पर औसत बेसिक वेतन का 50% सुनिश्चित पेंशन और 60% फैमिली पेंशन का प्रावधान है।
  • युवा कर्मचारियों के बीच NPS अब भी लोकप्रिय है क्योंकि इसमें फंड मैनेजर और निवेश का विकल्प चुनने की सुविधा मिलती है।

By Gaurav Kumar:

Unified Pension Scheme: केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS में फिलहाल किसी तरह के बदलाव की योजना नहीं है। यह स्कीम 1 अप्रैल 2025 से नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS के तहत एक वैकल्पिक पेंशन व्यवस्था के रूप में लागू है और अपने मौजूदा स्वरूप में ही जारी रहेगी।

लोकसभा में एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि NPS के दायरे में आने वाले केंद्रीय कर्मचारी अपनी इच्छा से UPS को चुन सकते हैं। सरकार के पास अभी UPS के नियमों में बदलाव या संशोधन करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

किन कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है UPS?

यूनिफाइड पेंशन स्कीम केंद्र सरकार की नौकरी में नई नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के साथ मौजूदा NPS कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध है। इसके अलावा पात्र रिटायर्ड कर्मचारी भी इसके दायरे में आते हैं।

अगर किसी पात्र पेंशनधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके कानूनी रूप से विवाहित पति या पत्नी को भी योजना के तहत लाभ मिल सकता है। सरकार ने दोहराया है कि UPS को NPS के अंदर एक वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ही जारी रखा जाएगा।

UPS में कर्मचारियों को क्या लाभ मिलता है?

सरकार के मुताबिक, UPS का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक तय और अनुमानित पेंशन सुरक्षा देना है। योजना के तहत 25 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को औसत बेसिक वेतन का 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन के रूप में मिल सकता है।

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पेंशन को महंगाई भत्ते यानी DA से जोड़ने का भी प्रावधान है। पेंशनधारक की मृत्यु होने पर उसके पति या पत्नी को पेंशन की 60 प्रतिशत रकम फैमिली पेंशन के रूप में मिल सकती है।

कर्मचारियों की चिंता क्या है?

ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉयीज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल के मुताबिक, UPS में कर्मचारी का 10 प्रतिशत योगदान बना रहता है, जबकि सरकार का योगदान बढ़ जाता है।

उनका कहना है कि कोई कर्मचारी शुरुआत में UPS नहीं चुनता और रिटायरमेंट के करीब इसमें शामिल होना चाहता है, तो इसका फैसला सरकार की शर्तों और कैलकुलेशन मैट्रिक्स के आधार पर होगा।

युवा कर्मचारी NPS को क्यों चुन रहे हैं?

कर्मचारी संगठनों के अनुसार, युवा कर्मचारियों के बीच NPS अब भी लोकप्रिय है। अगर कोई कर्मचारी 60 वर्ष की आयु से पहले सरकारी नौकरी छोड़ देता है, तो उसे UPS के तहत मिलने वाली सुनिश्चित पेंशन का लाभ नहीं मिल सकता।

वहीं NPS में कर्मचारी अपना फंड मैनेजर और निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। कर्मचारी अपने PRAN खाते में जमा पेंशन कॉर्पस के मालिक भी बने रहते हैं। हालांकि, अंतिम फंड बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल UPS में बदलाव नहीं होगा। केंद्रीय कर्मचारियों को अपनी नौकरी की अवधि, रिटायरमेंट की जरूरत और निवेश की पसंद को देखकर UPS या NPS में से किसी एक को चुनना होगा। कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी उठाई है, लेकिन सरकार ने UPS की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव से इनकार किया है।

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