चाहे 20 के हों या 60 साल के, पोर्टफोलियो में बॉन्ड क्यों जरूरी? जानिए किस उम्र में कितना करें निवेश

बॉन्ड को केवल रिटायरमेंट के बाद का निवेश मानना सही नजरिया नहीं है। India Bonds के को-फाउंडर विशाल गोयनका के मुताबिक, युवा निवेशकों के पोर्टफोलियो में भी फिक्स्ड इनकम की जगह होनी चाहिए। उन्होंने उम्र के हिसाब से बॉन्ड में निवेश और पोर्टफोलियो बैलेंस करने का आसान फॉर्मूला समझाया।

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In Short

  • 21 से 30 साल के सैलरीड निवेशक भी बॉन्ड में लगा रहे पैसा
  • युवा निवेशकों के लिए 20-25% फिक्स्ड इनकम रखने की सलाह
  • उम्र बढ़ने के साथ फिक्स्ड इनकम की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर

By Gungun Mishra:

बॉन्ड को अक्सर ऐसे निवेश के तौर पर देखा जाता है, जो रिटायर हो चुके लोगों या कम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए होता है। बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Indiabonds के को-फाउंडर विशाल गोयनका ने कहा कि फिक्स्ड इनकम निवेश हर उम्र के निवेशक के पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए। निवेशक की उम्र, कमाई या बाजार का अनुभव चाहे जो हो, सही एसेट एलोकेशन में बॉन्ड की अपनी अहम भूमिका हो सकती है।

विशाल गोयनका ने कहा कि निवेशकों को केवल उम्र के आधार पर किसी एसेट क्लास को अपने पोर्टफोलियो से बाहर नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि इक्विटी के साथ बॉन्ड पोर्टफोलियो में स्थिरता लाने में मदद कर सकते हैं।

युवाओं के लिए भी बॉन्ड

विशाल गोयनका ने कहा कि फाइनेंशियल पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से तैयार करना उम्र से अलग विषय है। उनके मुताबिक, उनके प्लेटफॉर्म पर 21 से 30 साल की उम्र के कई सैलरीड निवेशकों ने भी बॉन्ड में पैसा लगाना शुरू किया है।

यह दिखाता है कि निवेशक अब केवल फिक्स्ड डिपॉजिट और इक्विटी तक सीमित रहने के बजाय अलग-अलग एसेट में पैसा लगाने पर ध्यान दे रहे हैं। बॉन्ड को अनुशासन, डायवर्सिफिकेशन और नियमित कैश फ्लो के एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

मुश्किल समय के लिए रखें हिस्सा

युवा निवेशकों के लिए गोयनका की सलाह है कि शुरुआत जल्दी करें, लेकिन पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखें। इक्विटी पोर्टफोलियो में ग्रोथ का बड़ा जरिया हो सकती है, लेकिन कुछ हिस्सा फिक्स्ड इनकम के लिए भी रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुश्किल समय यानी ‘रेनी डे’ के लिए करीब 20 से 25 फीसदी हिस्सा ऐसा होना चाहिए, जहां से नियमित इनकम मिल सके। यह खासतौर पर उन सैलरीड लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिनके ऊपर EMI और हर महीने के दूसरे खर्च होते हैं। समय-समय पर ब्याज देने वाले बॉन्ड इनकम और खर्च के बीच संतुलन बनाने में मदद कर सकते हैं।

उम्र बढ़ने के साथ बदलता है जोखिम

बड़ी उम्र के निवेशकों के लिए गोयनका ने बॉन्ड की हिस्सेदारी ज्यादा रखने की बात कही। उनके मुताबिक, जैसे-जैसे निवेशक की संपत्ति बढ़ती है, फोकस केवल पैसा बढ़ाने से हटकर जमा पूंजी को सुरक्षित रखने की तरफ भी जाता है।

उन्होंने इसका एक आसान उदाहरण देते हुए कहा कि अगर आपकी उम्र 20 साल है तो फिक्स्ड इनकम में 20 फीसदी और अगर उम्र 60 साल है तो इसमें 60 फीसदी हिस्सा रखा जा सकता है। इसे उन्होंने क्लासिक ‘20/60 रूल’ बताया।

पोर्टफोलियो में बैलेंस पर जोर

विशाल गोयनका के मुताबिक, बॉन्ड को केवल बचत के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के एक अहम टूल के तौर पर भी देखा जा सकता है। उनका जोर इस बात पर है कि डायवर्सिफिकेशन किसी एक उम्र के निवेशकों के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए जरूरी है।

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