Yield और Return में क्या होता है अंतर? ज्यादातर निवेशक नहीं जानते जवाब - फटाफट दूर करें कन्फ्यूजन
निवेश की दुनिया में Yield (यील्ड) और Return (रिटर्न) दो ऐसे शब्द हैं जिनका अक्सर इस्तेमाल होता है, लेकिन कई निवेशक इन दोनों को एक ही मान लेते हैं। हालांकि, दोनों का अर्थ और महत्व अलग-अलग है। सही निवेश निर्णय लेने के लिए इन दोनों के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है।

Yield vs Return: निवेश की दुनिया में Yield (यील्ड) और Return (रिटर्न) दो ऐसे शब्द हैं जिनका अक्सर इस्तेमाल होता है, लेकिन कई निवेशक इन दोनों को एक ही मान लेते हैं। हालांकि, दोनों का अर्थ और महत्व अलग-अलग है। सही निवेश निर्णय लेने के लिए इन दोनों के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है।
Yield क्या है?
Yield उस इनकम को दिखाता है जो किसी निवेश से नियमित रूप से प्राप्त होती है। इसे आमतौर पर प्रतिशत के रूप में लिखा जाता है। मान लीजिए कि यदि किसी कंपनी के शेयर की कीमत 100 रुपये है और वह सालाना 5 रुपये का डिविडेंड देती है, तो उसकी डिविडेंड यील्ड 5% होगी। इसी तरह बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज भी यील्ड के रूप में देखा जाता है।
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यील्ड मुख्य रूप से निवेश से मिलने वाली नियमित आय पर फोकस करती है और इसमें निवेश की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव को शामिल नहीं किया जाता।
Return क्या है?
रिटर्न निवेश से होने वाले कुल लाभ या हानि को दिखाता है। इसमें न केवल डिविडेंड या ब्याज से हुई आय शामिल होती है, बल्कि निवेश की कीमत में हुई बढ़ोतरी या गिरावट भी शामिल होती है।
मान लीजिए आपने 100 रुपये में कोई शेयर खरीदा और एक साल बाद उसकी कीमत 120 रुपये हो गई। इस दौरान आपको 5 रुपये का डिविडेंड भी मिला। ऐसे में आपका कुल रिटर्न 25 रुपये या 25% होगा। यानी रिटर्न निवेश के पूरे प्रदर्शन को दिखाता है।
मुख्य अंतर क्या है?
यील्ड केवल आय (Income) को मापती है, जबकि रिटर्न इनकम के साथ-साथ कैपिटल गेन या कैपिटल लॉस को भी शामिल करता है। इसलिए किसी निवेश का यील्ड अधिक हो सकता है, लेकिन यदि उसकी कीमत लगातार गिर रही है तो कुल रिटर्न कमजोर रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
एक्सपर्ट के अनुसार, रिटायरमेंट या नियमित आय चाहने वाले निवेशक यील्ड पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि लंबी अवधि में संपत्ति बनाने वाले निवेशकों के लिए कुल रिटर्न अधिक महत्वपूर्ण होता है। निवेश का आकलन करते समय केवल यील्ड या केवल रिटर्न को देखने के बजाय दोनों को साथ में समझना बेहतर रणनीति मानी जाती है।
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