EPF में ₹25,000 की मैंडेटरी कवरेज सैलरी लिमिट का क्या है मतलब? उदाहरण के साथ आसान भाषा में समझें

EPF को लेकर सरकार ने सैलरी लिमिट में बड़ा बदलाव किया है। मैंडेटरी कवरेज की सीमा अब ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है। इसका सीधा असर लाखों कर्मचारियों और नई नौकरी शुरू करने वालों पर पड़ सकता है। लेकिन ₹25,000 से ज्यादा बेसिक सैलरी वालों के लिए नियम कैसे बदलेंगे? जानिए पूरी जानकारी।

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In Short

  • EPF की मैंडेटरी सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई
  • ₹25,000 तक बेसिक + DA पर EPF कवरेज जरूरी
  • ₹25,000 से ज्यादा सैलरी पर नई जॉइनिंग के लिए नियम बदले

By Gaurav Kumar:

EPF यानी Employees’ Provident Fund को लेकर सैलरी लिमिट में बड़ा बदलाव हुआ है। अब मैंडेटरी EPF कवरेज की सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि नई लिमिट किस पर लागू होगी, कितनी सैलरी पर EPF में शामिल होना जरूरी होगा और ₹25,000 से ज्यादा सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए क्या नियम रहेगा।

₹25,000 तक की बेसिक सैलरी पर EPF जरूरी

अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता यानी DA मिलाकर ₹25,000 या उससे कम है, तो कंपनी के लिए उस कर्मचारी को EPF में शामिल करना अनिवार्य होगा। पहले यह लिमिट ₹15,000 थी। यानी ₹15,000 से ज्यादा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी के लिए EPF कवरेज अनिवार्य नहीं था।

₹25,000 से ज्यादा सैलरी पर क्या होगा?

अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी + DA ₹25,000 से ज्यादा है, तो नई जॉइनिंग पर EPF में शामिल होना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, यह नियम उस स्थिति में लागू होगा जब कर्मचारी पहले से EPF का सदस्य न हो।

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है कि ₹25,000 की लिमिट पूरे CTC या ग्रॉस सैलरी पर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से बेसिक सैलरी + DA पर लागू होती है।

₹12,000 बेसिक + DA वाले कर्मचारी का उदाहरण

मान लीजिए किसी कर्मचारी 'राम' की बेसिक सैलरी + DA मिलाकर ₹12,000 है। ऐसे मामले में कंपनी के लिए राहुल को EPF में शामिल करना अनिवार्य होगा।

कर्मचारी का योगदान 12% के हिसाब से ₹1,440 होगा। कंपनी भी लगभग इतना ही यानी कुल 12% योगदान करती है।

ठीक ₹25,000 सैलरी होने पर कितना EPF कटेगा?

अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी + DA ठीक ₹25,000 है, तो भी EPF में शामिल होना जरूरी होगा। इस स्थिति में कर्मचारी का योगदान 12% के हिसाब से ₹3,000 होगा। कंपनी भी इसी आधार पर योगदान करेगी।

₹40,000 बेसिक + DA वाले नए कर्मचारी का मामला

अब मान लीजिए कोई कर्मचारी 'रोहित' पहली बार नौकरी जॉइन कर रहा है और उसकी बेसिक सैलरी + DA ₹40,000 है। अगर रोहित पहले कभी EPF का सदस्य नहीं रहा है, तो उसे EPF में शामिल करना अनिवार्य नहीं होगा।

हालांकि, अगर कंपनी और अमित दोनों सहमत हों तो उसे EPF में शामिल किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में अनिवार्य योगदान सिर्फ ₹25,000 पर होगा, यानी कर्मचारी से ₹3,000 ही कटेगा।

अगर कंपनी और कर्मचारी दोनों चाहें तो पूरी ₹40,000 की बेसिक सैलरी + DA पर 12% के हिसाब से ₹4,800 का योगदान भी कराया जा सकता है। यह स्वैच्छिक होगा।

पहले से EPF सदस्य हैं तो क्या होगा?

मान लीजिए किसी कर्मचारी की सैलरी पहले ₹12,000 थी और प्रमोशन के बाद उसकी बेसिक सैलरी + DA बढ़कर ₹50,000 हो गई। अगर वह कर्मचारी पहले से EPF का सदस्य है, तो उसका EPF जारी रहेगा।

हालांकि, मैंडेटरी योगदान अब भी सिर्फ ₹25,000 तक ही रहेगा। यानी इस आधार पर कर्मचारी का योगदान ₹3,000 होगा। ₹25,000 से ऊपर की सैलरी पर अतिरिक्त योगदान कंपनी की पॉलिसी और कर्मचारी की सहमति पर निर्भर करेगा।

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