बिना जमीन या दुकान खरीदे रियल एस्टेट में लगा सकते हैं पैसा! जानिए REIT कैसे देता है निवेश का मौका
रियल एस्टेट में निवेश के लिए अब बड़ा ऑफिस या दुकान खरीदना जरूरी नहीं है। REIT के जरिए निवेशक कमर्शियल प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी ले सकते हैं। बिजनेस टुडे के शो में एक्सपर्ट संचिता मुखर्जी ने बताया कि REIT कैसे काम करता है और इसमें पैसा लगाने से पहले किन बातों को समझना जरूरी है।

In Short
- REIT के जरिए बिना प्रॉपर्टी खरीदे कमर्शियल रियल एस्टेट में कर सकते हैं निवेश।
- बड़े ऑफिस स्पेस और शॉपिंग मॉल जैसी प्रॉपर्टी में मिलती है हिस्सेदारी।
- REIT में पैसा लगाने से पहले उसकी अंडरलाइंग प्रॉपर्टी समझना जरूरी।
रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए जरूरी नहीं कि आप खुद कोई बड़ा ऑफिस, दुकान या शॉपिंग मॉल खरीदें। अब REIT के जरिए भी कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश किया जा सकता है। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Talk The Walk LLP की मैनेजिंग पार्टनर संचिता मुखर्जी ने कहा कि REIT निवेशकों को बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी लेने का मौका देता है। इसके लिए निवेशक को खुद कोई प्रॉपर्टी खरीदने की जरूरत नहीं होती।
REIT आखिर होता क्या है?
संचिता मुखर्जी ने बताया कि REIT यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट मुख्य रूप से ग्रेड A कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं। इनमें बड़े ऑफिस स्पेस, रिटेल शॉपिंग मॉल और दूसरी कमर्शियल प्रॉपर्टी शामिल हो सकती हैं।
इन प्रॉपर्टीज को प्रोफेशनल तरीके से मैनेज किया जाता है। इसलिए किसी भी REIT में पैसा लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह किन प्रॉपर्टीज में निवेश कर रहा है और उसके पास किस तरह की कमर्शियल रियल एस्टेट संपत्तियां हैं।
पहले लोग कैसे करते थे रियल एस्टेट में निवेश?
संचिता मुखर्जी ने बताया कि भारतीय परिवारों में लंबे समय से फिजिकल रियल एस्टेट खरीदने का चलन रहा है। लोग अपनी बचत से घर, जमीन का प्लॉट, दुकान या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदते रहे हैं।
कुछ लोग शॉपिंग मॉल में भी प्रॉपर्टी खरीदते हैं। लेकिन इस तरह के निवेश के लिए काफी बड़ी रकम की जरूरत पड़ सकती है।
इसके अलावा प्रॉपर्टी खरीदने और उसके रखरखाव में भी काफी खर्च आता है। रियल एस्टेट एक ऐसा निवेश है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत बेचना आसान नहीं होता।
REIT में बिना प्रॉपर्टी खरीदे कैसे मिलता है हिस्सा?
संचिता मुखर्जी के मुताबिक, REIT रियल एस्टेट को फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट के रूप में निवेशकों तक पहुंचाने का एक तरीका है।
जब कोई व्यक्ति REIT में निवेश करता है, तो उसे उसकी यूनिट मिलती है। यानी वह उस REIT का यूनिट होल्डर बन जाता है।
इस तरह निवेशक को खुद कोई बड़ा ऑफिस या कमर्शियल फ्लोर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। वह यूनिट के जरिए कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में भागीदारी कर सकता है।
REIT में निवेश से पहले क्या देखना जरूरी?
संचिता मुखर्जी ने कहा कि कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से संस्थागत निवेश और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की तरफ बढ़ रहा है।
ऐसे में REIT निवेशकों को इस सेक्टर की बढ़ती मांग में हिस्सा लेने का मौका देता है।
हालांकि, निवेश से पहले यह देखना जरूरी है कि REIT के पास कौन-कौन सी प्रॉपर्टी हैं। उसके पोर्टफोलियो में बड़े ऑफिस स्पेस हैं या शॉपिंग मॉल, यह समझना जरूरी है।
यानी REIT में पैसा लगाने से पहले उसकी अंडरलाइंग प्रॉपर्टी और पोर्टफोलियो की पूरी जानकारी लेना जरूरी है, ताकि निवेशक समझ सके कि उसका पैसा किस तरह की कमर्शियल रियल एस्टेट में लग रहा है।