टर्म इंश्योरेंस या इन्वेस्टमेंट प्लान, परिवार के लिए कौन सा है बेहतर?

लाईफ इंश्योरेंस में प्रीमियम भरने के बाद रिटर्न भी चाहिए या सिर्फ बड़ा कवर लेना बेहतर है? यह सवाल कई लोगों के मन में रहता है। इंश्योरेंस एक्सपर्ट दीपक योहानन ने बताया कि परिवार की फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए पहले कितना टर्म इंश्योरेंस कवर होना चाहिए और उसके बाद क्या करना चाहिए।

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In Short

  • टर्म इंश्योरेंस कवर एनुअल इनकम का करीब 20 गुना होना चाहिए।
  • ₹1 लाख प्रीमियम पर इन्वेस्टमेंट प्लान में करीब ₹10 लाख का कवर मिल सकता है।
  • एक्सपर्ट के मुताबिक, पहले परिवार के लिए मजबूत इंश्योरेंस कवर लेना जरूरी है।

By Sonam:

लाईफ इंश्योरेंस खरीदते समय अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि अगर वे सालों तक प्रीमियम भर रहे हैं तो बदले में कुछ रिटर्न भी मिलना चाहिए। इसी वजह से कई लोग ऐसी लाईफ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनते हैं, जिसमें इंश्योरेंस कवर के साथ एक तय उम्र के बाद रिटर्न भी मिलता है। लेकिन क्या इंश्योरेंस लेते समय रिटर्न को प्राथमिकता देना सही है या पहले परिवार के लिए बड़ा कवर लेना चाहिए?

बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए इंश्योरेंस एक्सपर्ट दीपक योहानन ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति रिटर्न चाहता है और 4 से 5% रिटर्न के साथ कम इंश्योरेंस कवर से संतुष्ट है तो वह ऐसा प्लान चुन सकता है। इसमें कोई परेशानी नहीं है। हालांकि, कौन सा विकल्प सही होगा, यह व्यक्ति और उसके रिस्क प्रोफाइल पर भी निर्भर करता है।

एनुअल इनकम का 20 गुना कवर क्यों जरूरी?

दीपक योहानन के मुताबिक, सबसे पहले व्यक्ति के पास अपनी एनुअल इनकम का करीब 20 गुना मजबूत टर्म इंश्योरेंस कवर होना चाहिए। इसका मकसद परिवार को फाइनेंशियल प्रोटेक्शन देना है।

अगर बीमाधारक के साथ कुछ हो जाता है तो इतना कवर परिवार को आर्थिक तौर पर मुश्किल स्थिति में जाने से बचाने में मदद कर सकता है। इसलिए उनका कहना है कि सबसे पहले परिवार को प्रोटेक्ट करने वाला पर्याप्त इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए।

इंश्योरेंस के बाद देखें इन्वेस्टमेंट के विकल्प

एक बार पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस कवर लेने के बाद व्यक्ति इन्वेस्टमेंट के दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकता है। इसमें लाईफ इंश्योरेंस प्लान, म्यूचुअल फंड्स और स्टॉक्स जैसे कई विकल्प हो सकते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

कौन सा इन्वेस्टमेंट ऑप्शन चुनना है, यह व्यक्ति के रिस्क प्रोफाइल और उसकी पसंद पर निर्भर करता है। कुछ लोग केवल एलआईसी में इन्वेस्टमेंट करना पसंद करते हैं। दीपक योहानन के मुताबिक, इन्वेस्टमेंट ऐसा होना चाहिए जिसमें व्यक्ति को मन की शांति भी मिले।

टर्म इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट प्लान में क्या फर्क?

एक्सपर्ट ने टर्म इंश्योरेंस और इंश्योरेंस इन्वेस्टमेंट प्लान के बीच कवर का फर्क भी समझाया। उनके मुताबिक, इंश्योरेंस कंपनियों के इन्वेस्टमेंट प्लान्स में आमतौर पर प्रीमियम के मुकाबले करीब 10 गुना कवर मिल सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति ₹1 लाख प्रीमियम देता है तो उसे करीब ₹10 लाख का कवर मिल सकता है। वहीं टर्म इंश्योरेंस में इसी रकम पर कवर काफी ज्यादा हो सकता है।

₹10 लाख और ₹5 करोड़ के कवर का फर्क

दीपक योहानन ने उदाहरण देते हुए बताया कि टर्म इंश्योरेंस में व्यक्ति को ₹5 करोड़ तक का कवर मिल सकता है। अगर उसके साथ कुछ हो जाता है तो परिवार को ₹5 करोड़ मिलेंगे।

इसके उलट इन्वेस्टमेंट वाले इंश्योरेंस प्लान में ₹1 लाख प्रीमियम पर कवर करीब ₹10 लाख हो सकता है और बीमाधारक के साथ कुछ होने पर परिवार को यही रकम मिलेगी। इसलिए दोनों प्लान्स की सीधी तुलना करना आसान नहीं है।

एक्सपर्ट के मुताबिक, पहले पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस से परिवार को प्रोटेक्ट करना चाहिए और उसके बाद अपने रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से इन्वेस्टमेंट के विकल्प देखने चाहिए।

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