TDS और TCS में क्या है अंतर? ITR भरने से पहले समझ लें टैक्स के ये नियम

TDS और TCS को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम रहता है। दोनों ही टैक्स जमा करने के तरीके हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल और प्रक्रिया अलग होती है। ITR भरते समय सही टैक्स क्रेडिट लेने के लिए इनके बीच का अंतर समझना जरूरी है।

Advertisement
AI generated image

In Short

  • TDS में भुगतान से पहले टैक्स काटा जाता है।
  • TCS में विक्रेता खरीदार से टैक्स वसूलता है।
  • Form 26AS और AIS में मिलती है टैक्स क्रेडिट की जानकारी।

By Gaurav Kumar:

TDS vs TCS Difference: टैक्स से जुड़े मामलों में TDS और TCS का नाम अक्सर सुनने को मिलता है। दोनों का मकसद सरकार को टैक्स पहले ही जमा कराना है। हालांकि, दोनों की प्रक्रिया और काम करने का तरीका अलग होता है।

TDS और TCS दोनों टैक्स क्रेडिट के रूप में काम करते हैं और ITR भरते समय आपकी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं। इसलिए इनके बीच का अंतर समझना जरूरी है।

क्या होता है TDS?

TDS में भुगतान करने वाला व्यक्ति या संस्था पैसे देने से पहले ही टैक्स काट लेती है और उसे सरकार के पास जमा करती है। इसके बाद जिस व्यक्ति का टैक्स कटा है, उसे उसका क्रेडिट मिलता है।

TDS सैलरी, प्रोफेशनल फीस, किराया, फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज, प्रॉपर्टी खरीद और कुछ डिजिटल एसेट से जुड़े लेनदेन पर लागू होता है।

ये खबर पढ़ना न भूलें: ITR Filing Deadline: आखिरी तारीख से पहले कर लें रिटर्न फाइल, वरना लगेगा ₹5,000 तक जुर्माना

नौकरी करने वालों की सैलरी से कंपनी हर महीने अनुमानित आय के आधार पर TDS काटती है। वहीं, बैंक भी तय सीमा से ज्यादा फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज पर TDS काटते हैं।

Deloitte India के पार्टनर आलोक अग्रवाल के मुताबिक, TDS कटने का मतलब यह नहीं है कि पूरा टैक्स भर दिया गया है। उदाहरण के लिए, बैंक FD ब्याज पर 10 प्रतिशत TDS काट सकता है, लेकिन व्यक्ति की कुल आय के हिसाब से उसकी टैक्स देनदारी इससे ज्यादा हो सकती है।

TCS कैसे काम करता है?

TCS में टैक्स बेचने वाला व्यक्ति या संस्था खरीदार से वसूलती है। विक्रेता बिल में टैक्स जोड़कर उसे ग्राहक से लेता है और सरकार के पास जमा करता है। TCS विदेश यात्रा पैकेज, LRS के तहत विदेशी पैसे भेजने, कुछ तय सामानों की बिक्री और तय सीमा से ऊपर मोटर वाहन खरीद जैसे लेनदेन पर लागू होता है।

आलोक अग्रवाल के अनुसार, TCS को अतिरिक्त टैक्स का बोझ नहीं समझना चाहिए। यह रकम आपकी अंतिम टैक्स देनदारी में क्रेडिट के तौर पर जुड़ जाती है।

TDS और TCS का फायदा कैसे मिलेगा?

TDS और TCS दोनों की जानकारी Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) में दिखाई देती है। ITR भरने से पहले इन रिकॉर्ड को जांचना जरूरी है, ताकि सही टैक्स क्रेडिट लिया जा सके।

अगर जमा किया गया TDS और TCS आपकी टैक्स देनदारी से ज्यादा है, तो अतिरिक्त रकम रिफंड के रूप में वापस मिल सकती है। वहीं, अगर टैक्स ज्यादा बनता है तो बाकी रकम जमा करनी होगी।

TDS और TCS को समझने से टैक्स की सही गणना करने और पहले से जमा टैक्स का पूरा लाभ लेने में मदद मिलती है।
 

Read more!
Advertisement