पहले STT फिर LTCG और STCG टैक्स, शेयर बाजार में निवेशकों की कमाई पर कितना पड़ रहा असर?
शेयर बाजार में निवेश करने वालों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन क्या निवेशकों की कमाई पर टैक्स का बोझ भी बढ़ गया है? बिजनेस टुडे से बातचीत में वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में STT, LTCG और STCG टैक्स में क्या बदलाव हुए और शेयर खरीदने-बेचने पर कितना खर्च आता है।

In Short
- वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में इक्विटी निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ा है।
- 2018 में LTCG टैक्स दोबारा लागू हुआ, जबकि 2024 में LTCG बढ़कर 12.5% और STCG 20% हो गया।
- अंकित जैन के अनुसार, टैक्स और दूसरे शुल्क मिलाकर मुनाफे वाले ट्रेड में निवेशक की कमाई का करीब 15% से 28% हिस्सा खर्च हो सकता है।
शेयर बाजार में निवेश करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ निवेशकों पर टैक्स का बोझ भी बढ़ा है। शेयर खरीदने से लेकर बेचने और मुनाफा कमाने तक निवेशकों को कई तरह के टैक्स और शुल्क चुकाने पड़ते हैं। पिछले कुछ वर्षों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG), शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में हुए बदलावों ने निवेश की लागत बढ़ा दी है।
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में इक्विटी निवेशकों पर टैक्स का बोझ धीरे-धीरे बढ़ता गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने अलग-अलग समय पर कैपिटल गेन टैक्स और दूसरे शुल्कों में बदलाव किए हैं, जिससे शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग पहले के मुकाबले महंगी हो गई है।
2004 से अब तक कैसे बदले शेयर बाजार के टैक्स?
अंकित जैन ने बताया कि 2004 में सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) लागू किया था। उस समय लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स हटाया गया था, जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स घटाकर 10% कर दिया गया था।
यह व्यवस्था एक दशक से ज्यादा समय तक जारी रही। लेकिन 2018 में सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स दोबारा 10% की दर से लागू कर दिया। वहीं, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स बढ़ाकर 15% कर दिया गया।
इसके बाद 2024 में एक बार फिर बदलाव हुए। LTCG टैक्स 10% से बढ़ाकर 12.5% और STCG टैक्स 15% से बढ़ाकर 20% कर दिया गया। अंकित जैन के मुताबिक, इस साल STT में भी बढ़ोतरी हुई है।
उनका कहना है कि इन बदलावों के कारण शेयर बाजार में निवेशकों को पहले की तुलना में ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ रहा है।
शेयर खरीदने और बेचने पर कितना पैसा कटता है?
अंकित जैन ने बताया कि शेयर खरीदते समय निवेशक की कुल रकम का करीब 0.1% से 0.5% हिस्सा अलग-अलग ट्रांजैक्शन चार्ज में खर्च हो सकता है। इनमें STT, ब्रोकरेज, GST और डिपॉजिटरी शुल्क शामिल हैं।
इसके बाद जब निवेशक शेयर बेचता है, तो उसे दोबारा STT और ब्रोकरेज जैसे शुल्क देने पड़ते हैं।
अगर शेयर कम समय में बेचकर मुनाफा कमाया जाता है, तो उस पर 20% STCG टैक्स लग सकता है। ज्यादा सरचार्ज वाले मामलों में प्रभावी टैक्स करीब 23% तक पहुंच सकता है। वहीं, लंबी अवधि के निवेश से होने वाले मुनाफे पर 12.5% LTCG टैक्स लागू होता है।
अंकित जैन के मुताबिक, टैक्स और दूसरे शुल्कों को मिलाकर किसी मुनाफे वाले ट्रेड में निवेशक की कमाई का करीब 15% से 28% हिस्सा खर्च हो सकता है। हालांकि, वास्तविक लागत निवेश की अवधि, मुनाफे और लागू शुल्कों पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद बड़ी संख्या में रिटेल निवेशक शेयर बाजार से जुड़े हैं। लोग अब सोना, रियल एस्टेट और फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ इक्विटी को भी अपनी बचत और निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं। ऐसे में बढ़ते टैक्स और ट्रांजैक्शन चार्ज का सीधा असर उनकी वास्तविक कमाई पर पड़ रहा है।