60 साल के बाद Health Insurance कवर बढ़ाना है? पुरानी पॉलिसी बंद करने से पहले जान लें एक्सपर्ट की सलाह
60 या 70 साल की उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस का कवर बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन पुरानी पॉलिसी बदलने को लेकर उलझन में हैं? बिजनेस टुडे से बातचीत में इंश्योरेंस समाधान के को-फाउंडर और सीईओ दीपक भुवनेश्वरी उनियाल ने सीनियर सिटीजंस को अहम सलाह दी है। उन्होंने अपनी 71 वर्षीय मां का बीमा कवर 5 लाख से 20 लाख रुपये करने का उदाहरण भी साझा किया। जानिए क्या सावधानियां जरूरी हैं।

In Short
- सीनियर सिटीजंस को पुरानी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जल्दबाजी में बंद नहीं करनी चाहिए।
- एक्सपर्ट ने मौजूदा पॉलिसी के साथ अतिरिक्त हेल्थ कवर लेने की सलाह दी।
- पॉलिसी पोर्ट कराने से पहले को-पेमेंट और वेटिंग पीरियड की शर्तें जरूर जांचें।
बढ़ती उम्र के साथ इलाज का खर्च भी चिंता बढ़ाने लगता है। खासकर 60 या 70 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस का पर्याप्त कवर होना बेहद जरूरी है। कई सीनियर सिटीजंस ने सालों पहले सिर्फ 3 से 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस लिया था, लेकिन अब इलाज के बढ़ते खर्च को देखते हुए वे अपना कवर बढ़ाना चाहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पुरानी पॉलिसी बदलना बेहतर है या उसी के साथ अतिरिक्त कवर लेना चाहिए?
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए इंश्योरेंस समाधान (Insurance Samadhan) के को-फाउंडर और सीईओ दीपक भुवनेश्वरी उनियाल ने कहा कि सीनियर सिटीजंस को जल्दबाजी में अपनी पुरानी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी बंद नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, बेहतर तरीका यह हो सकता है कि मौजूदा पॉलिसी जारी रखते हुए अतिरिक्त हेल्थ कवर लिया जाए।
पुरानी पॉलिसी बंद करने से क्यों बचें?
दीपक उनियाल के मुताबिक, सीनियर सिटीजंस को सबसे पहले अपनी मौजूदा पॉलिसी बनाए रखने पर विचार करना चाहिए। इसके साथ एक नई पॉलिसी लेकर कुल बीमा कवर बढ़ाया जा सकता है। नई पॉलिसी लेते समय पहले से मौजूद बीमा की जानकारी देना भी जरूरी है।
उन्होंने सलाह दी कि नई पॉलिसी लेने के एक या दो साल बाद जरूरत के हिसाब से बदलाव करने पर विचार किया जा सकता है। इस दौरान दोनों पॉलिसियों का प्रीमियम देना पड़ सकता है, लेकिन प्राथमिकता पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर हासिल करने की होनी चाहिए।
5 लाख से बढ़ाकर 20 लाख किया कवर
एक्सपर्ट ने अपनी मां का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी उम्र फिलहाल 71 साल है। पहले उनके पास 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस कवर था। पुरानी पॉलिसी होने के कारण उसका प्रीमियम लगातार बढ़ रहा था।
उन्होंने बताया कि पिछले साल उन्होंने अपनी मां की पॉलिसी उसी बीमा कंपनी के भीतर बदलकर 20 लाख रुपये का कवर लिया। इसके लिए कुछ अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ा। उनके मुताबिक, दूसरी कंपनी में जाने से पहले मौजूदा कंपनी के दूसरे प्लान की जानकारी लेना फायदेमंद हो सकता है।
सिर्फ कम प्रीमियम देखकर न लें फैसला
दीपक उनियाल ने कहा कि कई बार इंश्योरेंस बेचने वाले लोग ग्राहकों को दूसरी कंपनी में पॉलिसी ट्रांसफर करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन सीनियर सिटीजंस को केवल कम प्रीमियम देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए।
उनके मुताबिक, यह समझना जरूरी है कि मौजूदा पॉलिसी में कौन-कौन से फायदे मिल रहे हैं और नई पॉलिसी में किन शर्तों के साथ कवर दिया जा रहा है। पर्याप्त सम इंश्योर्ड यानी बीमा राशि को प्राथमिकता देना जरूरी है।
पॉलिसी पोर्ट करने से पहले क्या जांचें?
एक्सपर्ट ने सलाह दी कि पॉलिसी पोर्ट कराने से पहले को-पेमेंट (Co-pay) और वेटिंग पीरियड (Waiting Period) जैसी शर्तें जरूर जांचें। को-पेमेंट का मतलब इलाज के बिल का वह हिस्सा है, जिसे पॉलिसीधारक को खुद चुकाना पड़ता है।
वहीं, वेटिंग पीरियड के दौरान कुछ बीमारियों या इलाज पर कवरेज सीमित हो सकता है। इसलिए सीनियर सिटीजंस को पॉलिसी बदलने की प्रक्रिया और नई शर्तों को अच्छी तरह समझना चाहिए। दीपक उनियाल की सलाह है कि संभव हो तो पुरानी पॉलिसी जारी रखकर अतिरिक्त कवर लेने के विकल्प पर पहले विचार करें।