SEBI का नया प्लान: निवेश क्लेम का तरीका बदलेगा, वारिसों को मिलेगी बड़ी राहत

निवेशक की मौत के बाद शेयर और निवेश का क्लेम पाने के लिए परिवारों को लंबा इंतजार और भारी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है। सेबी ने अब इस प्रोसेस को आसान और तेज बनाने का प्रस्ताव रखा है। जानिए किन क्लेम पर मिलेगी राहत और वारिसों को कौन से डॉक्यूमेंट देने होंगे।

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In Short

  • सभी जरूरी डॉक्यूमेंट मिलने के बाद 21 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा करना होगा।
  • फिजिकल शेयरों में 10,000 रुपये और डीमैट शेयरों में 30,000 रुपये तक के छोटे क्लेम STP सिस्टम से जल्दी प्रोसेस होंगे।
  • आसान डॉक्यूमेंट प्रोसेस की लिमिट फिजिकल होल्डिंग के लिए 10 लाख रुपये और डीमैट होल्डिंग के लिए 30 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।

By Gaurav Kumar:

SEBI Claim Rules: किसी निवेशक की मौत के बाद उसके शेयर और दूसरे निवेश परिवार के नाम कराने में काफी समय लग सकता है। परिवार को कई कागज जुटाने पड़ते हैं और बार-बार चक्कर भी लगाने पड़ सकते हैं। अब सेबी ने इस काम को आसान बनाने के लिए नए बदलाव सुझाए हैं।

इन बदलावों में क्लेम की लिमिट बढ़ाना कम कागज मांगना और तय समय में काम पूरा करना शामिल है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सभी जरूरी कागज देने के बाद परिवार को क्लेम मिलने में कितने दिन लगेंगे?

21 दिनों में पूरा करना होगा क्लेम

सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक सभी जरूरी कागज मिलने के बाद कंपनियों और जुड़ी संस्थाओं को 21 दिनों के अंदर क्लेम का काम पूरा करना होगा। अगर क्लेम में देरी होती है या आवेदन रिजेक्ट किया जाता है तो उसकी साफ वजह बतानी होगी। इससे नॉमिनी और परिवार के दूसरे हकदारों को बार-बार ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लेकिन छोटे क्लेम को और जल्दी पूरा करने के लिए कौन सा नया सिस्टम लाने की तैयारी है?

छोटे क्लेम के लिए आएगा STP सिस्टम

छोटे क्लेम जल्दी पूरा करने के लिए स्ट्रेट-थ्रू प्रोसेसिंग यानी STP सिस्टम शुरू करने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत फिजिकल शेयरों में 10,000 रुपये और डीमैट शेयरों में 30,000 रुपये तक के क्लेम कम कागजों के साथ प्रोसेस किए जाएंगे। इससे उन मामलों में राहत मिलेगी जहां कागज बनवाने का खर्च निवेश की रकम से ज्यादा हो जाता है। अब सवाल है कि आसान कागजी काम के लिए क्लेम की लिमिट कितनी बढ़ाई जाएगी?

आसान डॉक्यूमेंट प्रोसेस की लिमिट बढ़ेगी

सेबी ने फिजिकल शेयरों के लिए आसान डॉक्यूमेंट प्रोसेस की लिमिट बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। डीमैट शेयरों के लिए यह लिमिट 30 लाख रुपये रखी जाएगी। कंपनियां चाहें तो फिजिकल शेयरों के लिए 10 लाख रुपये की लिमिट को और बढ़ा सकती हैं। अब सवाल है कि क्लेम करते समय कौन-कौन से डेथ सर्टिफिकेट मान्य होंगे?

मृत्यु प्रमाण पत्र के कई ऑप्शन होंगे

क्लेम के लिए ओरिजिनल डेथ सर्टिफिकेट के अलावा नॉमिनी की वेरिफाइड कॉपी भी मान्य होगी। नोटरी या गजटेड ऑफिसर से अटेस्टेड कॉपी और QR कोड वाला डेथ सर्टिफिकेट भी स्वीकार किया जाएगा। लीगल वारिस का सर्टिफिकेट तहसीलदार या उससे ऊंचे पद के अधिकारी की ओर से जारी होना चाहिए। लेकिन निवेश में नॉमिनी पहले से दर्ज हो तो उसे कौन से डॉक्यूमेंट देने होंगे?

नॉमिनी होने पर कम देने होंगे डॉक्यूमेंट

निवेश में पहले से नॉमिनी दर्ज होने पर क्लेम का काम और आसान हो जाएगा। नॉमिनी को केवल क्लेम फॉर्म डीमैट अकाउंट की क्लाइंट मास्टर लिस्ट यानी CML डेथ सर्टिफिकेट और ID प्रूफ देना होगा। इन कागजों के आधार पर निवेश नॉमिनी के नाम किया जा सकेगा। लेकिन नॉमिनी या वसीयत नहीं होने पर परिवार क्लेम कैसे करेगा?

नॉमिनी या वसीयत नहीं होने पर क्या होगा

अगर निवेश में नॉमिनी दर्ज नहीं है और वसीयत भी नहीं बनाई गई है तो छोटे STP क्लेम के लिए बेसिक फॉर्म और ID प्रूफ देना होगा। इससे बड़े लेकिन तय लिमिट के अंदर आने वाले क्लेम के लिए इंडेम्निटी बॉन्ड और परिवार के दूसरे हकदारों की NOC मांगी जा सकती है। लेकिन अगर निवेशक विदेश में रहता था तो उसके परिवार को कौन से कागज देने होंगे?

विदेश में रहने वालों को भी राहत

विदेश में रहने वाले किसी निवेशक की मौत होने पर वहां के बैंक अधिकारी या भारतीय दूतावास से वेरिफाई किए गए कागज भी स्वीकार किए जाएंगे। सेबी ने इन बदलावों पर आम लोगों और इससे जुड़े पक्षों से 2 अप्रैल तक अपनी राय देने को कहा है।

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