रुपये की चाल और विदेशी निवेश पर SBI Research की बड़ी रिपोर्ट, सरकार को दी ये अहम सलाह
भारतीय रुपये और विदेशी निवेश से जुड़ी चुनौतियों के बीच SBI Research ने सरकार को अहम सुझाव दिए हैं। अपनी Ecowrap रिपोर्ट में सरकारी बॉन्ड पर टैक्स और विदेश से कर्ज लेने के नियमों में स्पष्टता लाने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट में पूंजी खाते के घाटे, विदेश में बढ़ते निवेश और सरकारी बॉन्ड की यील्ड को लेकर भी चिंता जताई गई है।

In Short
- SBI Research ने सरकारी बॉन्ड पर टैक्स और विदेशी कर्ज के नियमों में स्पष्टता की मांग की।
- रिपोर्ट में रुपये पर वैश्विक जोखिम और दिसंबर 2024 से पूंजी खाते में घाटे को लेकर चिंता जताई गई।
- भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.6% तक पहुंचने का अनुमान जताया गया।
भारतीय रुपये और विदेशी निवेश को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच SBI Research ने सरकार से सरकारी बॉन्ड पर टैक्स और विदेश से कर्ज लेने के नियमों को ज्यादा स्पष्ट बनाने की सलाह दी है। 15 अक्टूबर को जारी अपनी Ecowrap रिपोर्ट में SBI Research ने कहा कि इससे देश में कर्ज जुटाना आसान हो सकता है और विदेशी निवेश बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सरकारी बॉन्ड और विदेशी कर्ज पर क्या कहा?
SBI Research के मुताबिक, सरकारी बॉन्ड (G-Secs) पर टैक्स और विदेशी वाणिज्यिक कर्ज (ECB) से जुड़े नियमों में स्पष्टता जरूरी है।
इससे कंपनियों और निवेशकों को पैसा जुटाने के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में टैक्स की दरों या विदेशी कर्ज के नियमों में किसी खास बदलाव का सुझाव नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट में AI सेक्टर के लिए भी स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई है। इसमें डेटा सुरक्षा, जवाबदेही और जरूरी तकनीकी सुविधाओं के लिए समयबद्ध योजना बनाने पर जोर दिया गया है।
रुपये और विदेशी निवेश को लेकर चिंता
SBI Research ने कहा कि आने वाले समय में रुपये में मजबूती की संभावना है, लेकिन वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और देश से बाहर जा रहे पैसे को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 से भारत के पूंजी खाते में लगातार घाटा बना हुआ है।
विदेश में भारतीय कंपनियों के निवेश से जुड़ा पैसा बाहर जाने का आंकड़ा वित्त वर्ष 2024-25 में 27.2 अरब डॉलर और 2025-26 में 27.8 अरब डॉलर रहा। इससे पहले के दो वित्त वर्षों में यह क्रमशः 13.4 अरब डॉलर और 13.7 अरब डॉलर था।
रिपोर्ट में गैर-जरूरी विदेशी खर्च और पैसे भेजने के मामलों पर भी नजर रखने की सलाह दी गई है।
सरकारी बॉन्ड की ब्याज दरें बढ़ने की आशंका
रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अक्टूबर को अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5.32% के पार पहुंच गई थी, जो बाद में करीब 5.19% पर आ गई।
वहीं, भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 7.38% रही। SBI Research का अनुमान है कि यह बढ़कर 7.6% तक पहुंच सकती है।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब आमतौर पर सरकार के लिए नया कर्ज जुटाना महंगा होना है।
SBI Research का मानना है कि टैक्स, विदेशी कर्ज और AI से जुड़ी नीतियों में स्पष्टता से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि, ये सिर्फ रिपोर्ट में दिए गए सुझाव हैं। सरकार ने इन बदलावों की कोई घोषणा नहीं की है।