बिना जोखिम के निवेश और FD से ज्यादा ब्याज भी...नौकरीपेशा लोगों के लिए शानदार है ये सेविंग स्कीम
अगर आप नौकरी करते हैं और रिटायरमेंट के लिए मोटा फंड बनाना चाहते हैं, तो एक खास सेविंग विकल्प आपके काम आ सकता है। इसमें एफडी से बेहतर ब्याज मिलने की संभावना है। हालांकि, ज्यादा पैसा जमा करने पर एक ऐसा नियम लागू होता है, जिसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।

In Short
- नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट फंड बढ़ाने का विकल्प है वीपीएफ।
- ईपीएफ की तरह वीपीएफ पर भी सालाना 8.25 फीसदी ब्याज मिलता है।
- तय सीमा से ज्यादा अंशदान पर ब्याज टैक्स के दायरे में आ सकता है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा बेहद जरूरी है। अगर आप भी रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं, तो वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड आपके काम आ सकता है। इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में बेहतर ब्याज मिलने की संभावना है। हालांकि, निवेश से पहले इसके टैक्स और निकासी से जुड़े नियम समझना जरूरी है।
क्या है VPF और कितना मिलता है ब्याज?
वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड, कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़ी एक बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी नियमित पीएफ कटौती के अलावा अतिरिक्त रकम जमा कर सकते हैं। फिलहाल EPF पर सालाना 8.25 फीसदी ब्याज मिलता है और यही दर VPF पर भी लागू होती है।
इसकी खासियत यह है कि पैसा हर महीने सीधे सैलरी से कटकर पीएफ खाते में जमा हो जाता है। इससे अलग से निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती।
किन लोगों के लिए फायदेमंद है VPF?
VPF उन कर्मचारियों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है, जो लंबी अवधि के लिए सुरक्षित बचत करना चाहते हैं। खासकर 40 से 50 साल की उम्र वाले कर्मचारी, रिटायरमेंट के करीब पहुंच रहे लोग और नियमित बचत नहीं कर पाने वाले कर्मचारी इसका फायदा उठा सकते हैं।
अगर आपकी बड़ी रकम FD में जमा है, तो VPF के ब्याज की तुलना FD से टैक्स कटने के बाद मिलने वाले रिटर्न से कर सकते हैं। हालांकि, जिनके ऊपर महंगा कर्ज है या इमरजेंसी फंड नहीं है, उन्हें पहले इन जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।
₹2.5 लाख से ज्यादा जमा करने पर कितना टैक्स?
VPF में निवेश करते समय टैक्स का नियम समझना जरूरी है। कर्मचारी के EPF और VPF अंशदान को मिलाकर सालाना ₹2.5 लाख से ज्यादा जमा होने पर अतिरिक्त अंशदान से जुड़े ब्याज पर टैक्स लग सकता है। इसमें नियोक्ता का योगदान शामिल नहीं होता।
मसलन, अगर सालाना कुल कर्मचारी अंशदान ₹3 लाख है, तो ₹50,000 अतिरिक्त रकम से जुड़े ब्याज पर टैक्स लगेगा। 8.25 फीसदी ब्याज और 30 फीसदी टैक्स दर मानें, तो इस हिस्से पर टैक्स के बाद रिटर्न करीब 5.78 फीसदी रह सकता है।
जहां नियोक्ता पीएफ में योगदान नहीं करता, वहां ₹5 लाख की अलग सीमा लागू हो सकती है। निवेश पर टैक्स कटौती का फायदा भी आपकी टैक्स व्यवस्था और लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।
VPF से कब निकाल सकते हैं पैसा?
VPF की रकम EPF खाते का हिस्सा होती है। इसलिए इसे बचत खाते की तरह कभी भी नहीं निकाल सकते।
अक्टूबर 2025 में EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने आंशिक निकासी के नियम आसान बनाने और न्यूनतम सेवा अवधि 12 महीने करने की मंजूरी दी थी। बीमारी, शादी, शिक्षा और मकान जैसी जरूरतों के लिए निकासी आसान बनाने तथा 25 फीसदी न्यूनतम बैलेंस रखने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया।
हालांकि, पैसा निकालने से पहले लागू नियम और पात्रता जरूर जांचें। बार-बार निकासी करने से रिटायरमेंट फंड घट सकता है। इसलिए VPF में वही रकम जमा करें, जिसकी लंबे समय तक जरूरत नहीं पड़ेगी।