Home Loan वालों पर बढ़ सकता है बोझ! Repo Rate में 25 bps की बढ़ोतरी से कितनी बढ़ेगी EMI

RBI की ओर से रेपो रेट में सिर्फ 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी भी होम लोन ग्राहकों की जेब पर बड़ा असर डाल सकती है। ₹50 लाख के 25 साल के होम लोन पर EMI करीब ₹817 बढ़ सकती है। वहीं पूरी अवधि में करीब ₹2.45 लाख अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ सकता है। जानिए इसका पूरा कैलकुलेशन।

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रेपो-लिंक्ड होम लोन में रेट बढ़ने पर बैंक की पॉलिसी के हिसाब से EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
रेपो-लिंक्ड होम लोन में रेट बढ़ने पर बैंक की पॉलिसी के हिसाब से EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

In Short

  • 25 bps की बढ़ोतरी से ₹50 लाख के होम लोन की EMI करीब ₹817 बढ़ सकती है
  • 25 साल में अतिरिक्त ब्याज का बोझ करीब ₹2.45 लाख तक पहुंच सकता है
  • - EMI बढ़ाने या पार्ट प्रीपेमेंट से लंबे समय के ब्याज का बोझ कम किया जा सकता है

By Shakshi:

RBI की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25% की बढ़ोतरी देखने में छोटी लग सकती है, लेकिन लंबे समय के होम लोन पर इसका असर काफी बड़ा हो सकता है। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या फिर लोन चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है।

BankBazaar के CEO आदिल शेट्टी के मुताबिक, अगस्त में रिटेल महंगाई 4.82% रही, जो RBI के 4% के मीडियम टर्म टारगेट से ऊपर है। ऐसे में अक्टूबर की पॉलिसी समीक्षा में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

₹50 लाख के लोन पर कितनी बढ़ेगी EMI?

मान लीजिए आपने ₹50 लाख का होम लोन 25 साल के लिए 7.5% ब्याज दर पर लिया है। शेट्टी के मुताबिक, इस स्थिति में मौजूदा EMI करीब ₹36,950 प्रति महीने होगी।

अगर ब्याज दर 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ती है और लोन की अवधि में कोई बदलाव नहीं होता है, तो EMI करीब ₹817 बढ़कर ₹37,767 प्रति महीने हो सकती है।

इस हिसाब से कर्ज लेने वाले को एक साल में EMI के रूप में करीब ₹9,800 ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं। पूरे 25 साल की अवधि में अतिरिक्त ब्याज का बोझ करीब ₹2.45 लाख तक पहुंच सकता है।

EMI बढ़ेगी या लोन की अवधि?

रेपो रेट से जुड़े होम लोन में ब्याज दर बढ़ने पर जरूरी नहीं कि तुरंत EMI ही बढ़ जाए। बैंक की पॉलिसी के आधार पर EMI बढ़ाई जा सकती है, लोन की अवधि लंबी हो सकती है या दोनों में बदलाव किया जा सकता है।

असल असर ग्राहक के बकाया लोन, बची हुई अवधि, बैंक के रेट रीसेट सिस्टम और रेपो रेट में बदलाव का कितना हिस्सा लोन की ब्याज दर में ट्रांसफर होता है, इस पर निर्भर करेगा।

कैसे कम कर सकते हैं ब्याज का बोझ?

आदिल शेट्टी के मुताबिक, ग्राहकों को अपने बैंक से यह समझना चाहिए कि रेट रीसेट का उनके लोन पर क्या असर पड़ेगा। अगर संभव हो तो ग्राहक EMI को खुद बढ़ा सकते हैं, जिससे लोन की अवधि ज्यादा बढ़ने से बच सकती है।

इसके अलावा सालाना बोनस या अतिरिक्त कमाई मिलने पर पार्ट प्रीपेमेंट किया जा सकता है। इससे लोन का बकाया मूलधन जल्दी कम होगा और आगे चुकाए जाने वाले कुल ब्याज को घटाने में मदद मिल सकती है।

यानी रेपो रेट में सिर्फ 0.25% की बढ़ोतरी छोटी लग सकती है, लेकिन ₹50 लाख जैसे बड़े और लंबी अवधि के होम लोन पर इसका असर लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।

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