विदेश से पैसा कमाने वाले फ्रीलांसर्स के लिए RBI ने दी राहत, फिर भी बैंक क्यों मांग रहे बार-बार जानकारी?

विदेशी कंपनियों से पेमेंट लेने वाले फ्रीलांसर्स और छोटे सर्विस एक्सपोर्टर्स के लिए RBI के नए नियम परेशानी का कारण बन रहे हैं। RBI की सफाई के बावजूद कुछ बैंक अतिरिक्त डॉक्यूमेंट मांग रहे हैं। आखिर किन लोगों को मिली है राहत और क्यों अब भी बनी हुई है उलझन? जानिए पूरा मामला।

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In Short

  • RBI ने साफ किया कि व्यक्तिगत तौर पर विदेश में सेवाएं देने वालों को EDF फाइल करने की जरूरत नहीं है।
  • 1 अक्टूबर से लागू नए FEMA नियमों के तहत सर्विस एक्सपोर्टर्स के लिए रिपोर्टिंग जरूरी की गई है।
  • RBI की FAQs जारी नहीं होने से बैंकों के अलग-अलग नियम फ्रीलांसर्स की परेशानी बढ़ा रहे हैं।

By Gaurav Kumar:

विदेशी कंपनियों के लिए काम करके पैसा कमाने वाले फ्रीलांसर्स और छोटे सर्विस एक्सपोर्टर्स के बीच RBI के नए नियमों को लेकर उलझन बनी हुई है। रिजर्व बैंक ने साफ कर दिया है कि व्यक्तिगत तौर पर सेवाएं देने वालों को नए रिपोर्टिंग नियमों का पालन नहीं करना होगा। इसके बावजूद कुछ बैंक ग्राहकों से अतिरिक्त जानकारी मांग रहे हैं। आखिर नए नियम क्या हैं और राहत मिलने के बाद भी परेशानी क्यों हो रही है? आइए समझते हैं।

1 अक्टूबर से क्या बदले नियम?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत 1 अक्टूबर से नए नियम लागू किए हैं। इनके मुताबिक सर्विस एक्सपोर्टर्स को विदेशी ग्राहकों को दी गई सेवाओं और उनकी कीमत की जानकारी एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म (EDF) में देनी होगी।

यह फॉर्म उस बैंक के जरिए जमा करना होगा, जिससे विदेशी पेमेंट मिल रहा है। आमतौर पर इनवॉइस जारी होने वाले महीने के खत्म होने के 30 दिनों के भीतर जानकारी देनी होगी।

पहले सामान एक्सपोर्ट करने वालों के लिए EDF जरूरी था, जबकि सॉफ्टवेयर को छोड़कर दूसरी सेवाओं पर ऐसी शर्त नहीं थी।

RBI गवर्नर ने क्या दी सफाई?

7 अक्टूबर को बिजनेस टुडे के सवाल पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया था कि व्यक्तिगत तौर पर विदेश में सेवाएं देने वालों पर ये रिपोर्टिंग नियम लागू नहीं होंगे।

उन्होंने बताया कि विदेश में ट्यूशन पढ़ाने, छोटे सॉफ्टवेयर से जुड़े काम या दूसरी व्यक्तिगत सेवाओं के बदले पेमेंट लेने वालों को रिपोर्टिंग नहीं करनी होगी।इसके अलावा एक्सपोर्टर्स के लिए 10 लाख रुपये तक के बिल पर सेल्फ डिक्लेरेशन ही काफी होगा।

फ्रीलांसर को बैंक ने भेजा नोटिस

कंटेंट क्रिएटर रमेश श्रीवत्स ने सोशल मीडिया पर बताया कि अमेरिकी कंपनी से अक्टूबर के इनवॉइस का पेमेंट मिलने के बाद बैंक ने उनसे एक्सपोर्ट से जुड़ी जानकारी मांगी।बैंक ने कई लेटर वाला PDF भी भेजा। उन्हें सही लेटर चुनकर प्रिंट, साइन, स्कैन और जमा करने को कहा गया।

श्रीवत्स के मुताबिक, उनका एक ही क्लाइंट है और हर महीने एक पेमेंट आता है। ऐसे में बार-बार यही प्रक्रिया पूरी करना परेशानी भरा है।हालांकि, बाद में बैंक ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत तौर पर काम करने के कारण उन्हें EDF जमा करने की जरूरत नहीं है। ईमेल गलती से भेजा गया था।

RBI की FAQs का इंतजार क्यों?

RBI की सफाई के 20 दिन से ज्यादा समय बाद भी आधिकारिक FAQs जारी नहीं हुई हैं। इसी वजह से बैंक और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) नियमों को अलग-अलग तरीके से समझ रहे हैं।

कोटक महिंद्रा बैंक के ग्रुप CFO देवांग घीवाला ने बिजनेस टुडे को बताया कि बैंक फिलहाल व्यक्तिगत ग्राहकों से ऐसे डॉक्यूमेंट नहीं मांग रहा है। इस मामले में FEDAI से बातचीत जारी है।

कई बैंकों में अभी एक जैसी प्रक्रिया तय नहीं हुई है। RBI और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन से जल्द FAQs आने की उम्मीद है।

वहीं, इंडिया SME फोरम ने छोटे सर्विस एक्सपोर्टर्स के लिए आसान व्यवस्था बनने तक EDF फाइलिंग में 90 दिन की राहत मांगी है।

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