रेल हादसे में परिवार को मिल सकता है आर्थिक सहारा, ट्रेन टिकट बुक करते समय जरूर करें ये जरूरी काम
ट्रेन का टिकट बुक करते समय कई यात्री एक छोटी सी सुविधा को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही विकल्प किसी बड़े रेल हादसे में परिवार के लिए आर्थिक सहारा बन सकता है। जानिए इस सुविधा का फायदा किसे मिलता है, कितनी रकम मिल सकती है और क्लेम कैसे किया जाता है।

In Short
- ट्रेन टिकट बुक करते समय सिर्फ 45 पैसे में मिलता है यात्रा बीमा।
- रेल हादसे में मौत या स्थायी पूर्ण दिव्यांगता पर 10 लाख रुपये तक का कवर।
- बीमा क्लेम के लिए समयसीमा और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी होना जरूरी।
ट्रेन का टिकट बुक करते समय आप 500 या 1000 रुपये खर्च करते हैं, लेकिन क्या सिर्फ 45 पैसे बचाने के लिए एक जरूरी सुविधा छोड़ना सही है? दरअसल, IRCTC से ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को ट्रैवल इंश्योरेंस का विकल्प मिलता है। यह बीमा लेना जरूरी नहीं है, लेकिन किसी गंभीर रेल हादसे में यही छोटी रकम यात्री और उसके परिवार के लिए बड़ी आर्थिक मदद बन सकती है।
सिर्फ 45 पैसे में कितना मिलता है बीमा?
IRCTC के जरिए ई-टिकट बुक करते समय यात्री महज 45 पैसे में यात्रा बीमा ले सकते हैं। इसमें टैक्स भी शामिल है। बीमा के तहत दुर्घटना में मौत या स्थायी पूर्ण दिव्यांगता होने पर 10 लाख रुपये तक का कवर मिलता है। हालांकि, मुआवजा पॉलिसी की शर्तों के आधार पर तय होता है।
काउंटर टिकट पर भी मिलेगी सुविधा
अभी ऑनलाइन टिकट बुकिंग में बीमा का विकल्प मिलता है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे बोर्ड को 27 अक्टूबर 2026 से रेलवे स्टेशनों के रिजर्वेशन काउंटरों से टिकट खरीदने वाले यात्रियों तक भी बीमा सुविधा बढ़ाने का निर्देश दिया है।
ट्रेन हादसे में कितना मिलेगा मुआवजा?
बीमा के तहत अलग-अलग परिस्थितियों में मिलने वाली अधिकतम रकम इस प्रकार है।
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यात्री की मौत पर 10 लाख रुपये।
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स्थायी पूर्ण दिव्यांगता पर 10 लाख रुपये।
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स्थायी आंशिक दिव्यांगता पर 7.5 लाख रुपये तक।
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अस्पताल में इलाज के लिए 2 लाख रुपये तक।
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पार्थिव शरीर ले जाने के लिए 10,000 रुपये तक।
परिवार कैसे कर सकता है बीमा क्लेम?
दुर्घटना में यात्री की मौत होने पर नॉमिनी या कानूनी वारिस बीमा क्लेम कर सकता है। इसके लिए क्लेम फॉर्म, रेलवे की दुर्घटना रिपोर्ट, मृतक की पहचान से जुड़े दस्तावेज, नॉमिनी का पहचान पत्र और बैंक खाते की जानकारी मांगी जा सकती है। नॉमिनी नहीं होने पर कानूनी वारिस का प्रमाण देना पड़ सकता है।
कितने दिन के भीतर करना होगा क्लेम?
मौजूदा IRCTC ई-टिकट बीमा पॉलिसी के मुताबिक, बीमित घटना के चार महीने के भीतर बीमा कंपनी के नजदीकी कार्यालय में लिखित दावा करना होता है। दुर्घटना की रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है।
किन मामलों में नहीं मिलेगा पैसा?
हर दुर्घटना पर बीमा लाभ नहीं मिलता। आत्महत्या, जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाने, नशे से जुड़ी कुछ घटनाओं और रेलवे ट्रैक पार करते समय हुए हादसों जैसे मामलों में पॉलिसी की शर्तों के अनुसार दावा खारिज हो सकता है।
इसलिए टिकट बुक करते समय बीमा की शर्तें पढ़ें और नॉमिनी की जानकारी सही भरें।