रेलवे कर्मचारियों के लिए बदला पेंशन नियम, मौत और डिसएबिलिटी पर मिलेगा अलग लाभ
रेलवे कर्मचारियों के लिए पेंशन नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। रेलवे बोर्ड ने एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स 2026 लागू कर दिए हैं। नए नियमों में सेवा से जुड़ी मौत और डिसएबिलिटी के मामलों में कैटेगरी के आधार पर पेंशन और परिवार को मिलने वाले लाभ तय किए जाएंगे।

In Short
- रेलवे बोर्ड ने लागू किए रेल सर्विस एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स 2026, पुराने 1993 नियमों की जगह नई व्यवस्था लागू हुई।
- सेवा से जुड़ी मौत और डिसएबिलिटी को Category A, B, C और D में बांटा गया, जिसके आधार पर पेंशन लाभ तय होगा।
- नए नियमों में डिसएबिलिटी पेंशन, फैमिली पेंशन, मेडिकल अपील और देरी होने पर ब्याज जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
रेलवे में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ा बड़ा बदलाव हुआ है। अगर किसी कर्मचारी को नौकरी के दौरान गंभीर बीमारी, हादसे या सेवा से जुड़ी किसी घटना की वजह से डिसएबिलिटी होती है या उसकी मौत हो जाती है, तो अब पेंशन का नियम सामान्य व्यवस्था से अलग हो सकता है। कर्मचारी की स्थिति और घटना की कैटेगरी के आधार पर पेंशन तय होगी।
रेलवे बोर्ड ने लागू किए नए एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स
रेलवे बोर्ड ने रेल सर्विस एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। इन नए नियमों ने साल 1993 के एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स की जगह ली है। नए नियमों में सेवा के दौरान मौत, डिसएबिलिटी, फैमिली पेंशन, मेडिकल बोर्ड की अपील, डिसएबिलिटी की गणना और पेंशन में देरी जैसे मामलों को शामिल किया गया है।
ये नियम उन कर्मचारियों पर लागू होंगे, जिनकी डिसएबिलिटी या मौत का संबंध रेलवे सेवा से है। अगर कर्मचारी डिसएबिलिटी के बाद भी रेलवे में नौकरी करता रहता है, तब भी कुछ प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसके अलावा एक्स्ट्राऑर्डिनरी फैमिली पेंशन पाने वाले परिवार भी इन नियमों के दायरे में आएंगे।
मौत और डिसएबिलिटी को चार कैटेगरी में बांटा गया
नए नियमों में सेवा से जुड़ी मौत और डिसएबिलिटी को चार कैटेगरी में रखा गया है।
- Category A: ऐसी मौत या डिसएबिलिटी जो प्राकृतिक कारणों से हुई हो और रेलवे सेवा से जुड़ी न हो।
- Category B: ऐसी मौत या डिसएबिलिटी जो रेलवे सेवा की वजह से हुई हो या सेवा के कारण बढ़ी हो।
- Category C: दंगे, हिंसा, खराब मौसम, राहत और बचाव अभियान जैसी गंभीर परिस्थितियों में हुई मौत या डिसएबिलिटी।
- Category D: आतंकवादी हमले, युद्ध जैसी परिस्थितियों या दुश्मन की कार्रवाई से जुड़े मामले।
यानी हर कर्मचारी के लिए पेंशन का नियम एक जैसा नहीं होगा। घटना की कैटेगरी के हिसाब से लाभ तय होगा।
डिसएबिलिटी पेंशन में दो हिस्से होंगे
नई व्यवस्था में डिसएबिलिटी पेंशन को दो भागों में बांटा गया है। इसमें सर्विस एलीमेंट और डिसएबिलिटी एलीमेंट शामिल हैं।
सर्विस एलीमेंट कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी के 50% के बराबर होगा। वहीं Category B, C और D में 100% डिसएबिलिटी होने पर डिसएबिलिटी एलीमेंट 30% होगा।
खास बात यह है कि इसके लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग सर्विस की शर्त नहीं रखी गई है। यानी 10 साल से कम सेवा वाले कर्मचारी को भी सर्विस एलीमेंट मिल सकता है।
डिसएबिलिटी प्रतिशत के हिसाब से तय होगा लाभ
मेडिकल बोर्ड द्वारा तय डिसएबिलिटी प्रतिशत के आधार पर पेंशन की गणना होगी। अगर डिसएबिलिटी 50% तक है तो इसे 50% माना जाएगा। 50% से ज्यादा और 75% तक डिसएबिलिटी होने पर इसे 75% माना जाएगा। वहीं 75% से ज्यादा होने पर इसे 100% माना जाएगा।
इस व्यवस्था को डिसएबिलिटी की ब्रॉड-बैंडिंग कहा गया है।
मौत की स्थिति में परिवार को मिलेगी फैमिली पेंशन
Extraordinary Family Pension में विधवा या विधुर के अलावा पात्र बच्चे, माता-पिता और आश्रित भाई-बहन भी शामिल हो सकते हैं।
Category B में फैमिली पेंशन कर्मचारी की पे के 60% के बराबर होगी। वहीं Category C और D में यह कर्मचारी की बेसिक पे के 100% के बराबर होगी। रेलवे नियमों के अनुसार फैमिली पेंशन ₹18,000 से कम नहीं होगी।
अगर डिसएबिलिटी पेंशन लेने वाले कर्मचारी की उसी बीमारी या चोट से बाद में मौत होती है, तो रिटायरमेंट के सात साल के भीतर ऐसी स्थिति में परिवार को संबंधित कैटेगरी के तहत लाभ मिल सकता है।
आवेदन की जरूरत नहीं, देरी पर मिलेगा ब्याज
नए नियमों के तहत डिसएबिलिटी पेंशन या Extraordinary Family Pension के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। हेड ऑफ ऑफिस मामले की जांच कर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।
अगर प्रशासनिक देरी की वजह से पेंशन जारी होने में देरी होती है, तो पेंशनर या फैमिली पेंशनर को बकाया रकम पर ब्याज दिया जाएगा।
रेलवे कर्मचारियों के लिए इन नियमों को समझना जरूरी है, क्योंकि घटना किस कैटेगरी में आती है, डिसएबिलिटी कितनी मानी जाती है और परिवार को किस आधार पर पेंशन मिलेगी, इसी से मिलने वाले लाभ तय होंगे।