घर खरीदने से पहले समझ लें ये फर्क, राधिका गुप्ता ने बताया क्या है असली निवेश

राधिका गुप्ता ने घर खरीदने और निवेश को अलग नजर से देखने की सलाह दी है। India Today Woman Summit 2026 में उन्होंने कहा कि अपना घर भावनात्मक सुरक्षा दे सकता है, लेकिन उसे हमेशा हाई रिटर्न निवेश नहीं मानना चाहिए। साथ ही EMI का बोझ भी संभालने लायक होना जरूरी है।

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In Short

  • राधिका गुप्ता ने कहा कि खुद रहने वाला घर जरूरी नहीं कि निवेश माना जाए।
  • होम लोन की EMI इतनी नहीं होनी चाहिए कि बाकी वित्तीय जरूरतें प्रभावित होने लगें।
  • अतिरिक्त प्रॉपर्टी खरीदते समय रिटर्न, लिक्विडिटी और दूसरे निवेश विकल्पों से तुलना जरूरी है।

By Gaurav Kumar:

एडलवाइस म्यूचुअल फंड की MD और CEO राधिका गुप्ता ने घर खरीदने और निवेश के बीच फर्क समझाया है। India Today Woman Summit 2026 में राधिका गुप्ता ने कहा कि अपना घर खरीदना भावनात्मक सुरक्षा और जीवन की जरूरतों से जुड़ा फैसला हो सकता है, लेकिन इसे अपने आप एक बेहतर निवेश नहीं मानना चाहिए।

घर को घर की तरह देखें निवेश की तरह नहीं

राधिका गुप्ता ने कहा कि जिस घर में आप खुद रहते हैं उसे निवेश मानकर नहीं देखना चाहिए। उनके मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को घर खरीदने में खुशी और सुरक्षा महसूस होती है तो उसे घर खरीदना चाहिए। लेकिन घर की भावनात्मक अहमियत और उससे मिलने वाले वित्तीय रिटर्न को एक ही नजर से नहीं देखना चाहिए।

उनका कहना था कि जिंदगी को सिर्फ आंकड़ों के हिसाब से नहीं जिया जा सकता। घर में रहा जा सकता है लेकिन म्यूचुअल फंड में नहीं।

EMI इतनी न हो कि जिंदगी मुश्किल हो जाए

घर खरीदने के लिए होम लोन लेने को लेकर भी राधिका गुप्ता ने पूरी तरह मना नहीं किया। उनकी सलाह है कि कर्ज की मासिक किस्त इतनी बड़ी नहीं होनी चाहिए कि रोजमर्रा की जिंदगी पर दबाव पड़ने लगे।

उन्होंने कहा कि EMI का बोझ आपकी जिंदगी को दबाने वाला नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक वित्तीय सुरक्षा के लिए निवेश के साथ पर्याप्त हेल्थ कवर और ऐसा कर्ज जरूरी है जिसे आसानी से संभाला जा सके।

दूसरी प्रॉपर्टी का हिसाब अलग होगा

राधिका गुप्ता ने घर के अलावा खरीदी जाने वाली प्रॉपर्टी को अलग नजर से देखने की बात कही। उनके मुताबिक अगर कोई अतिरिक्त प्रॉपर्टी निवेश के मकसद से खरीदी जा रही है तो उसका फैसला भावनाओं के बजाय वित्तीय हिसाब से होना चाहिए।

उन्होंने एक ऐसी जमीन का उदाहरण दिया जिसकी कीमत करीब दो दशक में दोगुनी हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या निवेशक म्यूचुअल फंड से भी इतने लंबे समय में सिर्फ दोगुना रिटर्न मिलने पर इसे बड़ी उपलब्धि मानेंगे।

प्रॉपर्टी में पैसा फंसने का खतरा

उनका तर्क है कि निवेशक अक्सर प्रॉपर्टी से मिलने वाले रिटर्न को लेकर भावनात्मक हो जाते हैं। लेकिन निवेश का आकलन करते समय महंगाई, पैसा निकालने में आसानी, रखरखाव की लागत और दूसरे विकल्पों से मिलने वाले संभावित रिटर्न को भी देखना चाहिए।

राधिका गुप्ता ने इस स्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया जिसमें परिवार के पास काफी संपत्ति होती है लेकिन जरूरत के समय हाथ में नकदी कम रहती है। यानी वे संपत्ति के मामले में मजबूत होते हैं लेकिन नकदी के मामले में कमजोर।

निवेश ऐसा हो जो पैसा आपके लिए काम करे

राधिका गुप्ता के मुताबिक सिर्फ संपत्ति जमा करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए। पैसा ऐसा होना चाहिए जो आपके लिए काम करे और उसे संभालने में लगातार परेशानी न हो।

इसी संदर्भ में उन्होंने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REIT जैसे विकल्पों का भी जिक्र किया। उनका संदेश खासतौर पर महिलाओं के लिए सीधा था। घर अगर स्थिरता और खुशी देता है तो खरीदें, लेकिन संपत्ति बढ़ाने के लिए निवेश का फैसला भावनाओं के बजाय अनुशासन और वित्तीय सोच के साथ करें।
 

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