इलाज से लेकर मेडिकल टेस्ट तक भारी खर्च! सर्वे में सामने आई अस्पतालों के बिल की सच्चाई
प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना आपकी जेब पर कितना भारी पड़ सकता है? एक नए सर्वे में सरकारी और निजी अस्पतालों के खर्च में बड़ा अंतर सामने आया है। इलाज, मेडिकल टेस्ट और अस्पताल के बिल को लेकर मरीजों ने कई शिकायतें की हैं। जानिए सर्वे में क्या खुलासा हुआ।

In Short
- सरकारी अस्पतालों के मुकाबले प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च करीब 8 गुना ज्यादा है।
- सर्वे में 68% लोगों ने इलाज और 63% ने मेडिकल टेस्ट की ज्यादा कीमतों की शिकायत की।
- केवल 14% लोगों ने कहा कि उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में बिलिंग से जुड़ी कोई परेशानी नहीं हुई।
देश में इलाज का बढ़ता खर्च आम लोगों के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। खासकर प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होने पर मरीजों और उनके परिवारों को भारी रकम चुकानी पड़ती है। एक नए LocalCircles सर्वे में सामने आया है कि सरकारी अस्पतालों के मुकाबले प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होने का औसत खर्च करीब 8 गुना ज्यादा है। सर्वे में लोगों ने इलाज, जांच और अस्पताल के बिल से जुड़ी कई परेशानियां भी बताई हैं।
प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के खर्च में कितना अंतर?
LocalCircles सर्वे में दिए गए नेशनल सैंपल सर्वे के 80वें राउंड के आंकड़ों के मुताबिक, प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च 50,508 रुपये है। वहीं, सरकारी अस्पताल में यही खर्च औसतन 6,631 रुपये है।
इसका मतलब है कि प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होने पर मरीज को सरकारी अस्पताल के मुकाबले करीब 7.6 गुना ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। ये आंकड़े जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच के हैं।
बच्चे के जन्म पर होने वाले खर्च में भी बड़ा अंतर सामने आया है। प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी पर औसतन 37,630 रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ते हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में यह रकम सिर्फ 2,299 रुपये है।
इलाज और मेडिकल टेस्ट के भारी खर्च से परेशान लोग
LocalCircles ने पिछले तीन साल में प्राइवेट अस्पतालों की सेवाएं लेने वाले परिवारों के अनुभव जानने के लिए सर्वे किया। इसमें देश के 306 जिलों से 23,084 प्रतिक्रियाएं मिलीं।
सर्वे में 68% लोगों ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की कीमत जरूरत से ज्यादा थी। वहीं, 63% लोगों ने मेडिकल टेस्ट के महंगे होने की शिकायत की।
इसके अलावा 56% लोगों ने ICU और कमरों जैसी सुविधाओं के ज्यादा चार्ज वसूले जाने की बात कही। वहीं, 51% लोगों ने दवाइयों और इलाज में इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमतों को लेकर शिकायत की।
अस्पताल के बिल में अतिरिक्त चार्ज की भी शिकायत
सर्वे में अस्पतालों की बिलिंग को लेकर भी कई सवाल उठे। करीब 49% लोगों ने बताया कि उनके बिल में डॉक्टर की ऐसी कंसल्टेशन फीस जोड़ी गई, जिसकी जरूरत नहीं थी।
वहीं, 43% लोगों ने डॉक्टर की फीस ज्यादा होने की शिकायत की। करीब 40% लोगों ने दवाइयों और मेडिकल सामान की इस्तेमाल की गई मात्रा से ज्यादा बिल बनाने की बात कही। इतने ही लोगों ने अचानक सामने आए या अनजान चार्ज की शिकायत की।
सिर्फ 14% लोगों को नहीं हुई बिलिंग की परेशानी
सर्वे में शामिल केवल 14% लोगों ने बताया कि उन्हें बिलिंग से जुड़ी बताई गई परेशानियों में से किसी का सामना नहीं करना पड़ा।
सर्वे में 69% पुरुष और 31% महिलाएं शामिल थीं। इनमें 46% लोग टियर-1, 30% टियर-2 और 24% छोटे शहरों और जिलों से थे।
कुल मिलाकर, सर्वे के नतीजे बताते हैं कि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च और बिलिंग से जुड़ी समस्याएं परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ डाल रही हैं।