₹2.31 करोड़ की Property पर आया Tax का मामला, ITAT पहुंचते ही क्यों बदल गई पूरी तस्वीर?
Dubai में रहने वाली एक NRI महिला ने करीब ₹2.31 करोड़ की Property खरीदी थी और ITR भी दाखिल नहीं किया था। Income Tax Department ने मामले में Tax Demand खड़ी कर दी लेकिन Mumbai ITAT पहुंचते ही मामला पलट गया। आखिर Tax Department से ऐसी कौन सी गलती हुई जिसके कारण पूरी कार्रवाई रद्द करनी पड़ी?

In Short
- NRI महिला की करीब ₹2.31 करोड़ की Property खरीद पर Income Tax Department ने कार्रवाई की।
- Mumbai ITAT ने Section 148 के Notice को गलत मंजूरी के कारण अमान्य माना।
- - ITAT ने Tax Demand रद्द की लेकिन Property में लगाए गए पैसे के स्रोत पर फैसला नहीं दिया।
दुबई में रहने वाली एक NRI महिला ने करीब ₹2.31 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीदी थी, लेकिन उन्होंने Assessment Year 2017-18 के लिए Income Tax Return यानी ITR नहीं भरा था। इसके बाद Income Tax Department की नजर इस प्रॉपर्टी की खरीद पर पड़ी और महिला पर टैक्स की मांग खड़ी कर दी गई।
हालांकि बाद में मामला Mumbai ITAT पहुंचा, जहां महिला को बड़ी राहत मिली। ITAT ने टैक्स की पूरी मांग को रद्द कर दिया। इसकी वजह प्रॉपर्टी खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए पैसे नहीं, बल्कि Income Tax Department की कार्रवाई में हुई एक जरूरी गलती थी।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
Vandana Vijay Kumar Chudamasa अगस्त 2014 में नौकरी के लिए दुबई चली गई थीं। उनके पति भी उसी साल अक्टूबर में दुबई चले गए थे।
बाद में Income Tax Department को पता चला कि महिला ने Financial Year 2017-18 में करीब ₹2.31 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीदी थी।
इसके बाद 2 अप्रैल 2022 को Section 148 के तहत उन्हें Notice भेजा गया। Notice मिलने के बाद भी महिला ने ITR नहीं भरा। इसके बाद अगस्त और नवंबर 2023 में भी उन्हें नोटिस भेजे गए।
इन Notices का जवाब नहीं मिलने पर Income Tax अधिकारी ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर फैसला कर दिया। करीब ₹2.32 करोड़ की रकम को Section 69 के तहत ऐसा निवेश माना गया, जिसके पैसे का सही स्रोत नहीं बताया गया था। इसी आधार पर टैक्स की मांग की गई।
पहली Appeal में नहीं मिली राहत
महिला ने इसके बाद Commissioner of Income Tax Appeals) के सामने इस फैसले को चुनौती दी।
उनका कहना था कि वह दुबई में रहने वाली NRI हैं और प्रॉपर्टी उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर खरीदी थी। हालांकि अपनी बात के समर्थन में जरूरी सबूत नहीं देने के कारण उनकी अपील खारिज कर दी गई।
ITAT पहुंचने में हुई 148 दिन की देरी
इसके बाद महिला ने Mumbai ITAT का दरवाजा खटखटाया। हालांकि ITAT में Appeal दाखिल करने में 148 दिन की देरी हो गई थी।
इसके बावजूद ITAT ने उनकी Appeal सुनने का फैसला किया। महिला की तरफ से बताया गया कि वह और उनके पति दुबई में रहते और काम करते हैं। उन्होंने टैक्स से जुड़े मामले को संभालने की जिम्मेदारी एक सलाहकार को दी थी।
सलाहकार ने उन्हें भरोसा दिया था कि मामले को संभाला जा रहा है। ITAT ने इन परिस्थितियों को देखते हुए 148 दिन की देरी को माफ कर दिया।
इस एक गलती से पलट गया मामला
पूरे मामले में सबसे अहम बात Section 148 का Notice जारी करने से पहले ली गई मंजूरी से जुड़ी थी।
2 अप्रैल 2022 को Notice जारी करने के लिए Principal Commissioner of Income Tax, Bengaluru-3 से मंजूरी ली गई थी।
महिला के वकील ने कहा कि मामले में तीन साल की तय समय सीमा 31 मार्च 2022 को पूरी हो चुकी थी। इसलिए कानून के Section 151(ii) के मुताबिक Notice जारी करने की मंजूरी Principal Chief Commissioner या Principal Director General से ली जानी चाहिए थी।
ITAT ने इस दलील को सही माना। Tribunal ने कहा कि Notice जारी करने से पहले उस अधिकारी से मंजूरी नहीं ली गई, जिससे कानून के मुताबिक मंजूरी लेना जरूरी था।
इसी वजह से Section 148 के तहत जारी Notice को गलत माना गया और उसके आधार पर हुई पूरी कार्रवाई और टैक्स की मांग रद्द कर दी गई।
₹2.31 करोड़ की प्रॉपर्टी के पैसे का क्या हुआ?
इस मामले में ITAT ने यह फैसला नहीं किया कि प्रॉपर्टी खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया पैसा सही स्रोत से आया था या नहीं।
महिला के वकील के मुताबिक उस साल प्रॉपर्टी के लिए करीब ₹1.85 करोड़ का भुगतान किया गया था। इसमें ₹1.61 करोड़ का Home Loan था। इसके अलावा उनके पति ने ₹1 लाख और महिला ने खुद ₹23.31 लाख दिए थे।
लेकिन जब ITAT ने टैक्स विभाग की शुरुआती कार्रवाई को ही गलत मानकर रद्द कर दिया, तो प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आए पैसे के स्रोत पर फैसला करने की जरूरत नहीं पड़ी।