No-Cost EMI के चक्कर में कहीं हो तो नहीं रहा नुकसान? फेस्टिव सेल में खरीदारी से पहले इन बातों को लेकर रहें सतर्क
फेस्टिव सेल में स्मार्टफोन, टीवी और दूसरे सामान पर No-Cost EMI के ऑफर्स मिल रहे हैं। लेकिन क्या बिना ब्याज वाली किस्तों पर खरीदारी हमेशा फायदे का सौदा होती है? एक्सपर्ट्स ने बताया है कि EMI और एकमुश्त पेमेंट में कौन सा विकल्प बेहतर हो सकता है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

In Short
- No-Cost EMI पर भी प्रोसेसिंग फीस, GST और डिस्काउंट नहीं मिलने से बढ़ सकता है खर्च।
- ₹60,000 के स्मार्टफोन पर ईएमआई चुनने से ₹3,590 तक ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।
- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईएमआई या पूरा पेमेंट चुनने से पहले कुल खर्च और अपनी बचत जरूर देखें।
त्योहारी सीजन में स्मार्टफोन, टीवी और घरेलू उपकरणों पर मिलने वाले नो-कॉस्ट ईएमआई ऑफर्स ग्राहकों को खूब आकर्षित करते हैं। इन ऑफर्स में पूरी रकम एक साथ देने के बजाय हर महीने किस्त चुकाने की सुविधा मिलती है। लेकिन क्या नो-कॉस्ट ईएमआई वाकई फायदे का सौदा है? जरूरी नहीं। कई बार प्रोसेसिंग फीस, GST और छूट नहीं मिलने की वजह से EMI पर सामान खरीदना महंगा पड़ सकता है।
Zavo के फाउंडर और सीईओ कुंदन शाही और चार्टर्ड अकाउंटेंट रोहित सलूजा के मुताबिक, खरीदारी से पहले दोनों पेमेंट ऑप्शन की कुल लागत की तुलना करना जरूरी है।
नो-कॉस्ट EMI में कैसे बढ़ जाता है खर्च?
नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते समय सिर्फ हर महीने की किस्त नहीं देखनी चाहिए। इसमें प्रोसेसिंग फीस, लागू GST, ब्याज और छूट का नुकसान भी जोड़ना जरूरी है।
रोहित सलूजा ने इसे एक उदाहरण से समझाया। मान लीजिए आप 60,000 रुपये का स्मार्टफोन खरीद रहे हैं। नो-कॉस्ट ईएमआई पर 500 रुपये प्रोसेसिंग फीस और GST लगता है। साथ ही एकमुश्त पेमेंट पर मिलने वाला 3,000 रुपये का डिस्काउंट भी नहीं मिलता।
ऐसे में ईएमआई पर फोन की कुल लागत 60,590 रुपये होगी, जबकि एकमुश्त पेमेंट पर वही फोन 57,000 रुपये में मिलेगा। यानी ईएमआई चुनने पर 3,590 रुपये ज्यादा खर्च होंगे।
कब फायदे का सौदा हो सकती है नो-कॉस्ट EMI?
कुंदन शाही के मुताबिक, अगर दोनों पेमेंट ऑप्शन में सामान की कीमत समान है और अतिरिक्त चार्ज बहुत कम हैं, तो नो-कॉस्ट EMI फायदेमंद हो सकती है।
खासकर तब, जब आप अपनी बचत को इमरजेंसी के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं या उस रकम पर ब्याज कमा सकते हैं।
हालांकि, बची हुई रकम से मिलने वाला रिटर्न ईएमआई के अतिरिक्त खर्च से ज्यादा होना चाहिए। निवेश पर टैक्स और किस्तों की टाइमिंग भी ध्यान में रखनी चाहिए। बाजार से जुड़े निवेश में रिटर्न की गारंटी नहीं होती।
बचत जरूरी या कर्ज से दूरी?
कई परिवार मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी जाने या अचानक आने वाले खर्चों के लिए पैसा बचाकर रखना चाहते हैं। अगर एकमुश्त पेमेंट करने से इमरजेंसी फंड काफी कम हो जाता है, तो थोड़े अतिरिक्त खर्च के बावजूद EMI बेहतर विकल्प हो सकती है।
लेकिन सिर्फ छोटी मासिक किस्त देखकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए। कई EMIs एक साथ चलने से घरेलू बजट और नियमित बचत पर दबाव बढ़ सकता है।
EMI लेने से पहले ये बातें जरूर चेक करें
नो-कॉस्ट ईएमआई चुनने से पहले कुल भुगतान, किस्तों की अवधि, प्रोसेसिंग फीस, GST, समय से पहले लोन बंद करने के चार्ज और किस्त चूकने पर लगने वाली पेनल्टी जरूर जांचें।
यह भी देखें कि ऑफर किसी खास क्रेडिट कार्ड पर तो नहीं है और ईएमआई चुनने पर कोई डिस्काउंट खत्म तो नहीं हो रहा।
कुल मिलाकर, अगर एकमुश्त पेमेंट पर अच्छी छूट मिल रही है और आपकी इमरजेंसी सेविंग्स सुरक्षित हैं, तो पूरा पैसा एक साथ देना ज्यादा किफायती हो सकता है। वहीं, बचत बनाए रखना जरूरी है और ईएमआई बजट में आसानी से फिट होती है, तो किस्तों का विकल्प समझदारी भरा हो सकता है।