New Tax Rules 2026: घर खरीदने वालों के लिए मौका या जोखिम? जानें आपके प्लान और निवेश पर बड़ा असर
नए टैक्स नियम 2026 के लागू होने से घर खरीदना पहले से आसान हो सकता है। बढ़ी हुई डिस्पोजेबल इनकम और सरल प्रक्रियाओं से लोगों की खरीद क्षमता बढ़ेगी। इसका असर निवेश रणनीति पर भी पड़ेगा, जहां रियल एस्टेट पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है और निवेशकों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

1 अप्रैल 2026 से लागू हुए Income Tax Act 2025 का असर अब रियल एस्टेट सेक्टर में दिखने लगा है। नए टैक्स ढांचे से आम लोगों की जेब में ज्यादा पैसा बच रहा है, जिससे घर खरीदने की क्षमता बढ़ी है। साथ ही, यह बदलाव रियल एस्टेट को निवेश के तौर पर भी ज्यादा आकर्षक बना रहा है।
बढ़ी खरीदारी की क्षमता
नए कानून के तहत ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स छूट मिलने से लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ी है। BankBazaar के CEO अधिल शेट्टी के मुताबिक, इससे होम लोन लेने वालों की EMI चुकाने की क्षमता बेहतर होगी और उनका क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होगा।
इसका सीधा असर यह है कि पहली बार घर खरीदने वाले खरीदार बाजार में तेजी से एंट्री कर सकते हैं, वहीं मौजूदा निवेशकों को भी रियल एस्टेट में निवेश बढ़ाने का मौका मिल रहा है।
PropertyPistol के फाउंडर आशीष नारायण अग्रवाल का कहना है कि PAN आधारित आसान प्रक्रिया और TCS में कमी से खासकर NRI निवेशकों के लिए प्रॉपर्टी खरीदना आसान होगा।
इससे डील जल्दी पूरी होंगी, जोखिम कम होगा और सेकेंडरी मार्केट में भी लिक्विडिटी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, रियल एस्टेट अब पहले से ज्यादा 'स्मूद' एसेट क्लास बनता दिख रहा है।
पोर्टफोलियो में बढ़ेगा हिस्सा
InvestoXpert Advisors के फाउंडर विशाल रहेजा के अनुसार, पारदर्शी टैक्स सिस्टम निवेशकों को बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा। उनका अनुमान है कि शहरी निवेश पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट की हिस्सेदारी 10% तक बढ़ सकती है। अब निवेशक रियल एस्टेट को इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और गोल्ड के साथ संतुलित तरीके से जोड़ पाएंगे।
टियर-2, टियर-3 शहरों में बढ़ेगी मांग
Arete Group के वीरेंद्र कुमार का मानना है कि बढ़ती खरीद क्षमता का असर छोटे शहरों में ज्यादा दिखेगा। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और किफायती कीमतों के कारण टियर-2 और टियर-3 शहर निवेश के नए हॉटस्पॉट बन सकते हैं।
मिडिल क्लास को सबसे बड़ा फायदा
TDI Infrastructure के CEO अक्षय तनेजा के मुताबिक, इस सुधार का सबसे ज्यादा फायदा मिड-इनकम हाउसिंग सेगमेंट को होगा। यहां कीमतों के प्रति संवेदनशीलता ज्यादा होती है, इसलिए थोड़ी सी आय बढ़त भी खरीद फैसले को तेज कर सकती है।