लाखों का रिटायरमेंट फंड भी नहीं देगा हर महीने की सैलरी, जानिए कहां चूक जाते हैं लोग
रिटायरमेंट के लिए बड़ा कॉर्पस बनाना जरूरी है, लेकिन क्या यह लंबे समय तक नियमित आय दे पाएगा? बचत को हर महीने की कमाई में बदलने के लिए कुछ विकल्प मौजूद हैं। एन्युटी कैसे काम करती है और इसमें कौन-कौन से विकल्प मिलते हैं, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- रिटायरमेंट के लिए सिर्फ बड़ा फंड बनाना काफी नहीं, जरूरी है नियमित आय का इंतजाम करना
- एन्युटी के जरिए जमा रकम को रिटायरमेंट के बाद हर महीने की इनकम में बदला जा सकता है
- फिक्स्ड और वैरिएबल एन्युटी में गारंटीड और मार्केट लिंक्ड इनकम के अलग-अलग विकल्प मिलते हैं
रिटायरमेंट प्लानिंग में ज्यादातर लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि नौकरी छोड़ने तक कितना बड़ा फंड तैयार हो जाए। लेकिन सिर्फ बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस होना ही काफी नहीं है। रिटायरमेंट के बाद उस पैसे से नियमित कमाई कैसे होगी, यह भी उतना ही जरूरी है। बढ़ती उम्र और महंगाई के असर को देखते हुए बचत को लंबे समय तक चलाने के लिए सही योजना बनाना जरूरी है।
रिटायरमेंट फंड पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ सकता है भारी
कई लोग मानते हैं कि रिटायरमेंट फंड, निवेश से बना कॉर्पस, ग्रेच्युटी, संपत्ति बेचने से मिली रकम या दूसरी बचत योजनाएं उनकी जरूरतों को पूरा कर देंगी। लेकिन केवल इन पर निर्भर रहना हमेशा पर्याप्त नहीं हो सकता।
Go Digit Life Insurance के वाइस प्रेसिडेंट – प्रोडक्ट्स अशोक मनवानी के मुताबिक, रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब सिर्फ पैसा जमा करना नहीं है, बल्कि रिटायरमेंट के बाद उस पैसे को एक स्थायी इनकम में बदलना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत में लोग कॉर्पस बनाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन यह योजना कम बनाते हैं कि रिटायरमेंट के बाद वही पैसा हर महीने खर्चों के लिए कैसे काम आएगा।
एन्युटी से मिल सकती है नियमित आय
एन्युटी ऐसे वित्तीय उत्पाद हैं जो एकमुश्त निवेश या नियमित प्रीमियम के बदले रिटायरमेंट के दौरान नियमित आय उपलब्ध करा सकते हैं। इन्हें लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां उपलब्ध कराती हैं।
एन्युटी में भुगतान तुरंत शुरू हो सकता है या कुछ समय बाद शुरू किया जा सकता है। यह व्यक्ति की जरूरत और चुने गए उत्पाद पर निर्भर करता है।
एन्युटी मुख्य रूप से दो तरह की होती हैं। फिक्स्ड एन्युटी में पहले से तय आय मिलती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद आय को लेकर ज्यादा निश्चितता रहती है। वहीं, वैरिएबल एन्युटी में कुछ हिस्सा गारंटीड होता है और कुछ हिस्सा बाजार के प्रदर्शन से जुड़ा होता है।
₹2 लाख सालाना निवेश पर एन्युटी का उदाहरण
Go Digit Life Insurance के एक उदाहरण के मुताबिक, 45 साल का व्यक्ति अगर हर साल ₹2 लाख का निवेश 10 साल तक करता है और 61 साल की उम्र में एन्युटी इनकम शुरू करता है, तो 100% गारंटीड एन्युटी विकल्प में सालाना ₹2.55 लाख का भुगतान दिखाया गया है।
वहीं, वैरिएबल एन्युटी में 60% भुगतान गारंटीड और 40% हिस्सा निफ्टी 50 के प्रदर्शन से जुड़ा है। इसमें 12% सालाना निफ्टी 50 रिटर्न मानने पर 61 साल की उम्र में सालाना भुगतान ₹3.55 लाख दिखाया गया है। 10% और 8% रिटर्न के अनुमान पर यह भुगतान क्रमशः ₹3.17 लाख और ₹2.86 लाख बताया गया है। ये सिर्फ उदाहरण हैं और भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देते।
इमीडिएट और डिफर्ड एन्युटी में अंतर
इमीडिएट एन्युटी में एकमुश्त रकम जमा करने के बाद नियमित भुगतान शुरू हो सकता है। वहीं, डिफर्ड एन्युटी में पहले निवेश किया जाता है और तय समय बाद इनकम शुरू होती है।
रिटायरमेंट के करीब पहुंचने वालों के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि उन्होंने कितना पैसा बचाया है, बल्कि यह भी होना चाहिए कि नौकरी खत्म होने के बाद उनकी बचत हर महीने उन्हें आय कैसे देगी।