कश्मीर के केसर किसानों की बदली किस्मत! HDFC Bank की इस पहल से खेती और कमाई में कैसे हो रहा सुधार?

कश्मीर में केसर की खेती करने वाले किसानों के सामने बदलते मौसम और फसल की सही कीमत नहीं मिलने जैसी चुनौतियां हैं। लेकिन HDFC Bank की Parivartan पहल से किसानों की खेती और कमाई के तरीके में बदलाव आ रहा है। जानिए कैसे नई तकनीक और बाजार तक पहुंच किसानों की मदद कर रही है।

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In Short

  • कश्मीर में बदलते मौसम और बारिश की कमी से केसर की खेती प्रभावित हो रही है।
  • HDFC Bank की Parivartan पहल से किसानों को सोलर पंप, ब्रांडिंग और सीधे खरीदारों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।
  • केसर किसानों को पहले एक ग्राम पर 200 रुपये मिलते थे, अब सीधे बिक्री से 300 से 350 रुपये तक मिल रहे हैं।

By Gungun Mishra:

कश्मीर में केसर की खेती करने वाले किसानों के सामने मौसम में बदलाव और फसल की सही कीमत नहीं मिलने जैसी कई परेशानियां हैं। कभी समय पर बारिश नहीं होती तो कभी लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बन जाते हैं। इससे केसर की पैदावार प्रभावित होती है। लेकिन HDFC Bank की Parivartan पहल किसानों को इन चुनौतियों से निपटने में मदद कर रही है। इसके जरिए किसानों को सोलर पंप, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और सीधे खरीदारों तक पहुंचने की सुविधा मिल रही है।

केसर बेचने पर अब मिल रहे ज्यादा पैसे

कश्मीर के पंपोर में रहने वाले 48 साल के जावेद अहमद का परिवार कई पीढ़ियों से केसर की खेती कर रहा है। पहले उन्हें अपनी फसल बिचौलियों के जरिए बेचनी पड़ती थी। लेकिन पिछले दो साल में उनकी खेती और बिक्री के तरीके में बदलाव आया है।

जावेद बताते हैं कि HDFC Bank की Parivartan पहल ने किसानों की खरीदारों से सीधी मुलाकात कराई। साथ ही Samarkash ब्रांड के तहत मुफ्त पैकेजिंग और ब्रांडिंग की सुविधा भी दी।

उनके मुताबिक, पहले एक ग्राम केसर बिचौलियों को 200 रुपये में बेचना पड़ता था। अब सीधे ग्राहकों को बेचने पर 300 से 350 रुपये मिल रहे हैं।

सोलर पंप से खेती में मिल रही मदद

जलवायु परिवर्तन के कारण कश्मीर में बारिश का समय बदल रहा है। इससे मिट्टी में नमी की कमी हो रही है और केसर की पैदावार प्रभावित हो रही है।

जावेद बताते हैं कि उनके खेत बिजली की लाइनों से दूर हैं, इसलिए बोरवेल लगाना मुश्किल था। Parivartan पहल के तहत सोलर पंप मिलने से अब मिट्टी में जरूरी नमी बनाए रखने में मदद मिल रही है।

पंपोर में करीब 3,200 हेक्टेयर जमीन पर केसर की खेती होती है, जिससे लगभग 12,000 परिवार जुड़े हैं।

सब्जियों और सेब की खेती में भी फायदा

Parivartan पहल के तहत पुलवामा और उरी में किसानों को पॉलीहाउस, ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और सोलर ड्रायर की सुविधा दी गई है।

पुलवामा के किसान फारूक अहमद गनई बताते हैं कि इन सुविधाओं से सब्जियों की गुणवत्ता और उनकी कमाई में सुधार हुआ है। पहले धूप में सुखाई गई लाल मिर्च 250 रुपये प्रति किलो बिकती थी, जबकि सोलर ड्रायर के इस्तेमाल से अब 450 रुपये मिल रहे हैं।

वहीं, गांदरबल में सेब किसानों को ग्रेडिंग, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग में मदद मिल रही है। कुछ किसान कम गुणवत्ता वाले सेब से एप्पल चिप्स बनाकर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।

किसानों की कमाई बढ़ाने पर जोर

HDFC Bank के मुताबिक, कश्मीर में इस पहल से जुड़े किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का कुल रेवेन्यू 5.2 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।

बैंक की CSR प्रमुख नुसरत पठान का कहना है कि Parivartan के जरिए खेती के तरीके सुधारने, फूड प्रोसेसिंग और बाजार तक किसानों की पहुंच बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।

बैंक के अनुसार, Parivartan कार्यक्रम देशभर में 10.77 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंच चुका है। FY26 में बैंक ने CSR गतिविधियों पर 1,316.18 करोड़ रुपये खर्च किए।

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