जॉइंट होम लोन लेने जा रहे हैं? इस वजह से अटक सकती है मंजूरी, आवेदन से पहले जानें ये जरूरी बातें

जॉइंट होम लोन से लोन लेने की योग्यता बढ़ सकती है, लेकिन इसमें दोनों आवेदकों की क्रेडिट प्रोफाइल अहम होती है। अगर किसी एक को-एप्लीकेंट का क्रेडिट स्कोर कमजोर है या पुराने भुगतान में देरी हुई है, तो इसका असर लोन की मंजूरी, रकम और शर्तों पर पड़ सकता है।

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In Short

  • जॉइंट होम लोन में सभी को-एप्लीकेंट्स की क्रेडिट हिस्ट्री की जांच होती है।
  • एक आवेदक की कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल पूरे लोन आवेदन को प्रभावित कर सकती है।
  • लेंडर क्रेडिट स्कोर के साथ इनकम, मौजूदा EMI और FOIR भी देखते हैं।

By Gaurav Kumar:

Joint Home Loan: घर खरीदने के लिए जॉइंट होम लोन लेने से लोन की योग्यता बेहतर हो सकती है। इसकी वजह यह है कि इसमें दोनों आवेदकों की इनकम को साथ जोड़कर देखा जाता है। लेकिन सिर्फ ज्यादा इनकम होना ही काफी नहीं है। लेंडर जॉइंट लोन में शामिल हर को-एप्लीकेंट की क्रेडिट हिस्ट्री और भुगतान के रिकॉर्ड की भी जांच करते हैं। ऐसे में एक व्यक्ति की कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल पूरे आवेदन पर असर डाल सकती है।

सभी को-एप्लीकेंट की होती है जांच

जॉइंट होम लोन में लेंडर केवल मुख्य आवेदक का क्रेडिट स्कोर नहीं देखते। सभी को-एप्लीकेंट की क्रेडिट हिस्ट्री को लोन के आकलन में शामिल किया जाता है। अगर किसी एक व्यक्ति ने पहले लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान देर से किया है, कोई रकम बकाया है या उसकी क्रेडिट प्रोफाइल कमजोर है, तो लोन मंजूर होने की संभावना, मिलने वाली रकम या लोन की शर्तों पर असर पड़ सकता है।

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केवल अच्छा क्रेडिट स्कोर काफी नहीं

क्रेडिट स्कोर से किसी व्यक्ति के पुराने भुगतान व्यवहार का पता चलता है। आम तौर पर कई क्रेडिट प्रोडक्ट्स के लिए 700 से ऊपर का स्कोर पर्याप्त माना जाता है। हालांकि होम लोन जैसे लंबे समय के कर्ज में लेंडर केवल स्कोर पर फैसला नहीं करते। इनकम की स्थिरता, पहले से चल रही देनदारियां और नई EMI चुकाने की क्षमता भी देखी जाती है।

आवेदन से पहले क्रेडिट रिपोर्ट देखें

जॉइंट होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले दोनों आवेदकों को अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जांच लेनी चाहिए। इससे किसी बकाया रकम, देरी से किए गए भुगतान या रिपोर्ट में मौजूद गलती का पता चल सकता है। अगर कोई बकाया कर्ज है तो उसे चुकाने से प्रोफाइल मजबूत हो सकती है। होम लोन से ठीक पहले गैर-जरूरी नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेने से भी बचना चाहिए।

इनकम के साथ मौजूदा EMI भी अहम

लेंडर FOIR यानी फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो भी देखते हैं। यह बताता है कि नेट मासिक इनकम का कितना हिस्सा मौजूदा और प्रस्तावित EMI में जाएगा। आमतौर पर लेंडर इसे करीब 40 से 50 फीसदी से नीचे रखना पसंद करते हैं। ज्यादा मौजूदा देनदारियां होने पर लोन की योग्य रकम कम हो सकती है।

इसलिए जॉइंट होम लोन से पहले दोनों आवेदकों की क्रेडिट प्रोफाइल, बकाया कर्ज, भुगतान रिकॉर्ड और मौजूदा EMI की स्थिति देखना जरूरी है।
 

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