ITR भरते समय इन 6 गलतियों से बचें, वरना जुर्माना और टैक्स नोटिस बढ़ा सकता है परेशानी

31 जुलाई की डेडलाइन से पहले ITR भरने की तैयारी कर रहे हैं तो जल्दबाजी में की गई छोटी गलती भी भारी पड़ सकती है। गलत टैक्स रिजीम चुनने से लेकर विदेशी संपत्ति छिपाने तक कई चूक टैक्स नोटिस और जुर्माने की वजह बन सकती हैं। जानिए किन गलतियों से बचना जरूरी है।

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In Short

  • ITR-1 और ITR-2 भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई आखिरी तारीख है।
  • सिर्फ फॉर्म 16 पर भरोसा करना और गलत टैक्स रिजीम चुनना महंगा पड़ सकता है।
  • विदेशी संपत्ति छिपाने या समय पर ITR वेरिफाई न करने पर जुर्माना लग सकता है।

By Gaurav Kumar:

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR भरने की अंतिम तारीख नजदीक आ रही है। ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने वाले आम टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन तय की गई है। इनकम टैक्स विभाग ने लोगों को आखिरी समय का इंतजार किए बिना जल्द रिटर्न भरने की सलाह दी है।

ITR भरते समय की गई छोटी-सी गलती भी टैक्स नोटिस, अतिरिक्त टैक्स या भारी जुर्माने की वजह बन सकती है। खासकर नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों, गलत टैक्स रिजीम चुनने वालों और विदेशी संपत्ति रखने वाले टैक्सपेयर्स को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

केवल फॉर्म 16 पर भरोसा करना

कई कर्मचारी ITR भरते समय सिर्फ फॉर्म 16 में दी गई जानकारी का इस्तेमाल करते हैं। फॉर्म 16 में आमतौर पर सैलरी और उस पर काटे गए TDS की जानकारी होती है।

इसमें सेविंग अकाउंट के ब्याज, एफडी से मिली कमाई, डिविडेंड और दूसरी आय की पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिए रिटर्न भरने से पहले बैंक स्टेटमेंट, TIS, निवेश रिकॉर्ड और कैपिटल गेन से जुड़े दस्तावेज भी जांचने चाहिए।

बिना तुलना टैक्स रिजीम चुनना

टैक्सपेयर्स कई बार पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था की तुलना किए बिना किसी एक विकल्प को चुन लेते हैं। नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब की दरें कम हो सकती हैं, लेकिन इसमें HRA, LTA, होम लोन के ब्याज और धारा 80C, 80D तथा 80CCD(1B) जैसी कई छूट नहीं मिलतीं।

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इसलिए दोनों व्यवस्थाओं में बनने वाले टैक्स की तुलना करने के बाद ही सही विकल्प चुनना चाहिए।

बिना सबूत ज्यादा कटौती दिखाना

80C, 80D, 80G और दूसरी धाराओं के तहत कटौती तभी दिखानी चाहिए, जब निवेश या भुगतान वास्तव में किया गया हो। केवल कंपनी को दिए गए निवेश के अनुमान के आधार पर क्लेम करना परेशानी बढ़ा सकता है।

बीमा प्रीमियम, ELSS, पीएफ, होम लोन रीपेमेंट और दान से जुड़ी रसीदों की जांच करना जरूरी है।

बोनस और बकाया आय को नजरअंदाज करना

बोनस, बकाया सैलरी, एडवांस वेतन, जॉइनिंग या रिटेंशन बोनस, वीआरएस मुआवजा और रिटायरमेंट से मिली रकम पर लगने वाले टैक्स की सही जानकारी रिटर्न में देना जरूरी है।

विदेशी संपत्ति की जानकारी छिपाना

भारत में निवासी टैक्सपेयर्स को विदेशी बैंक खाते, शेयर, ESOP, रिटायरमेंट अकाउंट और विदेशी कंपनियों में आर्थिक हिस्सेदारी की जानकारी ITR में देनी होती है। ऐसा नहीं करने पर काला धन कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

रिटर्न भरकर वेरिफिकेशन भूल जाना

सिर्फ ITR जमा करना काफी नहीं है। आधार OTP, नेट बैंकिंग, बैंक या डीमैट खाते से इसे तय समय में वेरिफाई करना जरूरी है। समय पर वेरिफिकेशन नहीं होने पर रिटर्न अमान्य माना जा सकता है।
 

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