ITR-3 या ITR-4: 31 अगस्त की डेडलाइन से पहले जानें कौन सा ITR फॉर्म आपके लिए है सही
31 अगस्त 2026 की ITR फाइलिंग डेडलाइन से पहले जानें ITR-3 और ITR-4 में क्या अंतर है, कौन सा फॉर्म किस टैक्सपेयर के लिए सही है और किन परिस्थितियों में ITR-4 दाखिल नहीं किया जा सकता।

In Short
- 31 अगस्त 2026 उन पात्र टैक्सपेयर्स के लिए ITR दाखिल करने की डेडलाइन है, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है।
- ITR-3 आम तौर पर प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन नहीं चुनने वाले और ITR-4 के लिए पात्र न होने वाले टैक्सपेयर्स के लिए है।
- ITR-4 प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन अपनाने वाले पात्र व्यक्तियों, HUF और फर्मों के लिए है, जिनकी कुल आय आम तौर पर 50 लाख रुपये तक है।
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की 31 अगस्त 2026 की डेडलाइन करीब आ गई है। यह डेडलाइन उन व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई है और जिनके खातों के लिए टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है। ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए ITR-3 और ITR-4 में सही फॉर्म चुनना जरूरी है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, 31 जुलाई की डेडलाइन तक 6.5 करोड़ से ज्यादा ITR दाखिल हो चुके थे। इनमें ITR-3 और ITR-4 के 2 करोड़ से ज्यादा रिटर्न शामिल थे।
किन लोगों को ITR-3 दाखिल करना चाहिए?
ITR-3 आम तौर पर उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है, जिनकी कमाई बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और वे प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का विकल्प नहीं चुनते हैं।
अगर टैक्सपेयर्स नियमित रूप से अकाउंट्स की किताबें रखते हैं या ITR-4 के लिए पात्र नहीं हैं, तो उन्हें ITR-3 दाखिल करना पड़ सकता है। इस फॉर्म में सैलरी या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय शामिल की जा सकती है।
जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है, उनके लिए भी ITR-3 लागू हो सकता है। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग करने वाले पात्र टैक्सपेयर्स को भी ITR-4 के बजाय ITR-3 दाखिल करना पड़ सकता है।
ITR-4 किसके लिए है?
ITR-4 को सुगम भी कहा जाता है। यह व्यक्तियों, HUF और पात्र फर्मों के लिए है, जो निर्धारित शर्तों के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम अपनाते हैं। इसके लिए कुल आय आम तौर पर 50 लाख रुपये तक होनी चाहिए। इस फॉर्म के जरिए पात्र बिजनेस और प्रोफेशन की आय प्रिजम्प्टिव आधार पर घोषित की जा सकती है, जिससे वास्तविक खर्चों का विस्तृत हिसाब देने की जरूरत कम हो जाती है।
ITR-4 में सैलरी या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी और ब्याज, फैमिली पेंशन व डिविडेंड जैसी कुछ अन्य आय भी बताई जा सकती है। 5,000 रुपये तक की कृषि आय और सेक्शन 112A के तहत कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी निर्धारित शर्तों के अनुसार इसमें शामिल किए जा सकते हैं।
कौन ITR-4 नहीं भर सकता?
कुछ स्थितियों में ITR-4 दाखिल नहीं किया जा सकता। इनमें कुछ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स वाले टैक्सपेयर्स, सेक्शन 112A के तहत 1.25 लाख रुपये से ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति या आय वाले व्यक्ति, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर रखने वाले और कुछ मामलों में लॉस कैरी फॉरवर्ड करने वाले टैक्सपेयर्स शामिल हैं। डिफर्ड ईएसओपी टैक्स वाले और कंपनी डायरेक्टर भी ITR-4 के पात्र नहीं हैं।
31 अगस्त से पहले कौन से दस्तावेज रखें?
टैक्सपेयर्स को फॉर्म 26AS, AIS, TIS, फॉर्म 16 और 16A, बैंक स्टेटमेंट और टैक्स पेमेंट चालान तैयार रखने चाहिए। बिजनेस करने वालों को प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट, बैलेंस शीट, इनवॉइस, GST रिटर्न और पेमेंट गेटवे स्टेटमेंट भी संभालकर रखने चाहिए। निवेश करने वालों को ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, डीमैट रिकॉर्ड और कैपिटल गेन्स से जुड़ी जानकारी तैयार रखनी चाहिए।
जिन टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 है। रिटर्न इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ई-फाइलिंग पोर्टल से दाखिल किया जा सकता है और सबमिट करने के बाद उसका वेरिफिकेशन करना जरूरी है।