बीमा एजेंटों का कमीशन घटाने की तैयारी, जानिए IRDAI के नए प्रस्ताव से आपकी पॉलिसी पर क्या होगा असर
IRDAI के नए प्रस्ताव से इंश्योरेंस खरीदने और रिन्यू कराने का तरीका बदल सकता है। मोटर, हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन घटाने की तैयारी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका फायदा आपकी जेब को भी मिलेगा? जानिए नए नियमों से एजेंट, कंपनियों और पॉलिसीधारकों पर क्या असर पड़ सकता है।

In Short
- IRDAI के नए प्रस्ताव से मोटर, हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस में डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव हो सकता है।
- कमीशन घटने से प्रीमियम कम होगा या नहीं, यह बीमा कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति और अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा।
- - नए नियमों से एजेंट, डीलर्स और PoSP मॉडल की कमाई और इंश्योरेंस बेचने के तरीके में बदलाव आने की संभावना है।
भारतीय बीमा नियामक IRDAI ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इन नए नियमों का असर सिर्फ बीमा बेचने वाले एजेंट और डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई पर ही नहीं, बल्कि पॉलिसी खरीदने और रिन्यू कराने के तरीके पर भी पड़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कमीशन कम होता है तो क्या इसका फायदा ग्राहकों को कम प्रीमियम के रूप में मिलेगा या फिर सिर्फ बीमा कंपनियों और इंटरमीडियरी के काम करने का तरीका बदलेगा।
मोटर इंश्योरेंस में सबसे ज्यादा बदलाव
मोटर इंश्योरेंस में प्रस्तावित बदलाव काफी बड़े हैं। नई गाड़ियों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर IDE स्तर पर कमीशन कैप को शून्य रखने का प्रस्ताव है। वहीं ओन डैमेज, पर्सनल एक्सीडेंट और लीगल लाइबिलिटी कवर के लिए कमीशन 5% तक सीमित किया गया है।
एजेंट और एसोसिएट के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर 2.5% और अन्य कवर पर 10% तक कमीशन का प्रस्ताव है।
Shardul Amarchand Mangaldas & Co. की पार्टनर शैलजा लाल के मुताबिक, इन बदलावों से ऑटोमोबाइल डीलर्स, OEM से जुड़े ब्रोकर्स, इंश्योरर्स और मोटर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे ग्राहकों को मिलने वाली सर्विस और प्रोडक्ट विकल्पों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। डीलर्स को ग्राहकों को डिजिटल तरीके से पॉलिसी खरीदने के विकल्पों की जानकारी भी देनी होगी।
हेल्थ इंश्योरेंस में घटेगा कमीशन
इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस के लिए पहली बार पॉलिसी लेने पर IDE के लिए 15% और एजेंट/एसोसिएट के लिए 20% कमीशन कैप प्रस्तावित है।
वहीं रिन्यूअल कमीशन IDE के लिए 5% और एजेंट/एसोसिएट के लिए 10% रखा गया है।
Motilal Oswal के अनुसार, नए हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस में डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
लाइफ इंश्योरेंस में बदलेगा कमाई का मॉडल
10 साल या उससे ज्यादा प्रीमियम भुगतान वाली इंडिविजुअल नॉन-लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में पहले साल का कमीशन IDE के लिए 20% और एजेंट/एसोसिएट के लिए 25% तक सीमित करने का प्रस्ताव है।
वहीं रिन्यूअल कमीशन घटकर IDE के लिए 3% और एजेंट/एसोसिएट के लिए 5% हो सकता है।
इससे डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल में बदलाव आएगा, जहां ज्यादा शुरुआती भुगतान की जगह लंबे समय तक मिलने वाली कम रिन्यूअल कमाई पर जोर होगा।
क्या ग्राहकों का प्रीमियम होगा कम?
कमीशन कम होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि इंश्योरेंस प्रीमियम भी कम हो जाएगा। कमीशन बीमा कंपनियों की कुल लागत का सिर्फ एक हिस्सा होता है।
इसके अलावा क्लेम, प्रशासनिक खर्च, टेक्नोलॉजी और अन्य खर्च भी बीमा कंपनियों की लागत में शामिल होते हैं। इसलिए कमीशन से हुई बचत ग्राहकों तक पहुंचेगी या नहीं, यह कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति और अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा।
PoSP मॉडल में भी बदलाव संभव
IRDAI के प्रस्ताव में व्यक्तिगत विक्रेताओं को IDP कैटेगरी में बांटने की बात है, जिसमें इंश्योरेंस एजेंट, एसोसिएट और PoSP शामिल होंगे।
जो मोटर डीलर IDE के तौर पर योग्य नहीं होंगे, उन्हें किसी IDE के PoSP के रूप में काम करना पड़ सकता है। इससे यह बदल सकता है कि डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाले कमीशन में से कितना हिस्सा व्यक्तिगत विक्रेता तक पहुंचता है।
बीमा कंपनियों की कमाई और कारोबार पर असर
Motilal Oswal का अनुमान है कि कम डिस्ट्रीब्यूशन लागत से इंश्योरेंस कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी बेहतर हो सकती है, हालांकि शुरुआती समय में कारोबार की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
Jefferies के अनुसार, नए नियमों से FY28 से अलग-अलग इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में कमीशन 50% से 66% तक घट सकता है।
फिलहाल अंतिम असर IRDAI के अंतिम नियम और कंपनियों के प्राइसिंग फैसलों पर निर्भर करेगा।