इंश्योरेंस सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, जनवरी से लागू हो सकते हैं नए नियम
भारत में इंश्योरेंस सेक्टर के कमीशन नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। IRDAI नए नियम जनवरी या अप्रैल से लागू कर सकता है। इस प्रस्ताव का मकसद बीमा की लागत घटाना और कवरेज बढ़ाना है। हालांकि, इससे पॉलिसीबाजार जैसी कंपनियों की कमाई और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।

In Short
- IRDAI इंश्योरेंस कंपनियों और ब्रोकरों के कमीशन पर नई सीमा तय करने के नियम 1 जनवरी या 1 अप्रैल से लागू कर सकता है।
- नए प्रस्ताव के बाद PB Fintech के शेयर 36% और Turtlemint Fintech के शेयर करीब 50% तक गिर चुके हैं।
- छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बीमा कारोबार बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कमीशन देने का प्रस्ताव है।
भारत में इंश्योरेंस सेक्टर में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बीमा कंपनियों और ब्रोकरों को मिलने वाले कमीशन पर सीमा तय करने की तैयारी की जा रही है। इन प्रस्तावित नियमों का मकसद ग्राहकों के लिए बीमा की लागत कम करना और ज्यादा लोगों तक बीमा की पहुंच बढ़ाना है। हालांकि, इन बदलावों की खबर से इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) इन नए नियमों को 1 जनवरी या 1 अप्रैल से लागू करने पर विचार कर रहा है। नियामक की कार्यकारी अधिकारी गिरिजा सुब्रमण्यम ने एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उनके मुताबिक, नियमों को जल्द लागू करने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन सही तरीके से सुधार करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
कमीशन पर लगेगी सीमा
IRDAI ने पिछले महीने बीमा कंपनियों की ओर से ब्रोकरों और दूसरे डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिए जाने वाले कमीशन पर सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा था। इसमें हेल्थ, लाइफ, प्रॉपर्टी और कैजुअल्टी इंश्योरेंस सहित ज्यादातर तरह के बीमा शामिल हैं। नियामक का मानना है कि कमीशन और दूसरे खर्चों पर नियंत्रण से ग्राहकों के लिए बीमा सस्ता हो सकता है।
नियामक के मुताबिक, साल 2023 में नियमों में ढील दिए जाने के बाद कमीशन में बढ़ोतरी प्रीमियम की तुलना में ज्यादा तेजी से हुई। इसके बावजूद बीमा कवरेज में उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई। निजी लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का कुल प्रीमियम में खर्च वित्त वर्ष 2021 के 16% से बढ़कर करीब 22% हो गया है। वहीं, निजी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों का खर्च वित्त वर्ष 2019 के 25% से बढ़कर लगभग 32% हो गया है।
Policybazaar और दूसरी कंपनियों पर असर
नए प्रस्तावों के सामने आने के बाद इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई है। ऑनलाइन इंश्योरेंस मार्केटप्लेस पॉलिसीबाजार की पैरेंट कंपनी PB Fintech के शेयरों में प्रस्ताव की घोषणा के बाद 36% तक गिरावट आई। वहीं, Turtlemint Fintech Solutions के शेयरों में इसके बाद से करीब 50% की गिरावट दर्ज की गई है।
विश्लेषकों के मुताबिक, कुछ ज्यादा मुनाफे वाली कैटेगरी में बैंकों और डिजिटल ब्रोकरों की फीस से होने वाली कमाई 90% तक घट सकती है। Jefferies Financial Group के अनुसार, नए बिजनेस पर कमीशन दरों में प्रस्तावित 10% कटौती से PB Fintech और Turtlemint जैसी कंपनियों की कमाई 10-12% तक घट सकती है।
रोजगार और छोटे शहरों पर फोकस
इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने चेतावनी दी है कि इन बदलावों से 10 लाख तक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, IRDAI की अधिकारी गिरिजा सुब्रमण्यम ने बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने की आशंकाओं को खारिज किया है। उनका कहना है कि इन सुधारों से बीमा वितरण का नेटवर्क बढ़ेगा और नए लोगों के लिए इस कारोबार में आने के अवसर बनेंगे।
प्रस्ताव में छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बीमा कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन भी शामिल हैं। 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में कारोबार करने पर तय कमीशन सीमा के अतिरिक्त 10% और 50 हजार से कम आबादी वाले इलाकों में 20% अतिरिक्त कमीशन देने का प्रस्ताव है।
अंतिम नियमों से पहले मांगे गए सुझाव
IRDAI ने कंपनियों और दूसरे संबंधित पक्षों से 25 अक्टूबर तक प्रस्ताव पर सुझाव मांगे हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद नियामक ड्राफ्ट नियम जारी करेगा और उन पर दोबारा लोगों की राय ली जाएगी। इसके बाद अंतिम नियमों का ढांचा तैयार किया जाएगा।
बीमा कंपनियों के खर्चों में कटौती को पांच साल में चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव है। इसका पहला अंतरिम लक्ष्य मार्च 2029 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए रखा गया है। वहीं, कमीशन पर सीमा को जल्द लागू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि नियमों में बदलाव से पहले बिक्री बढ़ाने और गलत तरीके से बीमा बेचने का जोखिम कम किया जा सके।