सोने की चमक बदली, अब गहनों के साथ लोन का सहारा ले रहे भारतीय!
भारत में सोने को हमेशा बचत और सुरक्षा का जरिया माना गया है, लेकिन अब इसकी भूमिका बदल रही है। लोग गहनों को सिर्फ संभालकर रखने के बजाय उनके बदले लोन ले रहे हैं। एनबीएफसी के गोल्ड लोन में तेज बढ़ोतरी दिखा रही है कि सोना अब क्रेडिट का नया साधन बन रहा है।

In Short
- एनबीएफसी कंपनियों के गोल्ड लोन में जून 2026 में सालाना आधार पर करीब 70% की बढ़ोतरी हुई
- लोग अब गोल्ड लोन का इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी नहीं बल्कि बिजनेस शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए कर रहे हैं
- छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में औपचारिक गोल्ड लोन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है
भारत में सोना हमेशा से सिर्फ गहना नहीं रहा है। परिवारों के लिए यह बचत, सुरक्षा और जरूरत के समय काम आने वाली संपत्ति रहा है। लेकिन अब सोने को रखने का तरीका बदल रहा है। लोग अब इसे सिर्फ संभालकर रखने के बजाय इसके बदले लोन लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 में एनबीएफसी कंपनियों के गोल्ड लोन में सालाना आधार पर करीब 70% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुल रिटेल क्रेडिट की ग्रोथ 20.3% रही। इस बढ़ते चलन के पीछे कई वजहें हैं, जो बताती हैं कि गोल्ड लोन अब सिर्फ मजबूरी नहीं बल्कि वित्तीय योजना का हिस्सा बन रहा है।
अब इमरजेंसी के लिए ही नहीं लिया जा रहा गोल्ड लोन
पहले गोल्ड लोन को लोग अचानक आई जरूरतों के लिए लेते थे। जैसे मेडिकल खर्च, पैसों की कमी या किसी जरूरी काम के लिए तुरंत पैसे जुटाना। लेकिन अब लोगों की सोच बदल रही है।
मणिपाल फिनटेक की सीईओ पूजा अभिषेक सिंह के मुताबिक, पहले लोग गोल्ड लोन को सिर्फ इमरजेंसी फंड के तौर पर देखते थे, लेकिन अब इसका इस्तेमाल प्लान किए गए खर्चों के लिए भी किया जा रहा है।
लोग अब इसका इस्तेमाल बिजनेस के लिए वर्किंग कैपिटल, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। यानी घर में रखा सोना अब सिर्फ लॉकर में बंद संपत्ति नहीं रह गया है।
पर्सनल लोन की जगह गोल्ड लोन क्यों पसंद कर रहे लोग
गोल्ड लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पहले से मौजूद सोना सिक्योरिटी के तौर पर काम करता है। इसलिए जिन लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री कमजोर है या जो खुद का काम करते हैं, उनके लिए लोन लेना आसान हो जाता है।
पर्सनल लोन की तुलना में गोल्ड लोन में दस्तावेज कम लगते हैं और प्रक्रिया भी तेज होती है। डिजिटल सर्विस, जल्दी अप्रूवल और आसान प्रक्रिया की वजह से अब ज्यादा लोग इसे दूसरे लोन विकल्पों के साथ देख रहे हैं।
सोने की बढ़ती कीमतों ने भी बढ़ाई मांग
गोल्ड लोन बढ़ने की एक बड़ी वजह सोने की कीमतों में तेजी भी है। जब सोने की कीमत बढ़ती है तो उसी गहने के बदले ज्यादा लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
लेकिन एनबीएफसी कंपनियों में करीब 70% की बढ़ोतरी यह बताती है कि सिर्फ सोने की कीमत बढ़ना ही इसकी वजह नहीं है। नए ग्राहक भी जुड़ रहे हैं और पुराने ग्राहक भी बढ़ी हुई कीमतों के कारण ज्यादा लोन ले रहे हैं।
शादी के गहनों से बिजनेस के पैसे तक पहुंचा सोना
भारत में सोना लंबे समय से शादी और परिवार की विरासत से जुड़ा रहा है। लेकिन अब इसका इस्तेमाल बदल रहा है।
लोग अब सोने को सिर्फ भविष्य के लिए बचाकर नहीं रख रहे, बल्कि बिजनेस बढ़ाने, रोजमर्रा के खर्च, पढ़ाई और स्वास्थ्य जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
गोल्ड लोन अब कई लोगों के लिए जरूरत के समय आखिरी विकल्प नहीं बल्कि आसानी से मिलने वाला फाइनेंस विकल्प बनता जा रहा है।
छोटे शहरों और गांवों में बढ़ रहा गोल्ड लोन का बाजार
गोल्ड लोन का बढ़ता चलन सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। एनबीएफसी कंपनियां और दूसरी लोन देने वाली कंपनियां छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक अपनी पहुंच बढ़ा रही हैं।
भारत के छोटे शहरों और गांवों में लोगों के पास बड़ी मात्रा में फिजिकल गोल्ड मौजूद है। अब संगठित कंपनियां इस सोने के बदले लोगों को औपचारिक लोन उपलब्ध करा रही हैं।
आईसीआरए के अनुमान के मुताबिक संगठित गोल्ड लोन बाजार वित्त वर्ष 2026 में करीब 15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
क्या बढ़ता गोल्ड लोन आर्थिक परेशानी का संकेत है
गोल्ड लोन में तेज बढ़ोतरी को देखकर सवाल उठता है कि क्या लोग मजबूरी में अपना सोना गिरवी रख रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ आर्थिक दबाव की वजह से नहीं हो रहा है।
पूजा अभिषेक सिंह के अनुसार, डिजिटल सुविधा, आसान पहुंच और औपचारिक लोन सिस्टम की बढ़ती स्वीकार्यता भी इसकी बड़ी वजह है। अब बैंक, एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियां लोगों को पुराने अनौपचारिक कर्ज के मुकाबले बेहतर विकल्प दे रही हैं।
अगर सोने की कीमत कम हुई तो क्या होगा
गोल्ड लोन के भविष्य पर सोने की कीमतों का असर जरूर पड़ेगा। अगर कीमतें स्थिर होती हैं या गिरती हैं तो गहनों के बदले मिलने वाली लोन राशि पर असर पड़ सकता है।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 12 से 18 महीनों में ग्रामीण इलाकों में बढ़ती पहुंच, फाइनेंशियल इंक्लूजन और फिजिटल लोन मॉडल गोल्ड लोन बाजार को आगे बढ़ाते रहेंगे।
भारत में जहां सोना हमेशा सुरक्षा और बचत का प्रतीक रहा है, वहीं अब यह लोगों के लिए पैसे जुटाने का जरिया भी बनता जा रहा है।