भारत में इंश्योरेंस की बड़ी कमी, सिर्फ 3.7% लोगों तक पहुंचा बीमा; McKinsey रिपोर्ट में खुलासा
भारत में बैंकिंग और निवेश की पहुंच तेजी से बढ़ी है, लेकिन बीमा कवरेज अभी भी वैश्विक स्तर से काफी पीछे है। मैकिन्से की रिपोर्ट ने बताया कि किन क्षेत्रों में सुरक्षा का अंतर सबसे ज्यादा है और आने वाले समय में AI और डिजिटल सिस्टम कैसे बदलाव ला सकते हैं।

In Short
- भारत में कुल बीमा पहुंच FY2025 में GDP का 3.7% रही, जबकि वैश्विक औसत 7.3% है।
- नॉन-लाइफ इंश्योरेंस में भारत की पहुंच सिर्फ 1% है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।
- AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से बीमा बिक्री, क्लेम और ग्राहक सेवा में बदलाव की उम्मीद जताई गई है।
भारत में बैंक खाते और निवेश से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार तेजी से हुआ है, लेकिन बीमा के मामले में अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है। देश में बीमा की पहुंच (Insurance Penetration) अभी भी वैश्विक स्तर से काफी कम है। मैकिन्से की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुल बीमा पहुंच FY2025 में GDP का सिर्फ 3.7% रही, जबकि दुनियाभर का औसत 7.3% है।
नॉन-लाइफ इंश्योरेंस में सबसे बड़ा अंतर
मैकिन्से एंड कंपनी की सितंबर 2026 की रिपोर्ट “India’s new insurance track: The marathon becomes an AI-led decathlon” के अनुसार, भारत में लाइफ इंश्योरेंस की पहुंच GDP के 2.7% पर है, जो दुनिया के 3% औसत के काफी करीब है।
लेकिन नॉन-लाइफ इंश्योरेंस में स्थिति काफी अलग है। भारत में इसकी पहुंच सिर्फ 1% है, जबकि वैश्विक औसत 4.3% है। यानी हेल्थ, मोटर और अन्य सामान्य बीमा क्षेत्रों में सुरक्षा का बड़ा अंतर मौजूद है।
बैंक खाते बढ़े, लेकिन बीमा की रफ्तार धीमी रही
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) तेजी से बढ़ा है। साल 2014 में जहां 53% वयस्कों के पास बैंक खाता था, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 89% हो गया।
वहीं, डिमैट खातों की संख्या भी FY2017 के करीब 2.8 करोड़ से बढ़कर FY2026 में लगभग 22.5 करोड़ हो गई।
हालांकि, व्यक्तिगत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों की संख्या में ज्यादा बदलाव नहीं आया। FY2017 से FY2025 के बीच इन-फोर्स पॉलिसियों की संख्या करीब 33 करोड़ पर बनी रही।
हेल्थ इंश्योरेंस में बढ़ोतरी, लेकिन कवरेज अभी भी कम
हेल्थ इंश्योरेंस जनरल इंश्योरेंस सेक्टर का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल इंश्योरेंस मार्केट में इसकी हिस्सेदारी करीब 38% है और FY2022 से FY2025 के बीच इसमें लगभग 17% की सालाना वृद्धि हुई।
इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस से कवर लोगों की संख्या FY2017 के करीब 3.2 करोड़ से बढ़कर FY2025 में 6 करोड़ हो गई।
हालांकि, सरकारी योजनाओं को शामिल करने के बाद भी भारत की करीब 39% आबादी ही हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज में आती है।
बढ़ते जोखिमों से बढ़ सकती है बीमा की मांग
मैकिन्से के अनुसार, बढ़ते मेडिकल खर्च, लंबी जीवन अवधि, ज्यादा संपत्ति का मालिकाना हक, जलवायु से जुड़े जोखिम और आय में उतार-चढ़ाव जैसे कारण आने वाले समय में बीमा की जरूरत बढ़ा सकते हैं।
AI और डिजिटल सिस्टम से बदल सकता है बीमा सेक्टर
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, रेगुलेटरी सुधार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बीमा सेक्टर की अगली ग्रोथ में मदद कर सकते हैं।
AI की मदद से पर्सनलाइज्ड बिक्री, तेज अंडरराइटिंग, क्लेम प्रोसेसिंग, फ्रॉड डिटेक्शन और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाया जा सकता है।
मैकिन्से पार्टनर अभिलाष श्रीधरन ने कहा कि कंपनियों को सिर्फ छोटे AI प्रयोगों तक सीमित रहने के बजाय डिस्ट्रीब्यूशन, अंडरराइटिंग, क्लेम और कस्टमर सर्विस जैसे पूरे सिस्टम में बदलाव पर ध्यान देना होगा।
भारत के लिए चुनौती अब सिर्फ वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने की नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोगों और कारोबारों तक पर्याप्त बीमा सुरक्षा पहुंचाने की है।