भारत में तेजी से बढ़ा क्रेडिट का दायरा! यूपी, एमपी और बिहार ने बदली लोन मार्केट की तस्वीर

भारत में लोन लेने वालों का आंकड़ा तेजी से बदल रहा है। अब बड़े शहरों के अलावा यूपी, बिहार और एमपी जैसे राज्यों से भी क्रेडिट ग्रोथ को मजबूती मिल रही है। जानिए कैसे छोटे शहरों, युवाओं और महिलाओं ने देश के लोन मार्केट की तस्वीर बदल दी है।

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In Short

  • यूपी, एमपी और बिहार बने क्रेडिट ग्रोथ के बड़े केंद्र, जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु की हिस्सेदारी में कमी आई।
  • मार्च 2026 तक 74% योग्य भारतीयों ने लिया क्रेडिट, जो मार्च 2017 के 35% से दोगुना से ज्यादा है।
  • स्मार्टफोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बने नए लोन लेने वालों के बड़े कारण, वहीं महिला और युवा borrowers की हिस्सेदारी भी बढ़ी।

By Gaurav Kumar:

India Credit Growth: भारत में लोन लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। TransUnion CIBIL के डेटा के मुताबिक मार्च 2026 तक देश के 74% योग्य लोगों ने कम से कम एक बार क्रेडिट लिया है, जो मार्च 2017 में सिर्फ 35% था।

इस बदलाव में अब बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों और गांवों की भी बड़ी भूमिका दिख रही है। खास बात यह है कि यूपी, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में क्रेडिट लेने वालों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। आखिर इन राज्यों में क्रेडिट का विस्तार कैसे हुआ?

यूपी में सबसे तेज बढ़ा क्रेडिट मार्केट

महाराष्ट्र और तमिलनाडु लंबे समय से देश के बड़े क्रेडिट मार्केट रहे हैं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। मार्च 2017 से मार्च 2026 के बीच महाराष्ट्र में क्रेडिट लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 12% से घटकर 10% और तमिलनाडु की 11% से घटकर 9% रह गई।

वहीं, उत्तर प्रदेश में क्रेडिट लेने वालों की हिस्सेदारी 8% से बढ़कर 11% हो गई। मध्य प्रदेश में यह 4% से बढ़कर 6% और बिहार में 3% से बढ़कर 5% पहुंच गई। TransUnion CIBIL के एमडी और सीईओ भावेश जैन के मुताबिक, देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य यूपी में क्रेडिट लेने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसका मतलब है कि अब ज्यादा लोग गैर-औपचारिक लोन छोड़कर बैंक और फाइनेंशियल संस्थानों से जुड़ रहे हैं।

यह बदलाव सिर्फ राज्यों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और गांवों में भी अब लोन और बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच तेजी से बढ़ रही है।

सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों में बढ़ी हिस्सेदारी

TransUnion CIBIL के मुताबिक, मार्च 2017 से मार्च 2026 के बीच छोटे शहरों और गांवों से लोन लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 53% से बढ़कर 63% हो गई है।

इसका मतलब है कि अब लोन लेने का चलन सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के लोग भी बैंक और फाइनेंशियल सेवाओं से तेजी से जुड़ रहे हैं।

पहले लोग नया लोन लेने के लिए सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन खरीदते थे, लेकिन अब इसमें बदलाव आया है।

स्मार्टफोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बने पहली बार लोन लेने का बड़ा कारण

मार्च 2026 तक पहली बार लोन लेने वाले लोगों में सबसे बड़ा योगदान अब कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का है। इसमें स्मार्टफोन और घर में इस्तेमाल होने वाले सामान शामिल हैं।

भावेश जैन के मुताबिक, कोविड से पहले नए लोन लेने वाले लोगों को जोड़ने में दोपहिया वाहन, खेती और प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग सबसे आगे थे। लेकिन अब कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन पहली बार लोन लेने वालों का बड़ा जरिया बन गया है।

इन लोन की औसत रकम करीब 38,000 रुपये है। यानी लोग मिड-रेंज फोन और घरेलू सामान खरीदने के लिए पहली बार लोन ले रहे हैं। खासकर युवाओं के लिए स्मार्टफोन अब जरूरत बन चुका है, चाहे वह काम के लिए हो या कंटेंट क्रिएशन जैसे कामों के लिए।

महिला और युवा कर्ज लेने वालों की संख्या बढ़ी

देश में लोन लेने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मार्च 2017 में जहां क्रेडिट लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 11% थी, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 28% हो गई। इस दौरान महिलाओं की लोन लेने में भागीदारी भी बढ़ी है।

लोन लेने वाले लोगों में महिलाओं की हिस्सेदारी 22% से बढ़कर 30% हो गई है। वहीं, 35 साल से कम उम्र के युवाओं की हिस्सेदारी 33% से बढ़कर 39% पहुंच गई है। इससे पता चलता है कि अब ज्यादा महिलाएं और युवा बैंकिंग और फाइनेंशियल सिस्टम से जुड़ रहे हैं।

लोन बढ़ने के साथ डिफॉल्ट भी रहा कम

देश में लोन लेने वालों की संख्या बढ़ने के बावजूद भुगतान में देरी के मामले ज्यादा नहीं बढ़े हैं। TransUnion CIBIL के अनुसार, रिटेल लोन में डिलिंक्वेंसी यानी समय पर भुगतान नहीं करने के मामले करीब 10 साल के सबसे निचले स्तर पर हैं।

कुल रिटेल लोन में डिलिंक्वेंसी 1.3% तक आ गई है, जबकि पर्सनल लोन में यह 1% से भी कम है। अधिकारियों के मुताबिक, बेहतर क्रेडिट मॉनिटरिंग और युवाओं में अपने क्रेडिट रिकॉर्ड को लेकर बढ़ती जागरूकता इसकी बड़ी वजह है।

अब फाइनेंशियल संस्थान नए ग्राहकों के साथ-साथ पुराने ग्राहकों पर भी ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। जिन लोगों का पहले से लोन रिकॉर्ड अच्छा है और जो बैंक से जुड़े हुए हैं, उन्हें लोन देने में प्राथमिकता दी जा रही है।

आने वाले समय में भारत के क्रेडिट मार्केट में छोटे शहरों, गांवों, महिलाओं और युवाओं की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।

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