विरासत में मिले गोल्ड, शेयर और म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स कैसे बचाएं? एक्सपर्ट से जानिए सही तरीका

विरासत में मिली संपत्तियों को लेकर सही समय पर टैक्स प्लानिंग करना जरूरी है, क्योंकि गलत फैसले से टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। Ved Jain & Associates के अंकित जैन ने बताया कि कुछ नियमों के तहत गैर-रिहायशी संपत्ति बेचकर रिहायशी प्रॉपर्टी में निवेश करने पर कैपिटल गेन टैक्स में राहत मिल सकती है।

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In Short

  • गैर-रिहायशी संपत्ति बेचकर रिहायशी प्रॉपर्टी में निवेश करने पर मिल सकती है कैपिटल गेन टैक्स में राहत।
  • विरासत में मिले सोना, म्यूचुअल फंड और कमर्शियल एसेट्स की बिक्री से पहले टैक्स प्लानिंग जरूरी।
  • टैक्स छूट के लिए तय शर्तों और सही दस्तावेजों का ध्यान रखना होगा।

By Sonam:

विरासत में मिली संपत्तियों को संभालने और बेचने से पहले सही टैक्स प्लानिंग करना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि सही रणनीति अपनाकर कैपिटल गेन टैक्स के बोझ को कम किया जा सकता है।

बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Ved Jain & Associates के अंकित जैन ने बताया कि गैर-रिहायशी संपत्ति बेचकर मिली रकम को रिहायशी प्रॉपर्टी में निवेश करने पर तय शर्तों के साथ कैपिटल गेन टैक्स में राहत मिल सकती है।

घर खरीदने में पैसा लगाने से मिल सकता है टैक्स लाभ

अंकित जैन के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी गैर-रिहायशी संपत्ति को बेचता है और बिक्री से मिली पूरी रकम को रिहायशी संपत्ति खरीदने में लगाता है, तो तय नियमों के तहत पूरे कैपिटल गेन पर छूट मिल सकती है।

यह प्रावधान उन लोगों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनके पास विरासत में अलग-अलग तरह की संपत्तियां आई हैं। इनमें कमर्शियल प्रॉपर्टी, इक्विटी म्यूचुअल फंड, डेट म्यूचुअल फंड और सोने के गहने जैसी संपत्तियां शामिल हो सकती हैं।

विरासत में मिली संपत्तियों को मैनेज करने में मदद

कई परिवारों को विरासत में एक ही तरह की संपत्ति नहीं मिलती, बल्कि अलग-अलग वित्तीय और फिजिकल एसेट्स मिलते हैं। ऐसे में कई बार लोग इन संपत्तियों को एक जगह लाना चाहते हैं और किसी स्थायी एसेट जैसे रिहायशी प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं।

ऐसे मामलों में टैक्स छूट का यह प्रावधान सिर्फ टैक्स बचाने का तरीका नहीं, बल्कि संपत्तियों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने का विकल्प बन सकता है। अंकित जैन ने बताया कि जिन परिवारों को बड़ी मात्रा में वित्तीय संपत्तियां विरासत में मिली हैं, उन्हें सिर्फ बेचने के बारे में नहीं बल्कि टैक्स देनदारी को कम करने की रणनीति पर भी ध्यान देना चाहिए।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इन शर्तों को पूरा करना जरूरी

हालांकि, यह सुविधा हर स्थिति में लागू नहीं होती। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें तय हैं। अंकित जैन ने बताया कि नई रिहायशी संपत्ति खरीदते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि टैक्सपेयर के पास पहले से एक से ज्यादा प्रॉपर्टी नहीं होनी चाहिए।

इसके अलावा, टैक्स छूट का फायदा तभी मिल सकता है जब बिक्री से मिली पूरी रकम को रिहायशी संपत्ति खरीदने में लगाया जाए। अगर पूरी रकम निवेश नहीं की जाती है, तो टैक्स लाभ प्रभावित हो सकता है।

विरासत में मिली संपत्ति के दस्तावेज रखें संभालकर

विरासत से जुड़ी टैक्स प्लानिंग में दस्तावेजों की भूमिका भी अहम होती है। संपत्ति की खरीद लागत, पुराने रिकॉर्ड और ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेज भविष्य में कैपिटल गेन की गणना के समय जरूरी हो सकते हैं।

इसलिए विरासत में मिले सोना, म्यूचुअल फंड या कमर्शियल एसेट को बेचने से पहले सही रिकॉर्ड और नियमों को समझना जरूरी है। सही तरीके से प्लानिंग करने पर कैपिटल गेन टैक्स के बोझ को कम किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सभी शर्तों को पूरा करना और प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करना जरूरी है।

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