₹50,000 के रूबी जैसा दिख सकता है 500 रुपये का पत्थर! जानिए असली और नकली रूबी में कैसे पता करें अंतर

रूबी यानी माणिक खरीदते समय सिर्फ उसका रंग और चमक देखकर फैसला करना महंगा पड़ सकता है। बाजार में प्राकृतिक, लैब में तैयार, ट्रीट किए गए और नकली रत्न मौजूद हैं। ऐसे में असली रूबी की पहचान, उसकी क्वालिटी और प्रमाणपत्र की जांच क्यों जरूरी है, जानिए रत्न विशेषज्ञ की अहम सलाह।

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By Gaurav Kumar:

हर चमकने वाला रत्न उतना कीमती नहीं होता, जितना वह दिखता है। खासकर रूबी (जिसे माणिक भी कहते हैं) जैसे महंगे रत्न खरीदते समय सिर्फ रंग, चमक या आकार देखकर उसकी असलियत और कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।

रूबी यानी माणिक की गहरी लाल चमक सदियों से राजघरानों, रत्न संग्रह करने वालों और आभूषण पसंद करने वालों को आकर्षित करती रही है। भारत में रूबी और दूसरे कीमती रत्नों की खास पहचान सिर्फ उनकी खूबसूरती की वजह से नहीं है, बल्कि इनके सांस्कृतिक और ज्योतिषीय महत्व के कारण भी है।

आम खरीदारों को एक्सपर्ट की सलाह

रत्नों की चमक के पीछे एक ऐसा बाजार भी है, जो आम खरीदार के लिए काफी उलझन भरा हो सकता है। यहां सिर्फ देखकर किसी रत्न की असली कीमत का अंदाजा लगाना हमेशा आसान नहीं होता। शिव पार्वती जेम्स एंड ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और रत्न विशेषज्ञ प्रखर ठाकुर बताते हैं कि किसी भी कीमती रत्न की असलियत, क्विलिटी और प्रमाणपत्र को समझना क्यों जरूरी है और इससे खरीदार महंगी गलती करने से कैसे बच सकते हैं।

सबसे बड़ी गलतफहमी

विशेषज्ञ के अनुसार, ग्राहकों के बीच सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि रूबी या किसी दूसरे रत्न के नाम पर बेचा जाने वाला हर पत्थर प्राकृतिक और उतना ही कीमती होता है।

50,000 रुपये का रूबी और 500 रुपये का रूबी, दोनों ही बिना जानकारी रखने वाले व्यक्ति को देखने में काफी एक जैसे लग सकते हैं। दोनों का रंग आकर्षक लाल हो सकता है, दोनों को अच्छी तरह पॉलिश किया जा सकता है और दोनों को आभूषण में लगाया जा सकता है। लेकिन उनकी दुर्लभता, बनावट और असली कीमत में बहुत बड़ा अंतर हो सकता है।

रत्न विशेषज्ञ प्रखर ठाकुर के मुताबिक आज बाजार में कई तरह के रत्न और रूबी मौजूद हैं। इनमें लाखों साल में प्राकृतिक रूप से बने रत्न, लैब में तैयार किए गए रत्न, ट्रीट किए गए रत्न और कांच जैसी सामग्री से बने नकली रत्न शामिल हैं। इन सभी की बाजार में अपनी जगह है। समस्या तब होती है जब खरीदार को यह पता ही नहीं होता कि वह वास्तव में किस तरह का रत्न खरीद रहा है।

प्राकृतिक, सिंथेटिक और नकली रत्न में क्या अंतर?

प्राकृतिक रूबी और दूसरे प्राकृतिक कीमती रत्न जमीन के अंदर प्राकृतिक रूप से बनने की वजह से दुर्लभ होते हैं। यही कारण है कि इनकी कीमत भी काफी ज्यादा हो सकती है। दूसरी तरफ, लैब में तैयार किए गए रत्नों में प्राकृतिक रत्न जैसे कई भौतिक और रासायनिक गुण हो सकते हैं, लेकिन इन्हें कंट्रोल वातावरण में बनाया जाता है। इसलिए इनकी कीमत आमतौर पर प्राकृतिक रत्नों से काफी कम होती है।

इसके अलावा, कुछ रत्नों को उनका रंग या चमक बेहतर करने के लिए ट्रीटमेंट दिया जाता है। वहीं नकली रत्न सिर्फ देखने में असली रत्न जैसे लगते हैं, लेकिन उनमें उस रत्न के असली भौतिक और रासायनिक गुण नहीं होते।

असली रत्न खरीदने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

1) विशेषज्ञ की सलाह है कि रूबी या कोई भी कीमती रत्न खरीदने से पहले ग्राहक उसकी उत्पत्ति, क्विलिटी और ट्रीटमेंट से जुड़े सवाल जरूर पूछें। यह भी पता करें कि रत्न के साथ किसी मान्यता प्राप्त रत्न जांच प्रयोगशाला का सर्टिफिकेट दिया जा रहा है या नहीं।

2) खरीदारी से पहले एक से ज्यादा रत्नों की तुलना करना भी उपयोगी हो सकता है। इससे ग्राहकों को अलग-अलग रत्नों की क्वालिटी और कीमत में अंतर समझने में मदद मिलती है।

3) इसके साथ ही ऐसे विक्रेता को चुनना जरूरी है, जो अपने रत्नों की खासियतों के बारे में साफ जानकारी दे और ग्राहक के सवालों का आसानी से जवाब देने के लिए तैयार हो।

रत्न खरीदते समय प्रमाणपत्र क्यों जरूरी?

महंगा रूबी या कोई दूसरा कीमती रत्न खरीदते समय प्रमाणपत्र को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसी मान्यता प्राप्त रत्न जांच लैब की सर्टिफिकेट की असलियत और उसमें किए गए किसी भी ट्रीटमेंट के बारे में जरूरी जानकारी देता है।

रत्न खरीदते समय जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव

जैसे-जैसे रत्नों का बाजार बढ़ रहा है, खरीदारों के लिए सही जानकारी होना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। आज के खरीदारों के पास पिछली पीढ़ियों की तुलना में ज्यादा जानकारी उपलब्ध है। लेकिन उनके सामने अलग-अलग तरह के उत्पाद और कई तरह के मार्केटिंग दावे भी हैं।

सिर्फ चमक देखकर न खरीदें रूबी या कोई भी कीमती रत्न

कई खरीदारों को कभी पता ही नहीं चलता कि उन्होंने गलत रत्न खरीदा है, क्योंकि उनके पास उसकी असलियत पर सवाल उठाने की कोई वजह नहीं होती। वह रत्न वर्षों तक पहना जा सकता है, संभालकर रखा जा सकता है या पीढ़ियों तक आगे बढ़ सकता है। इस दौरान यह मान लिया जाता है कि उसकी चमक ही उसकी कीमत की गारंटी है।

लेकिन रत्न का दिखना और उसका असली होना हमेशा एक ही बात नहीं होती। इसलिए रूबी हो या कोई दूसरा कीमती रत्न, खरीदारी से पहले उसकी उत्पत्ति, गुणवत्ता, ट्रीटमेंट और प्रमाणपत्र की जानकारी लेना जरूरी है।
 

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