नौकरी जाने से भी बड़ा डर बना अस्पताल का बिल, जानिए हेल्थ कवर को लेकर कितना बड़ा है गैप ?

कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए बढ़ते मेडिकल खर्च ने आर्थिक चिंता का नया रूप ले लिया है। टाटा AIG की स्टडी में सामने आया कि बड़ी संख्या में कर्मचारी कंपनी के हेल्थ कवर पर निर्भर हैं, जबकि मेडिकल इमरजेंसी और नौकरी बदलने के समय उन्हें यह सुरक्षा पर्याप्त नहीं लगती।

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In Short

  • 94% कर्मचारियों ने अचानक मेडिकल खर्च को बड़ी आर्थिक चिंता बताया
  • 45% कर्मचारी अब भी पूरी तरह कंपनी के ग्रुप मेडिकल कवर पर निर्भर हैं
  • 75% लोगों को लगता है कि इमरजेंसी में एम्प्लॉयर का हेल्थ कवर पर्याप्त नहीं होगा

By Gaurav Kumar:

Corporate Health Insurance: कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अब नौकरी जाने से भी बड़ी आर्थिक चिंता अचानक आने वाला अस्पताल का बिल बन गया है। टाटा AIG जनरल इंश्योरेंस की 10 अगस्त को जारी स्टडी ‘द कॉर्पोरेट हेल्थ प्रोटेक्शन पल्स 2026’ में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती हेल्थकेयर लागत ने नौकरी की सुरक्षा, लोन की देनदारियों और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसी चिंताओं को भी पीछे छोड़ दिया है।

मेडिकल खर्च से सबसे ज्यादा आर्थिक तनाव

सर्वे में शामिल 94% कर्मचारियों ने माना कि अचानक होने वाला मेडिकल खर्च बहुत ज्यादा आर्थिक तनाव पैदा करता है। यह चिंता करियर में रुकावट या नौकरी जाने के डर से भी बड़ी है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि करीब 10 में से 7 कर्मचारी अपनी मौजूदा बचत के सहारे नौकरी जाने के बाद अधिकतम छह महीने तक ही खर्च चला सकते हैं। केवल 12% लोगों का मानना है कि उनकी बचत उन्हें एक साल से ज्यादा समय तक सहारा दे सकती है।

कंपनी के हेल्थ कवर पर ज्यादा निर्भरता

स्टडी के मुताबिक 84% कर्मचारियों ने माना कि कंपनी की तरफ से मिलने वाले ग्रुप मेडिकल कवर के साथ पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस भी होना चाहिए। इसके बावजूद 45% लोग अभी भी पूरी तरह अपने एम्प्लॉयर के हेल्थ प्लान पर निर्भर हैं।

रिपोर्ट में इसकी बड़ी वजह जागरूकता की कमी और पर्सनल पॉलिसी खरीदने को टालते रहने की सोच बताई गई है। खासकर 28 से 34 साल की उम्र के कर्मचारियों में यह रुझान ज्यादा देखा गया।

नौकरी बदलते समय बढ़ जाता है जोखिम

जॉब बदलने के दौरान भी हेल्थकेयर खर्च कर्मचारियों की सबसे बड़ी आर्थिक चिंता बना हुआ है। 88% कर्मचारियों ने माना कि नौकरी बदलते समय हेल्थ कवर बिना रुकावट जारी रहना चाहिए। हालांकि केवल 40% लोग ऐसे इंश्योरेंस विकल्पों के बारे में जानते हैं, जिनसे दो नौकरियों के बीच भी मेडिकल कवर जारी रखा जा सकता है।

ज्यादातर कर्मचारियों को अपना कवर पर्याप्त नहीं लगता

करीब 75% कर्मचारियों ने माना कि किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी में कंपनी की तरफ से मिलने वाला हेल्थ कवर पर्याप्त नहीं होगा। वहीं केवल 41% लोगों को अपनी कंपनी के हेल्थ प्लान में मिलने वाली सुविधाओं और फायदों की पूरी जानकारी है।

सेकेंडरी टॉप-अप पॉलिसी चुनते समय कर्मचारियों ने परिवार की सुरक्षा को सबसे ज्यादा अहमियत दी। ज्यादा बीमा राशि, परिवार के आश्रित सदस्यों का कवर और नौकरी बदलने के दौरान लगातार सुरक्षा उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं रहीं।

इस सर्वे में मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे और कोलकाता के 28 से 55 साल के 748 कॉर्पोरेट कर्मचारियों को शामिल किया गया था। सभी कर्मचारी एम्प्लॉयर की ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर्ड थे।

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