बैंक ने अप्रूव कर दिया होम लोन, लेकिन क्या आप सच में चुका पाएंगे EMI? एक्सपर्ट ने बताईं 5 जरूरी बातें

होम लोन मंजूर होने का मतलब यह नहीं कि आप उसकी ईएमआई आसानी से चुका पाएंगे। एक करोड़ रुपये के लोन पर ब्याज का बोझ भी काफी बड़ा हो सकता है। बेसिक होम लोन के सीईओ अतुल मोंगा ने पांच जरूरी बातें बताई हैं, जिन्हें घर खरीदने से पहले समझना जरूरी है।

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By Gaurav Kumar:

अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है। जब बैंक होम लोन मंजूर कर देता है, तो लगता है कि घर खरीदने की सबसे बड़ी मुश्किल दूर हो गई। लेकिन क्या बैंक से लोन मंजूर होने का मतलब यह भी है कि आप उसकी हर महीने की किस्त आसानी से चुका सकते हैं?

BASIC Home Loan के को-फाउंडर और सीईओ अतुल मोंगा ने इसी सवाल को लेकर घर खरीदने वालों को कुछ जरूरी सलाह दी है। उनका कहना है कि होम लोन लेने से पहले सिर्फ अपनी कमाई नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों के खर्च और आर्थिक जरूरतों को भी समझना जरूरी है।

₹1 करोड़ के होम लोन पर कितना देना होगा ब्याज?

बैंक आपकी आमदनी के आधार पर यह तय करता है कि आपको कितना लोन दिया जा सकता है। लेकिन बैंक यह नहीं बता सकता कि उस लोन की ईएमआई चुकाने के बाद आपकी जिंदगी कितनी आराम से चलेगी।

मान लीजिए अगर आप 9 फीसदी सालाना ब्याज पर 20 साल के लिए 1 करोड़ रुपये का होम लोन लेते हैं, तो हर महीने करीब 90,000 रुपये की ईएमआई देनी होगी। पूरे 20 साल में आप बैंक को लगभग 2.16 करोड़ रुपये चुकाएंगे। इसमें करीब 1.16 करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज होगा।

एक्सपर्ट अतुल मोंगा ने लोगों को होम लोन लेने से पहले पांच बातों पर जरूर ध्यान देने की सलाह दी है: 

1. ईएमआई चुकाने के बाद कितने पैसे बचेंगे?

एक्सपर्ट के मुताबिक, सिर्फ अच्छी सैलरी होने से यह नहीं मान लेना चाहिए कि आप बड़ी ईएमआई आसानी से चुका सकते हैं। असली सवाल यह है कि जरूरी खर्च, पहले से चल रहे लोन और नियमित बचत के बाद आपके पास कितने पैसे बचते हैं।

मान लीजिए आपकी हर महीने इन हैंड सैलरी 2.25 लाख रुपये है। इसमें से 90,000 रुपये होम लोन की ईएमआई में चले जाते हैं, यानी आपकी कमाई का 40 फीसदी हिस्सा। अगर पहले से 15,000 रुपये की कार लोन ईएमआई भी चल रही है, तो दोनों किस्तें मिलाकर आपकी कमाई का करीब 47 फीसदी हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च होगा।

ऐसी स्थिति में घर के रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं और अचानक आने वाली जरूरतों के लिए पैसे कम पड़ सकते हैं। एक्सपर्ट ने सलाह दी है कि अपना बजट किसी एक अच्छे महीने की कमाई के बजाय सामान्य महीने की आय और खर्च के आधार पर बनाना चाहिए।

2. घर की कीमत के अलावा दूसरे खर्च भी जोड़ें

घर खरीदने में सिर्फ डाउन पेमेंट देना ही काफी नहीं होता। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, कानूनी दस्तावेजों का खर्च, घर का इंटीरियर और शिफ्टिंग जैसे कई खर्च भी सामने आते हैं।

इन सभी खर्चों को घर खरीदने के बजट में पहले से शामिल करना चाहिए। अगर आप घर खरीदने के लिए अपनी पूरी जमा पूंजी खर्च कर देते हैं, तो नए घर में जाने के तुरंत बाद ही आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

इसलिए घर खरीदने का फैसला करने से पहले यह देखना जरूरी है कि सभी शुरुआती खर्च पूरे करने के बाद भी आपके पास पर्याप्त बचत बच रही है या नहीं।

3. मुश्किल समय के लिए अलग से पैसा रखें

नौकरी जाने, कमाई घटने या अचानक कोई बड़ा खर्च आने पर भी बैंक की ईएमआई बंद नहीं होती। इसलिए होम लोन लेने से पहले इमरजेंसी फंड तैयार रखना जरूरी है।

एक्सपर्ट की सलाह है कि कम से कम तीन से छह महीने के जरूरी घरेलू खर्च के बराबर रकम अलग रखनी चाहिए।

4. कम ईएमआई के चक्कर में कितना ज्यादा ब्याज देंगे?

एक्सपर्ट अतुल मोंगा का कहना है कि कई लोग ईएमआई कम रखने के लिए होम लोन की अवधि बढ़ा देते हैं। इससे हर महीने की किस्त जरूर घटती है, लेकिन लंबे समय में ब्याज का बोझ काफी बढ़ सकता है।

उदाहरण के लिए, 9 फीसदी ब्याज पर 1 करोड़ रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लेने पर ईएमआई करीब 90,000 रुपये बनती है। इस दौरान कुल ब्याज लगभग 1.16 करोड़ रुपये होगा।

लेकिन अगर इसी लोन की अवधि बढ़ाकर 25 साल कर दी जाए, तो ईएमआई घटकर करीब 84,000 रुपये रह जाएगी। हालांकि, कुल ब्याज बढ़कर लगभग 1.52 करोड़ रुपये हो जाएगा।

5. ब्याज दर बढ़ गई तो कैसे चुकाएंगे ईएमआई?

एक्सपर्ट के मुताबिक, होम लोन आमतौर पर लंबे समय के लिए लिया जाता है। इस दौरान जरूरी नहीं कि आपकी सैलरी उम्मीद के मुताबिक बढ़े। घरेलू खर्च बढ़ सकते हैं और ब्याज दरों में भी बदलाव हो सकता है।

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